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पुस्तक मेले में लगें एटीएम, प्रवेश शुल्क समाप्त हो

राजधानी में चल रहे विश्व पुस्तक मेले में कई पुस्तक प्रेमियों को एटीएम की कमी खल रही है। उनका मानना है कि कई बार अच्छी पुस्तकें मिलने पर उनके पास नकद धन नहीं होने के कारण मन मसोस कर रह जाना पड़ता है। हालांकि प्रगति मैदान के सूत्रों के अनुसार मेला क्षेत्र में दो एटीएम हैं, लेकिन उनके बारे में लोगों को जानकारी न होने और मशीनों के अक्‍सर खराब रहने के कारण मेला क्षेत्र में आने वालों को उनका पूरा लाभ नहीं मिल पाता

पुस्तक प्रेमी और एक निजी कंपनी के सेल्स विभाग से जुड़े रवीन्द्र सिंह नेगी ने कहा कि प्रगति मैदान का परिसर काफी लंबा चौड़ा है। लेकिन यहां कोई भी एटीएम नहीं दिखायी देता। उन्होंने कहा कि इतने विशाल परिसर को देखते हुए यहां विभिन्न बैंकों के कम से कम आठ-दस एटीएम तो होने ही चाहिए।

सूत्रों ने बताया कि मेला क्षेत्र में दो बैंकों के एटीएम हैं, लेकिन ज्यादा लोगों को इस बारे में जानकारी नहीं है। इसके अलावा एटीएम के ज्यादातर समय खराब रहने से भी लोग इनका इस्तेमाल नहीं कर पाते। नेगी ने कहा कि आम आदमी की मजबूरी है कि वह अपने साथ अधिक नकद धन लेकर नहीं चल सकता। पुस्तक मेले में उनका तथा उनके परिचित कई लोगों का अनुभव रहा है कि उन्हें कुछ पुस्तकें केवल इसलिए छोड़नी पड़ी कि उनके पास अधिक नकद धन नहीं था।

उन्होंने कहा कि यदि यहां अधिक एटीएम होते तो उन्हें ऐसी दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने कहा कि प्रगति मैदान में एटीएम लगाए जायें ताकि विभिन्न मेलों में यहां आने वालों को सहूलियत हो। कई पुस्तक प्रेमी यह महसूस करते हैं कि पुस्तक मेले में लगने वाले प्रवेश टिकट को समाप्त कर दिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे निश्चित तौर पर पुस्तकों की बिक्री बढ़ेगी।

पेशे से इंजीनियर पवन चौहान ने कहा कि उन जैसे पेशेवरों के लिए तो प्रवेश टिकट का मूल्य कोई मायने नहीं रखता। लेकिन पुस्तक मेले में आने वाले अधिकतर लोग युवा और विद्यार्थी वर्ग के होते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार साक्षरता के नाम पर हर साल अरबों रूपये खर्च करती है। यदि पुस्तक मेले में प्रवेश निशुल्क कर दिया जाये तो लोगों को काफी सहूलियत होगी।

गौरतलब है कि मेले में प्रवेश टिकट बीस रुपए का है जबकि बच्चों और छात्रों से इसके लिए दस रुपए लिये जा रहे हैं।

मेले के विशाल स्तर को देखते हुए कई लोगों को स्टाल ढूंढने में काफी दिक्कतें आ रही हैं। आईटी पेशेवर वासवी ने सुझाव दिया कि पुस्तक मेले में विभिन्न जगहों पर कंप्यूटर टर्मिनल लगा दिये जाने चाहिएं जिनसे लोग मेले और स्टाल के बारे में सारी जानकारी स्वयं हासिल कर सके। उन्होंने कहा कि इस सुविधा का युवा वर्ग विशेष तौर पर लाभ उठा सकता है और उसे इधर-उधर नहीं भटकना पड़ेगा।

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