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अधिकतम संख्या के आधार पर नहीं तय होंगी सीटें

नर्सरी की सीटें अब पिछले तीन सालों में हुए दाखिले की अधिकतम सीटों के आधार पर तय होंगी। किसी भी कक्षा में छात्रों की पहले अधिकतम संख्या को आधार माना जाता था। इसके लिए दिल्ली स्कूल शिक्षा आदेश, 2011 में बदलाव किया गया है। यह बदलाव वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2012-13 में भी लागू होगा। नर्सरी दाखिले को लेकर पिछले साल 7 जनवरी 2011 को दिल्ली स्कूल शिक्षा आदेश जारी किया गया था। जिसके सेक्शन 4 बी में कहा गया था कि नर्सरी की सीटें अन्य कक्षाओं की सीटों से कम नहीं होनी चाहिए। लेकिन, अब इस सीटों को तय करने की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। शिक्षा निदेशालय के विशेष सचिव शिक्षा (प्रशासन) सुरेश गुप्ता की ओर से जारी सकरुलर में कहा गया है कि दिल्ली स्कूल शिक्षा (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए नि:शुल्क सीटें) आदेश में संशोधन किया गया है। इसके बाद नर्सरी या कक्षा एक में जैसी भी स्थिति हो, सीटों की संख्या पिछले तीन शैक्षणिक सत्र में नर्सरी की अधिकतम संख्या से कम नहीं होगी। मालूम हो कि नर्सरी की सीटों को तय करने के लिए पहले से तय नियम का उलंघन करते हुए शैक्षणिक सत्र 2012-13 में तमाम स्कूलों ने सीटों को कम दिया। अशोक विहार स्थित एक स्कूल में नर्सरी के लिए 112 सीटें तय की गई हैं, जबकि उसी स्कूल की तीसरी कक्षा में छात्रों की संख्या 360 है। स्कूल द्वारा 248 सीटें कम कर दी गई। पीतमपुरा स्थित एक बड़े स्कूल में सातवीं कक्षा के लिए 359 सीट है। जबकि नर्सरी में 113 सीटें तय की गई हैं। पिछले साल भी इसी तरह से स्कूल प्रबंधन द्वारा खुलेआम सीटों को छिपाया गया था। वसंत कुंज स्थित एक नामी स्कूल में पिछले साल नर्सरी में 170 सीटों पर दाखिला हुआ था। जबकि नियम के अनुसार स्कूल को 441 सीटों पर दाखिला देना था। हालांकि निदेशालय के इस बदलाव से सभी स्कूलों को राहत मिलेगी।

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