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लालू को थी घोटाले की जानकारी, बने रहे अनजान

लालू प्रसाद ने घोटाले की जानकारी मिलने के बावजूद उस पर समय रहते कारगर कदम नहीं उठाए। दूसरों को भी कदम नहीं उठाने दिया। उनके कार्यकाल में एक ही दिन में 51 लाख रुपए से अधिक की अवैध निकासी घोटालेबाजों ने की थी। जबकि वैध निकासी एक लाख तक ही करने की अनुमति थी।

अवैध निकासी के करोड़ों रुपए से बड़े-बड़े राजनीतिज्ञों एवं अफसरों की हवाई सुविधा, होटल खर्च समेत अन्य खचरे को उठाया जाता था। लालू प्रसाद चाईबासा के तत्कालीन जिला पशुपालन पदाधिकारी बीएन शर्मा को हमेशा बचाते रहे।

घोटाले से जुड़ी सीएजी की रिपोर्ट दिसंबर 1993 में मिलने के बावजूद किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की। आपूर्तिकर्ता दयानंद प्रसाद कश्यप को 20 सूत्री का उपाध्यक्ष बनाया और उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया। तत्कालीन पशुपालन मंत्री रामजीवन सिंह ने अगस्त 1990 को ही सीबीआइ जांच की मांग थी। इसके बावजूद लालू प्रसाद ने कार्रवाई नहीं की। घोटाला सरगना श्याम बिहारी सिन्हा से डॉ. आरके राणा के माध्यम से दो बार में पांच करोड़ रुपए लेने का उन पर आरोप है। आरोपी सिन्हा की सेवा अवधि भी बढ़ाई।

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