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आओ चलें ब्रज खेलन होरी

दिल्ली में होली एक दिन में सिमट जाती है। सुबह से रंग में डूबनी शुरू होती है और शाम को अपने बदन से रंगों को उतारने की कोशिश के साथ सम्पन्न हो जाती है। लेकिन दिल्ली के नजदीक एक ऐसा क्षेत्र भी है, जहां होली पखवाड़े भर का हुड़दंग है, मस्ती है-होली से कई दिन पहले शुरू होकर होली से कई दिनों बाद तक। अगर आप भी होली के इस अनूठे रंग से सराबोर होना चाहते हैं तो आइए चलते हैं, ब्रज की होली देखने

इन दिनों ऋतुराज बसंत का साम्राज्य छाया हुआ है। क्या गांव, क्या शहर सर्वत्र होली का रंग छलकता दिखाई देता है। शहरों की अपेक्षा गांवों में होली का रंग कुछ ज्यादा ही दिखाई देता है, क्योंकि वहां के खेत-खलिहानों में नव फसल नव उमंग के साथ लहरा रही होती है। ऐसा लगता है कि धरती रूपी नव वधू षोडश श्रृंगार किए हुए किसी के मधुर मिलन के स्वप्नों में खोई हुई हो और उसके अंतर्मन से फूलों के रूप में कोमल उद्गार छलक कर सर्वत्र अपनी सुगंध से वातावरण को मनमोहक बना रहे हों। आभास होता है कि बसंत की मादकता किस तरह छाई हुई है।

बरसाना
आइये सबसे पहले चलते हैं बरसाना। दिल्ली से बरसाना की दूरी लगभग 123 किलोमीटर है। यहां आप दिल्ली-मथुरा हाईवे पर छाता कस्बे से बरसाना के लिए जा सकते हैं। अगर अपनी कार है तो फिर चिंता की कोई बात ही नहीं और यदि बस से जा रहे हैं तो छाता कस्बे पर उतर कर यहां से टेंपो के जरिये वहां पहुंच सकते हैं। यहां पहुंचकर आपको एक अलग ही आनंद की अनुभूति होगी। ब्रज और होली का गहरा नाता है। इन दिनों पूरा ब्रजमंडल होली के रंग में रंगा हुआ है। बरसाने की लट्ठमार होली तो सर्वत्र ही प्रसिद्ध है। यहां भगवान कृष्ण ने गोपियों के साथ प्रेम भरे रंगों से होली खेली थी। तभी तो रसिया गाते हैं- ‘होरी खेलन आयो श्याम आज जाइ रंग में बोरो री..।’ यहां की हुरियारिनें नंदगांव के हुरियारों पर जमकर लट्ठों का प्रहार करती हैं और हुरियारे अपने सिर पर मुड़ासा बांधकर, हाथ में ढाल लेकर उनके प्रहारों से अपना बचाव करते हैं और ऊपर से रंगों की बौछार होती है, जिसका दृश्य देखते ही बनता है। इस प्रेम की मार का सिलसिला काफी देर तक चलता है। अंत में नंदगांव के हुरियार थक जाते हैं और अपनी हार मान हुरियारिनों से मांफी मांगते हैं। हुरियारिनें उन्हें उलाहना देते हुए लट्ठों की बरसात को रोक देती हैं और उन्हें फिर यहां होली खेलने आने का न्योता देती हैं- ‘नैन नचाय कही मुसकाय लला फिर खेलन अइयो होरी..।’ यहां की इस विश्व प्रसिद्ध होली को दूर-दूर से, विदेशों से लोग देखने के लिए आते हैं। होली के दिन तो होली खेली ही जाती है, लेकिन बरसाने में इस होली का एक विशेष दिन आयोजन किया जाता है। अगर किसी कारणवश बरसाने की लट्ठमार होली के विशेष आयोजन को नहीं देख पाए हैं, तो कोई बात नहीं। यहां वैसे भी रोजाना राधारानी के भव्य मंदिर में होली का आयोजन चलता रहता है। यहां रुकने के लिए धर्मशाला और गेस्ट हाउस की भी व्यवस्था है। चाहें तो आप यहां रुक कर एक दो दिन होली का आनंद ले सकते हैं।

नंदगांव
बरसाना से नंदगांव की दूरी मजह 7 किलोमीटर है। यह भगवान कृष्ण का गांव है। यहां की होली का भी आनंद अद्भुत होता है। बरसाने की लट्ठमार होली के विशेष आयोजन के दूसरे दिन यहां पर लट्ठमार होली का आयोजन किया जाता है। नंदगांव के हुरियारे बरसाने में होली खेलने के बाद बरसाने के हुरियारों को नंदगांव में होली खेलने के लिए आने का निमंत्रण देते हैं। तो दूसरे दिन बरसाने के हुरियारे नंदगांव में होली खेलते हैं और यहां की हुरियारिनें उन पर लट्ठों का प्रहार करती हैं, जिसके बचाव में वे ढालों का इस्तेमाल करते हैं। यहां भी वैसा ही आनंद आता है, जैसा बरसाने में आता है। उस दिन यहां भी बहुत भीड़ होती है। वैसे नंदगांव की होली का आयोजन आज के दिन (3 मार्च) किया जा रहा है। आप चाहें तो आज ही नंदगांव जाकर होली के रंग में सराबोर हो सकते हैं। दिल्ली से सुबह ही चलें और दोपहर से पहले पहुंच जाएं। नंदगांव की यहां से दूरी लगभग 116 किलोमीटर है।

