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गंभीर सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है भारत

विशेषज्ञों का मानना है कि 21वीं सदी में प्रगति के रास्ते पर बड़ी तेजी से आगे बढ़ता भारत आज आंतरिक और बाह्य दोनों ही क्षेत्रों में गंभीर खतरों से जूझ रहा है तथा इससे निपटने के लिये यदि प्रभावी कदम नहीं उठाये गये तो स्थिति और खराब हो सकती है।
    
रक्षा मामलों के विशेषज्ञ सी उदय भास्कर ने भाषा से कहा भारत की आतंरिक और बाह्य सुरक्षा एक दूसरे से जुड़ी हैं। वर्ष 2008 में मुंबई पर हुआ आतंकवादी हमला इसका एक ज्वलंत उदाहरण है। इस हमले में पाकिस्तानी आतंकवादी शामिल थे।
    
उन्होंने कहा कि चीन बड़ी तेजी के साथ अपनी सेनाओं का आधुनिकीकरण कर रहा है और हाल ही में उसने अपनी नौसेना के पहले विमानवाहक पोत का समुद्री परीक्षण शुरू किया है। उसने भारत से लगी अपनी सीमा पर आधारभूत ढांचे को काफी मजबूत किया है। इसके अलावा चीन, पाकिस्तान को सैन्य साजो सामान और प्रशिक्षण देता रहता है।
    
गोवा और अरूणाचल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक रह चुके आमोद कंठ ने कहा कि आज स्थित बहुत चिंताजनक है और बाहय खतरे की अपेक्षा आंतरिक खतरा ज्यादा बढ़ गया है। माओवादियों का प्रभाव क्षेत्र बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है जिससे तत्काल निपटने की जरूरत है।
    
उन्होंने कहा कि माओवादियों के प्रसार के पीछे एक बड़ा कारण सामाजिक-आर्थिक खाई है। गरीब राज्य और गरीब होते जा रहे तथा अमीर राज्य और अमीर होते जा रहे हैं। इसलिये गरीब राज्यों में नक्सलियों का प्रभाव बढ़ रहा है।
    
गौरतलब है कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के नौ राज्यों के 83 जिले नक्सल प्रभावित हैं। इन राज्यों में उड़ीसा, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल शामिल हैं। इन राज्यों में माओवादियों से निपटने के लिये केंद्र ने हजारों की संख्या में अर्धसैनिक बलों को तैनात किया है।
    
भास्कर ने कहा कि अगर आतंरिक सुरक्षा की बात करें तो माओवादियों का खतरा बना हुआ है। माओवादियों के प्रसार के पीछे एक बड़ा कारण निचले स्तर के प्रशासन में व्यापत भ्रष्टाचार है। भ्रष्टाचार के कारण लोगों को सरकार की सेवाओं का लाभ नहीं मिल पाता है और सरकारी अधिकारी आदिवासियों का शोषण करते हैं।
    
आईबी के पूर्व प्रमुख अरुण भगत ने कहा कि नक्सलियों पर प्रभावी रोकथाम के लिये हमें सबसे पहले उन्हें एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने से रोकना होगा। उन्हें मिलने वाले हथियारों पर रोकथाम करनी होगी। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर खुफिया सूचनाओं को इकटठा करने की प्रणाली को और पुख्ता करने की जरूरत है।
    
आमोद कंठ ने कहा कि नक्सलियों पर काबू पाने के लिये हमें जमीनी स्तर पर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ रही है लेकिन इसके साथ साथ कानून को भी मजबूत बनाये जाने की जरूरत है तभी इस गंभीर समस्या पर रोक लग पायेगी।
    
भास्कर ने कहा कि चीन और पाकिस्तान की तरफ से बढ़ रहे बाह्य खतरे को देखते हुए हमें जल्द अपनी तीनों सेनाओं का आधुनिकीकरण करना होगा। इसके लिये तीनों सेनाओं को आवंटित होने वाले बजट को भी बढ़ाने की जरूरत है।

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