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किम जांग की मौत

उत्तर कोरिया के शासक किम जांग-इल की मौत से फिलहाल उस देश में कुछ खास नहीं बदलेगा, लेकिन आगे चलकर वहां यथास्थिति भी नहीं रहने वाली है। अत: सियोल को ठंडे दिमाग से मौजूदा हालात को लेना चाहिए। शायद ही कोई यह यकीन करेगा कि किम के निधन के बाद उत्तर कोरिया में तत्काल कोई भूचाल पैदा होगा या फिर अरब क्रांति की तरह लोकतंत्र की मांग में वहां जन-बगावत उठ खड़ी होगी।

बहुत मुमकिन है कि विदेश में पढ़े-लिखे उनके तीसरे बेटे किम जांग-उन सत्ता की बागडोर संभालें। हालांकि जांग-उन के पास काफी कम अनुभव है। उनके पिता ने सत्ता की बागडोर संभालने से पहले करीब 20 वर्षों तक अपने पिता के शासन में तजुर्बा हासिल किया था। इसलिए राजनीतिक विश्लेषक वहां सत्ता संघर्ष की आशंका व परमाणु अस्थिरता को लेकर चिंतित हैं। उत्तर कोरिया ने अपने इर्द-गिर्द इस कदर गोपनीयता की दीवारें खड़ी कर रखी हैं कि किम की मौत का खुलासा भी उसने मृत्यु के दो दिनों बाद किया। दक्षिण कोरिया के पास किम जांग-इल से नाराज रहने की कई वजहें हैं।

उन्होंने ही 1983 के उस कांड का षड्यंत्र रचा था, जिसमें म्यांमार जाते हुए हमारे देश के 16 राष्ट्रीय स्तर के अधिकारी बम से उड़ा दिए गए थे। फिर 1987 के मध्य में कोरियाई विमान पर हमले के पीछे भी किम जांग-इल ही थे। उस हादसे में 115 सवार मारे गए थे। हालांकि यह मानवीय मूल्यों के खिलाफ है कि किसी की मौत पर शोक जताने के सिवाय कुछ और कहा जाए। लेकिन साल 1994 में किम इल-संग की मौत पर दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति किम युंग-साम ने अपनी अपमानजनक टिप्पणियों से उत्तर कोरिया को नाराज कर दिया था। उस वक्त दक्षिण कोरियाई समाज वैचारिक तौर पर किम इल-संग की मौत को लेकर बंटा हुआ था।

लेकिन तब सियोल ने अपने नागरिकों के उत्तर कोरिया जाकर उत्तर कोरिया के संस्थापक को श्रद्धांजलि देने पर पाबंदी लगा दी थी। लेकिन इस बार दक्षिण कोरिया को वही गलती नहीं दोहरानी चाहिए। बहरहाल, बगैर कोई हंगामा खड़ा किए दक्षिण कोरियाई फौज को भी चौकस हो जाना चाहिए।
द कोरिया टाइम्स, दक्षिण कोरिया

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