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संसद की गरिमा

देश की तरक्की का सारा दारोमदार हमारे माननीय सांसदों पर है। संसदीय प्रणाली के जरिये देशहित के कामकाज संपन्न होते हैं। परंतु हाल के दिनों में ऐसा लगा कि सांसद सदन की गरिमा का खुद ही खयाल नहीं रख रहे हैं। खास तौर पर विपक्षी पार्टियों ने कई बार संसदीय कार्यवाही को नहीं चलने दिया है, जिससे कई गंभीर मसलों पर विचार-विमर्श नहीं हो पाया। देखा जाए, तो जन लोकपाल बिल, महंगाई जैसे गंभीर मुद्दों पर सांसदों की सक्रियता कम होती जा रही है। राजनीतिक पेच लड़ाते वक्त जन प्रतिनिधि अपनी सांविधानिक जिम्मेदारियों को भूल जाते हैं। अगर विपक्ष को सत्ता पक्ष से लड़ाई ही लड़नी है, तो इसमें संसदीय कार्यवाही को ठप करने की क्या आवश्यकता है? विपक्ष को चाहिए कि वह सरकार की गलत नीतियों को रोकने के लिए जनता के बीच जाए, न कि संसदीय प्रणाली की गरिमा को ठेस पहुंचाए।
वैभव शर्मा, ईस्ट ऑफ कैलाश, नई दिल्ली

टीम इंडिया की जय
वेस्ट इंडीज के खिलाफ विरेंदर सहवाग ने 219 रनों की आतिशी व रिकॉर्डतोड़ पारी खेली। इस तरह से उन्होंने वेस्ट इंडीज की स्तरीय गेंदबाजी की धज्जियां उड़ा दीं। इससे साफ हो गया है कि जब सहवाग का बल्ला बोलता है, तो किसी भी गेंदबाज की नहीं चलती। अच्छे-अच्छे गेंदबाजों को पानी पिला सकते हैं विरेंदर सहवाग। हालांकि शुरुआती वनडे में टीम इंडिया के शीर्ष क्रम की बल्लेबाजी चल नहीं पाई। लेकिन मध्यक्रम में अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया। यानी अब टीम इंडिया किसी एक खिलाड़ी के बेहतरीन प्रदर्शन पर निर्भर नहीं है, बल्कि समूची टीम अब लय में है। सहवाग के दोहरे शतक से चौथे वनडे में मिली ऐतिहासिक जीत के बाद टीम इंडिया ने पांचवें मैच में कुछ बदलाव किए। मनोज तिवारी ने इस मौके की नजाकत को समझा और उसे भुनाया भी। वह भी एक शतकीय पारी खेल गए। भारतीय टीम ने क्रिकेट जगत को यह संदेश दे दिया है कि अब हमसे सोच-समझकर ही टकराना। इस शानदार फॉर्म के लिए भारतीय टीम को हार्दिक बधाई।
इंद्र सिंह धिगान, किंग्जवे कैंप, दिल्ली

सड़क पर मुश्किल
आने वाले समय में गाड़ियों की रफ्तार साइकिल से भी धीमी होगी। दरअसल, इसके लिए गाड़ी की गति को दोषी मानना ठीक नहीं है। हकीकत यह है कि महानगरों में सड़कों पर ट्रैफिक जाम बढ़ता ही जा रहा है। ऊपर से सार्वजनिक वाहन सेवा के प्रति लोगों को जुड़ाव कम होता जा रहा है। लोग बसों से सफर करना कम पसंद कर रहे हैं। इसलिए दफ्तर आते-जाते वक्त सड़क पर काफी भीड़ होती है। आरामदेह सफर सरकार की जिम्मेदारी है। इसलिए सरकार को चाहिए कि सड़क से भीड़ कम करे। मेरी राय में बैंक, बीमा दफ्तरों, विद्यालयों, कॉलेजों में काम करने वाले लोगों के घर उनके दफ्तर के पास ही हों। दिल्ली नगर निगम के दफ्तरों में काम करने वाले लोगों पर भी यही बात लागू हो। इससे लोग निजी वाहनों के इस्तेमाल से तो बचेंगे ही, उनके धन व समय, दोनों की भी बचत होगी।
राजेंद्र कुमार सिंह, रोहिणी, दिल्ली

ऐतिहासिक स्थलों की दुर्गति
अलीगढ़ शहर में जीटी रोड के पास स्थित अचल ताल को देखने का अवसर मिला। बड़ी पीड़ा हुई कि इसका पानी सूख चुका है और इसमें कूड़े के ढेर लगा दिए गए हैं। अचल ताल अलीगढ़ में धार्मिक महत्व का स्थान है। इस ताल के चारों ओर मंदिर हैं। पर लगता है किहमारे देश में गंदगी योजनाबद्ध तरीके से फैलाई जा रही है। इसीलिए ऐतिहासिक स्थलों की हालत खराब है।
रमेश चंद्र आनंद, मेरिस रोड, अलीगढ़

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