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विधानसभा में खूब होंगे दागी

छह मार्च की मतगणना के बाद गठित होने वाली उत्तर प्रदेश की 16वीं विधान सभा भी दागियों से मुक्त नहीं हो पाएगी। स्वयंसेवी संगठनों, बुद्धिजीवियों व समाजसेवियों की ज्यादा से ज्यादा मतदान करवाने की कोशिश तो रंग लाई मगर ईमानदार, प्रतिबद्ध और स्वच्छ छवि वाले एमएलए चुनने की उम्मीद पर सात चरणों के चुनाव में खड़े उम्मीदवारों से जुड़े ब्योरे पानी फेर रहे हैं।

इलेक्शन वाच की ओर से जारी ब्योरे के मुताबिक प्रदेश की 403 विस सीटों में से 121 ऐसी रहीं जहां तीन या इससे ज्यादा दलों के उम्मीदवार ऐसे थे जिन्होंने अपने ऊपर आपराधिक मामलों की घोषणा खुद ही की थी। संतकबीरनगर की मेंहदावल विस सीट पर बसपा, सपा, कांग्रेस, भाजपा, जद यू और पीस पार्टी के सभी छह उम्मीदवार आपराधिक मामलों के आरोपी थे।

इसी तरह गोण्डा की कटरा बाजार, कुशीनगर की पडरौना, पीलीभीत की पूरनपुर सु., पंचशीलनगर की धौलाना विस सीटों पर छह प्रमुख दलों में से पांच दलों के उम्मीदवारोंपर आपराधिक मामले लम्बित हैं। इलेक्शन वाच ने इन 121 विस सीटों को संवेदनशील विधानसभा सीट करार देते हुए विवरण जारी किया है। इसके मुताबिक इनमें से 79 विस सीटों में से प्रत्येक पर तीन उम्मीदवार, 37 सीटों में से हर सीट पर चार और चार विस सीटों में से प्रत्येक पर पांच प्रमुख दलों के उम्मीदवार आपराधिक मामलों में लिप्त हैं।

इन 121 संवेदनशीन सीटों के मतदाताओं को तो ईमानदार, स्वच्छ छवि वाला अपना एमएलए चुनने के मौके ही नहीं मिला। नतीजतन इन मतदाताओं को तो मजबूरन इन्हीं आपराधिक मामलों से जुड़े प्रत्याशियों में से ही किसी एक का चुनाव करना पड़ा। वाराणसी जिला पूरे प्रदेश में इस मामले में अव्वल रहा जहां सभी प्रमुख दलों के कुल 48 उम्मीदवारों में से 26 यानी 54% ने अपने नामांकन पत्रों के साथ दाखिल हलफनामों में अपने ऊपर आपराधिक मामलों की पुष्टि की है।

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