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आयोग ने रोका विवि कर्मचारी संघ का मतदान

गोरखपुर, वरिष्ठ संवाददाता।

एक नाटकीय घटनाक्रम के तहत मंगलवार को चुनाव आयोग ने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ के मतदान पर रोक लगा दी। चुनाव रोकने की मांग संघ के पूर्व अध्यक्ष रामनरेश पाण्डेय और उनके समर्थकों ने की थी। कैण्ट इंस्पेक्टर रविकांत पाराशर ने पुलिस बल के साथ पौने दो बजे कर्मचारी संघ कार्यालय पहुंचकर मतदान रुकवा दिया। उस समय तक कुल 541 में से 283 वोट पड़ चुके थे। रामनरेश पाण्डेय गुट 22 फरवरी को चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद से ही चुनाव स्थगित करने की मांग कर रहा था।

उसने जिलाधिकारी और मुख्य निर्वाचन अधिकारी को शिकायती पत्र भेजकर इस चुनाव को अवैध घोषित करने की मांग की थी। तर्क था कि प्रदेश में विस चुनाव-2012 की आचार संहिता और जिले में धारा-144 लागू है। ऐसे में कर्मचारी संघ कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर सात दिनों की अल्प अवधि में चुनाव की तिथि तय कर दिया जाना उचित नहीं है। चुनाव कम से कम 15 दिन बाद होने चाहिए।

लेकिन इस तर्क को चुनाव अधिकारी प्रकाश पाल ने यह कहकर खारिज कर दिया था कि एडीएम प्रशासन से अनुमति लेने के बाद ही कर्मचारी संघ का चुनाव कार्यक्रम जारी किया गया है।

चुनाव कार्यक्रम के तहत 23 और 24 फरवरी को नामांकन पत्रों का वितरण और पर्चा दाखिल कराए गए। 25 को नाम वापसी हुई। 26-27 फरवरी को चले प्रचार के बाद 28 फरवरी को सुबह साढ़े 10 बजे से संघ कार्यालय पर मतदान शुरू हो गया। उधर, रामनरेश पाण्डेय गुट ने 27 फरवरी की शाम साढ़े छह बजे मुख्य निर्वाचन अधिकारी को एक बार फिर फैक्स भेजकर चुनाव पर रोक लगाने की मांग की। सूत्रों के मुताबिक 27 फरवरी को ही देर शाम डीएम कार्यालय में कर्मचारी संघ का चुनाव रोकने का आदेश आ गया था।

लेकिन इसकी खबर चुनाव अधिकारी को नहीं थी। दोपहर साढ़े 12 बजे रामनरेश पाण्डेय की अगुवाई में कुछ कर्मचारी पहले डीएम बंगला और बाद में उनके दफ्तर पहुंचे। कर्मचारियों ने डीएम से अपनी शिकायत के बारे में बात की तो डीएम ने उन्हें आयोग के निर्देश की जानकारी दी और मातहतों को मतदान पर तत्काल रोक लगाने का निर्देश दिया।

मैने नहीं दी थी इजाजत: एडीएम प्रशासन कर्मचारी संघ के चुनाव अधिकारी प्रकाश पाल का कहना है कि एडीएम प्रशासन एसएस श्रीवास्तव ने चुनाव कराने की उन्हें मौखिक रूप से अनुमति दी थी। हालांकि पौने दो बजे जब कैण्ट इंस्पेक्टर आयोग का आदेश लेकर संघ कार्यालय पहुंचे तो श्री पाल ने एडीएम प्रशासन से मोबाइल पर बात की। श्री पाल के मुताबिक एडीएम प्रशासन ने इस बारे में कोई अनुमति देने से साफ इंकार कर दिया। एमडीएम प्रशासन ने ‘हिन्दुस्तान’ से भी कहा कि उन्होंने इस बारे में कोई इजाजत नहीं दी थी।

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