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लालू और जगन्नाथ मिश्र समेत 31 पर आरोप तय

बहुचर्चित चारा घोटाले के एक मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र समेत 31 आरोपितों के खिलाफ 16 वर्षो के बाद आरोप तय किया है।

यह मामला चारा घोटाले के आरसी-63 ए/ 96 का है। यह भागलपुर और बांका कोषागार से फर्जी बिलों के आधार पर 1993 से 1996 के बीच 46 लाख रुपये की अवैध निकासी से जुड़ा है। इस मामले में अगली सुनवाई 2 अप्रैल को होगी। अदालत ने सीबीआई को इस मामले की अगली तारीख पर साक्ष्य और गवाह पेश करने का भी निर्देश दिया है। इसके साथ ही इस कांड के आरोपितों का ट्रायल शुरू हो गया है।

सीबीआई इस मामले में 267 गवाह और घोटाले से संबंधित 514 दस्तावेज अदालत में पेश करेगी। जिन 31 लोगों पर आरोप किए गए हैं, उनमें छह राजनेता, पांच आईएएस अधिकारी और छह आपूर्तिकर्ता भी शामिल हैं। हाईकार्ट के आदेश पर सीबीआई ने चारा घोटाले का यह मामला दर्ज कर तफ्तीश शुरू की थी।

सीबीआई के विशेष न्यायाधीश विजय कुमार श्रीवास्तव ने गुरुवार को अदालत में उपस्थित राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद सहित सभी 31 आरोपितों को एक-एक कर उन पर लगाए गए आरोपों को सुनाया। हालांकि, अदालत में उपस्थित लालू प्रसाद, डॉ. जगन्नाथ मिश्र, जदयू सांसद जगदीश शर्मा, पूर्व सांसद आरके राणा, पूर्व मंत्री विद्यासागर निषाद, पूर्व आयुक्त फूलचंद सिंह, बेक जूलियस, के अरुमुगम , एससी चौधरी समेत सभी 31 आरोपितों ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार कर दिया।

इसके बाद अदालत ने इन अभियुक्तों के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और अपने पद का दुरुपयोग कर सरकारी रुपये का घोटाला करने का आरोप भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गठन किया। इस मामले में दो अभियुक्त भाजपा के पूर्व विधायक ध्रुव भगत और कोषागार कर्मचारी एके सिंह अदालत में पेश नहीं हुए। अदालत में इन दोनों का इंतजार शाम चार बजे तक किया गया। फिर अदालत ने उनका बेल बांड खारिज कर दिया और दोनों के खिलाफ गिरफ्तारी का गैरजमानतीय वारंट जारी करते हुए सीबीआई को इन्हें 15 मार्च तक गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया।

चारा घोटाले का आर सी 63 ए/96 मामला
वर्ष 1993 से 1996 के बीच भागलपुर कोषागार से फर्जी विपत्रों के आधार पर 37 लाख 42 हजार 641 रुपये और बांका कोषागार से 8 लाख 53 हजार 407 रुपये की अवैध निकासी का मामला है। पहली बार इस मामले में सीबीआई ने 15 मई 1996 में मामला दर्ज किया था। इसके बाद सीबीआई ने 31 मार्च 2003 को लालू प्रसाद और डॉ. जगन्नाथ मिश्र समेत 44 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दायर की।

चारा घोटाले के किंगपिन पशुपालन विभाग के रीजनल ज्वाइंट डायरेक्टर श्याम बिहारी सिन्हा और पशुपालन विभाग के पूर्व मंत्री भोला राम तुफानी की मृत्यु होने की वजह से सीबीआई ने इन दोनों पर चाजर्शीट दायर नही की थी।
 
चारा घोटाले के 44 में 9 आरोपितों की हो चुकी है मृत्यु

चारा घोटाले के जिन 44 लोगों को सीबीआई ने आरोपित किया था, उनमें अब तक नौ की मौत हो चुकी है। यानी इन नौ लोगों पर सीबीआई ने मामला बंद कर दिया। जिन नौ लोगों की मौत हो चुकी है, उनमें पूर्व मंत्री चन्द्रदेव प्रसाद वर्मा,आपूर्तिकर्ता शंकर लाल टंडन, पशुपालन विभाग के पूर्व निदेशक डा. राम राज राम, बांका कोषागार के लेखापाल बीके सिन्हा, कोषागार कर्मचारी एसी सिन्हा, बी राम के नाम शामिल हैं।

सीबीआई ने दो आरोपितों को बनाया सरकारी गवाह
सीबीआई ने इस मामले में दो आरोपितों को सरकारी गवाह बनाया है। इनमें पशुपालन विभाग के प्रशासनिक अधिकारी आरके दास तथा एसपी सिन्हा शामिल हैं।

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