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सहजधारी सिखों को मिला एसजीपीसी चुनावों में मताधिकार

एक महत्वपूर्ण फैसले के तहत पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सहजधारी सिखों को शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के चुनावों में मताधिकार देने का मंगलवार को आदेश दिए। न्यायमूर्ति सूर्याकांत, न्यायमूर्ति एमएमएस बेदी और न्यायमूर्ति एम जयपॉल की पूर्ण खंडपीठ ने सहजधारी सिख फेडरेशन और दो अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह फैसला सुनाया।

अदालत के इस फैसले के बाद एसजीपीसी के हाल में हुए चुनावों तथा चुनी गई नई कार्यकारिणी भंग होने तथा इस संस्था के नए सिरे से चुनाव होने की सम्भावना बन सकती है ताकि सहजधारी सिख भी भाग ले सकें।

याचिकाओं में केंद्र की पूर्ववर्ती राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार की आठ अक्तूबर 2003 को जारी उस अधिसूचना को चुनौती दी गई थी जिसमें सहजधारी सिखों को एसजीपीसी चुनावों में मतदान करने पर रोक लगा दी गई थी।

याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिकाओं में गुरूद्वारा अधिनियम की धारा 49 और 92 में संशोधन को भी चुनौती दी थी जिसमें सहजधारी सिखों को सिख समुदाय का हिस्सा नहीं मानने की बात कही गई थी।

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि मूल अधिनियम में सहजधारी सिखों को एसजीपीसी चुनावों में मताधिकार हासिल था तथा उच्चतम न्यायालय ने अपने अनेक फैसलों में कहा है कि राज्य सरकार धर्म की परिभाषा तय नहीं कर सकती।

याचिकाओं में यह भी कहा गया था कि राज्य सरकार सिख और खास तौर पर सहजधारी सिखों के मामले में कोई नई परिभाषा तय नहीं कर सकती क्योंकि धर्म किसी कानून के दायरे में नहीं आता।

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