मथुरा
वैसे रंगभरी एकादशी से मंदिरों में रंगों की घटाएं प्रदर्शित की जाती हैं। हर दिन एक विशेष रंग का प्रदर्शन किया जाता है। द्वारिकाधीश मंदिर में एक सप्ताह पहले ही रंगोत्सव शुरू हो जाता है। कल यानी 4 तारीख को मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि पर होली का विशेष आयोजन किया जा रहा है, जिसमें शामिल होकर आप होली का खूब आनंद ले सकेंगे।

दाऊजी
दाऊजी यानी बलराम, भगवान कृष्ण के बड़े भाई। उन्हीं के नाम पर दाऊजी नाम का एक कस्बा है, जिसमें दाऊजी का भव्य मंदिर है। यह कस्बा वृंदावन से लगभग 30-35 किलोमीटर की दूरी पर है। होली के दूसरे दिन ही यहां पर एक भव्य आयोजन किया जाता है, जिसे दाऊजी का हुरंगा नाम से जाना जाता है। इस आयोजन को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।

इसके अलावा ब्रज के अन्य स्थानों में भी होली समारोहों की विशेषताएं लोगों को सहज ही आकर्षित करने वाली होती हैं। होली के बाद भी होली खेलने के सिलसिले ब्रजमंडल में हफ्तों तक चलते रहते हैं, जो एक मेले या समारोह के रूप में समाप्त होते हैं। ये समारोह कहीं-कहीं फूलडोल के नाम से जाने जाते हैं। विभिन्न गांवों में अपने अलग-अलग फूलडोल आयोजित किये जाते हैं। इनमें आसपास के गांवों के लोग इकट्ठे होते हैं और एक-दूसरे को गुलाल लगाकर सम्मान करते हैं। इन समारोहों में लोग अपने साथ कई बड़े-बड़े ड्रम लाते हैं और झूम-झूम कर रसिया गाते हुए उन्हें बजाते हैं। इन मौकों पर रसियों की विभिन्न मंडलियां आती हैं। रातभर रसियों की प्रतियोगिता चलती है और जीतनेवाली मंडली को इनाम मिलता है। इस तरह होली का पर्व सम्पन्न होता है।

वृंदावन
आप चाहें तो दिल्ली से सीधे वृंदावन आ सकते हैं। दिल्ली से वृंदावन की दूरी लगभग 151 किलोमीटर है। बस द्वारा आ सकते हैं। अगर बस नहीं तो रेल द्वारा मथुरा से वृंदावन आ सकते हैं। मथुरा से वृंदावन के लिए साधनों की कोई कमी नहीं है। अपना साधन है तो मथुरा से करीब 8-10 किलोमीटर पहले ही छटीकरा गांव से वृंदावन के लिए सीधा रास्ता है। यहां की होली आपको मन के आनंद के साथ आध्यात्मिक आनंद का भी एहसास कराएगी। वृंदावन मंदिरों का शहर है। यहां एक से एक भव्य मंदिर हैं। होली वाले दिन यहां का आनंद देखते ही बनता है। बांकेबिहारी मंदिर की होली अद्भुत होती है। देश-विदेश से आये लोग यहां पहले से ही डेरा जमा लेते हैं और यहीं से नंदगांव, बरसाना, फालेन, मथुरा गोकुल, दाऊजी आदि पुण्य स्थलों की बारी-बारी से दिन भर यात्रा करने के बाद यहीं वापस आ जाते हैं। आप भी ऐसा कर सकते हैं।

दिल्ली में होली के खास ठिकाने
यहां होली मिलन है खास
रंगों में आपकी रुचि हो या न हो, लेकिन कलाकार बिरादरी के लिए यह कार्यक्रम काफी खास है। यह है जानीमानी कथक नृत्यांगना उमा शर्मा द्वारा आयोजित होने वाला ‘होली मिलन’ कार्यक्रम, जहां की फूलों की होली काफी लोकप्रिय है। ईस्ट ऑफ कैलाश में कम्युनिटी सेंटर के पास स्थित ‘उमा शर्मा स्कूल ऑफ डांस एंड म्यूजिक’ के परिसर में होली के दिन शाम 6.30 बजे से शुरू होने वाला यह कार्यक्रम देर रात तक चलता है। यहां रंगों से कपड़े गीले होने की चिंता तो होती नहीं। फूलों की होली, गुलाल के तिलक और होरी व ठुमरी की मस्ती हर किसी को झुमा देती है।

ठुमरी, दादरा सुनें, चलें हैबिटेट वर्ल्ड
होली के अवसर पर अगर आप ठुमरी, दादरा, चैती, फाग और होरी सुनने की चाहत रखते हैं तो लोधी रोड पर स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर के हैबिटेट सेंटर में 7 मार्च को शाम 7.30 बजे विशेष आयोजन किया गया है। इस होली उत्सव में जानीमानी लोक गायिका मालिनी अवस्थी अपनी आवाज से आपको होली के रंग में सराबोर कर देंगी। मथुरा की चारकुला आर्ट एकेडमी ने यहां विशेष फूलों की होली की व्यवस्था की है। एकेडमी गुड़गांव के सेक्टर 44 स्थित इपिसेंटर में भी फूलों की होली का आयोजन कर रही है। यहां 100 रुपए के प्रवेश शुल्क पर तरह-तरह के पकवान की व्यवस्था तो है ही, आप चाहें तो होलिका दहन भी देख सकेंगे।

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