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चैपल में कुछ तो गड़बड़ हैः नेहरा

पूर्व कप्तान सौरव गांगुली के बाद अब तेज गेंदबाज आशीष नेहरा ने भी पूर्व भारतीय कोच ग्रेग चैपल को आड़े हाथों लेते हुए मंगलवार को कहा कि इस आस्ट्रेलियाई के साथ कुछ न कुछ तो गड़बड़ है।

गांगुली ने हाल में चैपल को पागल कहा था तथा नेहरा ने भी साफ किया कि वह कभी इस उनके साथ सहज महसूस नहीं कर पाए। चैपल 2005 से दो साल के लिए भारतीय कोच रहे थे लेकिन उस दौरान टीम का प्रदर्शन काफी खराब रहा था।

नेहरा ने यहां मैक्स न्यूयार्क आईजीनियस स्कालरशिप के विजेताओं की घोषणा के दौरान पत्रकारों से कहा कि ग्रेग जब कोच थे तब मैं एक या दो सीरीजों में खेला था लेकिन मैं कभी उनके साथ सहज होकर नहीं खेल पाया और केवल मेरे ही नहीं अन्य खिलाड़ियों के साथ ही यही स्थिति थी। मुझे लगता है कि उनके साथ कुछ न कुछ तो गड़बड़ जरूर है।

भारत की विश्व कप विजेता टीम के सदस्य रहे नेहरा ने इसके साथ ही उम्मीद जताई कि भारतीय टीम आस्ट्रेलियाई दौरे पर अच्छा प्रदर्शन करने में सफल रहेगी। उन्होंने कहा कि इसको इंग्लैंड दौरे से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। वहां परिस्थितियां भिन्न थी लेकिन यहां हमारे पास पहली बार सीरीज जीतने का बहेतरीन मौका है। हमारे सात आठ खिलाड़ियों को आस्ट्रेलिया में खेलने का अच्छा खासा अनुभव है इसलिए उम्मीद है कि टीम वहां अच्छा प्रदर्शन करेगी।

नेहरा ने इसके साथ ही उम्मीद जताई कि वह जल्द ही राष्ट्रीय टीम में वापसी करने में सफल रहेंगे और उनका लक्ष्य आईपीएल के बाद वनडे टीम में जगह बनाना है। उन्होंने कहा कि विश्व कप के बाद मैं हाल में रणजी मैचों में ही खेल पाया। मैं तीन चार साल बाद चार दिवसीय मैचों में खेला लेकिन अभी मुझे सीमित ओवरों के मैच खेलने है और फिर आईपीएल है। इसके बाद उम्मीद है कि फिर से राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने में सफल रहूंगा।

भारत की तरफ से 120 वनडे में 157 विकेट लेने वाले इस तेज गेंदबाज ने इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाली एक युवा भागीदार के इस सुझाव को नकार दिया कि सचिन तेंदुलकर को अब संन्यास ले लेना चाहिए। नेहरा ने कहा कि ऐसा नहीं है कि विश्व कप जीत लिया तो उन्हें संन्यास ले लेना चाहिए। यह फैसला स्वयं सचिन को करने दो कि उन्हें कब तक खेलना है। जब वह खेलना छोड़ेंगे पूरे देश को उनकी भारी कमी खलेगी।

सुनील गावस्कर और कपिल देव भी विश्व चैंपियन बनने के बाद खेलते रहे थे और तेंदुलकर तो अभी पुराने जोश के साथ रन बना रहे हैं। इस अवसर पर मौजूद बाएं हाथ के स्पिनर मुरली कार्तिक से जब एक अन्य भागीदार ने पूछा कि वह कपिल और महेन्द्र सिंह धौनी में से किसे अच्छा कप्तान मानते है। उन्होंने कहा कि मैं कभी कपिल पाजी के साथ नहीं खेला इसके लिए उनके बारे में नहीं बता सकता लेकिन धौनी लाजवाब कप्तान है। वह कभी खिलाड़ियों पर दवाब नहीं बनाते और उन्हें उनका नैसर्गिक खेल खेलने की छूट देते है। ऐसा नहीं है कि उन पर दवाब नहीं होता है लेकिन वह कभी किसी को इसका अहसास नहीं होने देते है।

कार्तिक ने इसके साथ ही स्वीकार किया कि उनके लिए अब राष्ट्रीय टीम में वापसी करना बहुत मुश्किल हैं। उन्होंने कहा कि मैं 2007 में टखने की चोट के बाद वापसी नहीं कर पाया। ऐसा नहीं है कि उसके बाद मैंने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया। मैं लगातार अपनी तरफ से सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया। अब मुझे वापसी करना बहुत मुश्किल लगता है।

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