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अब किन्नर भी करेंगे जन्म का पंजीकरण

अमिता ठाकुर पटना। जन्म, शादी और मृत्यु का निबंधन कराना अनिवार्य है पर जागरूकता की कमी से इनके प्रति लोगों में उत्साह नहीं है। अब सरकार ने अब इस काम में डोम जाति के लोगों और किन्नरों की मदद लेने का फैसला किया है।

सरकार का मानना है कि आमतौर पर जब भी किसी बच्चों का जन्म सरकारी अस्पताल या घर में होता है तो वे उसका निबंधन नहीं कराते हैं। यहीं बात लोगों की मृत्यु के मामले में भी है। बल्कि जब किसी बच्चों का जन्म होता है तो सरकारी महकमे से पहले किन्नरों को सूचना मिल जाती है।

वे उन घरों में जाकर गाना-बजाना करते हैं और बदले में उन्हें बख्शीश दी जाती है। सरकार का मानना है कि जन्म पंजीकरण मामले में किन्नरों की मदद लेने से कामयाबी मिल सकती है। योजना व विकास विभाग के सचिव विजय प्रकाश ने कहा कि नगर निगम ने बकाएदारों से उगाही के लिए किन्नरों की मदद ली और सफलता मिली। उन्होंने कहा कि किन्नरों को जन्म निबंधन संबंधी फॉर्म दिए जाएंगे।

वे जिन घरों में गाने-बजाने के लिए जाएंगे वहां फार्म भी भरवाएंगे। इसके लिए उन्हें भुगतान भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मृत्यु पंजीकरण के लिए भी डोम जाति की मदद ली जाएगी। अंतिम क्रिया के लिए डोम को अवश्य बुलाया जाता है। ऐसे में उन्हें प्राय: तमाम मौतों की पूरी जानकारी होती है।

मृत्यु पंजीकरण कार्य से उन्हें जोड़कर सही संख्या जानी जा सकती है। सरकार की इस पहल का किन्नरों ने भी स्वागत किया है। किन्नर चांदनी का कहना है कि उनके समुदाय का पूरा सहयोग सरकार को दिया जाएगा। अब जनसंख्या में भी हमारी गिनती होगी। राष्ट्रीय जनसंख्या नीति के मुताबिक वर्ष 2010 तक शत-प्रतिशत जन्म प्रमाण पत्र निर्गत करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन बिहार में मात्र 36 प्रतिशत लक्ष्य हासिल हुआ। आंकड़े के मुताबिक बिहार में पैदा होने वाले ज्यादातर बच्चों का जन्म सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं में होता है। सिर्फ सत्रह प्रतिशत बच्चों का जन्म निजी अस्पतालों में होता है। शेष बच्चों का जन्म घरों में होता है।

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