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धरती का सीना चीर सिंचाई नाला बनाया ग्रामीणों ने

हौसला अगर बुलंद हो, तो हर मुश्किल काम आसान हो जाता है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है झारखंड के रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड के सुदूरवर्ती संथाल बहुल गोविंदपुर, संबलपुर, घाघराजारा और बेदियाजारा गांव के ग्रामीणों ने।

उन्होंने एकजुट हो कर श्रमदान से धरती का सीना चीर कर चार किलोमीटर लंबा सिंचाई नाला बनाया और खेतों तक पानी पहुंचाया। ग्रामीणों के हौसले के आगे जंगल और ऊंची पहाड़ियां भी पस्त हो गईं।

अपने बाजुओं की ताकत से ग्रामीणों ने आंवराडीह बम्हनी जारा डैम से हड़मा सोंघा जंगल व पहाड़ (जंगल की लंबाई करीब डेढ़ किमी है) को चीर कर नाले का निर्माण पूरा किया। तीन वर्ष पूर्व की गई एक वर्ष की मेहनत रंग लाई और नाले के पानी से ग्रामीण सिंचाई कर कृषि कार्य करने लगे।

अब सैकड़ों डिसमिल सूखी और बंजर भूमि पर पानी पहुंचते ही खेतों में हरियाली आ गई है। पानी की बर्बादी रोकने के लिए बेदियाजारा के समीप कई तालाबनुमा गड्ढे बनाए गए हैं। इन गांवों तक पहुंचने के लिए हाल के दिनों में मोरम की सड़क बनाई गई है।

कृषि पर निर्भर यहां के ग्रामीणों का कहना है कि चार किमी लंबे नाले को सुरक्षित रखना काफी मुश्किल है। साल में कई बार नाले की मरम्मत करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत करोड़ों रुपए की बेकार योजनाएं स्वीकृत की जाती हैं, लेकिन उनकी समस्याओं पर किसी का ध्यान नही है।

ग्रामीणों ने बताया कि मिट्टी भर जाने से डैम में पानी का संग्रह बहुत कम हो गया है। अगर इसका गहरीकरण नही किया गया, तो खेतों की सिंचाई मुश्किल हो जाएगी।

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