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नारी को आरक्षण नहीं संरक्षण की जरूरत

वाराणसी कार्यालय संवाददाता।

नींव की तरह भार सहती हूं दबी हुई हूं पर मजबूती देती हूंमत भूल मुसाफिर मैं जिस दिन डगमगाई दिख जाएगी नींव की गहराईयह कहना था अखिल भारतीय वैश्य महिला महासम्मेलन की अध्यक्ष अंजलि अग्रवाल का। उन्होंने उक्त बातें सम्मेलन की ओर से महिला दिवस के उपलक्ष्य में मलदहिया स्थित एक भवन में बुधवार को आयोजित ‘नारी एक शक्ति’ विषयक संगोष्ठी में कहा।उनका कहना था कि बेटियां बोझ नहीं सहयोग हैं। जिन्हें घर का चिराग कहा जाए तो बिल्कुल सही होगा।

मौजूदा समय में इन्हें आरक्षण की बजाय अगर संरक्षण और उचित अवसर प्रदान किया जाए तो फिर उनके हौसलों को बुलंदियों तक पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता इनरव्हील क्लब 312 जिले की सचिव कुसुम मित्तल ने नारी शक्ति के रूप में देवदास की चन्द्रमुखी को तेजस्वी माना है। उनका कहना था कि चन्द्रमुखी ने अपनी शक्ति का बेहतर प्रदर्शन किया लेकिन समाज में वैसे रूप को प्रदर्शित करना उचित नहीं माना जाता। आज जरूरत है शास्त्रों और पुराणों में किये गये महिमा मंडन से निकलकर व्यावहारिक रूप को समझने की। जब तक नारी अपने अन्दर छिपे शक्ति के पूंज को नहीं पहचान जाती तब तक कहने सुनने से कोई परिवर्तन नहीं आने वाला। किताबों के ज्ञान से लोग ज्ञानी नहीं होते। व्यवहार पक्ष भी ज्ञान का सागर होता है, इसे समझने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर सम्मेलन की महिलाओं ने होली मिलन भी मनाया। एक-दूसरे को अबीर लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम का संचालन शीला अग्रवाल व धन्यवाद रंजना केशरी ने दिया। कार्यक्रम की संयोजिका बबीता अग्रहरि थी। इस मौके पर राधा बिजावत, सुशीला जायसवाल, कविता केशरी, संध्या, मीनू, रचना अग्रवाल आदि मौजूद रहीं।

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