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साइना चमक बिखेरने में रही नाकाम

साइना नेहवाल की खराब फार्म के बीच भारतीय बैडमिंटन के लिए वर्ष 2011 काफी निराशाजनक रहा है और देश को एकमात्र बड़ी सफलता विश्व चैम्पियनशिप में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा के युगल कांस्य पदक के रूप में मिली।

वर्ष 2010 साइना के लिए काफी सफल रहा जिसमें उन्होंने सुपर सीरीज खिताब की हैट्रिक बनाने के अलावा राष्ट्रमंडल खेल का महिला एकल का स्वर्ण भी जीता लेकिन इस भारतीय के लिए 2011 काफी निराशाजनक रहा जिसमें वह केवल स्विस ग्रां प्री का खिताब जीत सकी जबकि मलेशिया और इंडोनेशिया में उप विजेता रही। 

महिला युगल में ज्वाला और अश्विनी की राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण पदक विजेता जोड़ी ने एक और बड़ी सफलता हासिल की यह जोड़ी अगस्त में लंदन में विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीतने वाली पहली भारतीय जोड़ी बनी। इस जोड़ी ने कोरिया ओपन और चीन ओपन के क्वार्टर फाइनल में भी जगह बनाई।
मिश्रित युगल में हालांकि ज्वाला और वी दीजू की रैंकिंग में गिरावट जारी रही क्योंकि दीजू के पीठ के आपरेशन के कारण इस जोड़ी ने काफी अधिक टूर्नामेंट नहीं खेले। अजय जयराम के लिए हालांकि पुरुष एकल में यह वर्ष सफल रहा। चेन्नई में जन्में इस खिलाड़ी ने अपनी पहली ही विश्व चैम्पियनशिप में क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया। एक हफ्ते बाद वह वियतनाम ओपन ग्रां प्री के सेमीफाइनल में भी पहुंचे और जापान के शो ससाकी, डेनमार्क के हैन्स क्रिस्टियन विटिनगस और मलेशिया के मोहम्म हफीज हाशिम जैसे खिलाड़ियों को हराया और सितंबर में अपने कैरियर की सर्वश्रेष्ठ 24वीं रैंकिंग हासिल की।

राष्ट्रमंडल खेलों के कांस्य पदक विजेता पी कश्यप हालांकि पुरुष एकल में भारत के शीर्ष रैंकिंग के खिलाड़ी बने हुए है। उन्होंने इस साल अपने कैरियर की सर्वश्रेष्ठ 20वीं रैंकिंग हासिल की लेकिन इस बाद उनकी रैंकिंग में गिरावट आई और फिलहाल वह दुनिया के 25वें नंबर के खिलाड़ी हैं।

वर्ष 2011 हालांकि युवा खिलाड़ियों के लिए कुछ सफलताएं लेकर आया। महिला एकल में जहां पीवी सिंधू और अरुणधति पंटावने ने कामयाबी हासिल की वहीं पुरुष एकल में सौरभ वर्मा ने कुछ अच्छे नतीजे हासिल किए। सोलह वर्षीय सिंधू ने साल की शुरुआत 151वीं रैंकिंग के साथ की और वह फिलहाल 42वें नंबर की खिलाड़ी हैं। उन्होंने इस साल मालदीव इंटरनेशनल चैलेंज, विक्टर इंडोनेशिया इंटरनेशनल चैलेंज और स्विस इंटरनेशनल का खिताब जीता। उन्होंने डच ओपन का खिताब भी जीता जबकि एक टूर्नामेंट में उपविजेता रही।

अरुणधति ने साल की शुरुआत राष्ट्रीय चैम्पियनशिप के उपविजेता के तौर पर की जबकि वह चेक इंटरनेशनल और एस्टोनियन इंटरनेशनल में भी उपविजेता रही। वह अप्रैल को पोलिश इंटरनेशनल के सेमीफाइनल में भी पहुंची।

युवाओं ने जहां शानदार प्रदर्शन किया वहीं साइना अपने पिछले साल की फार्म में दोहराने में सफल रही। वह हालांकि अब भी दुनिया की चौथे नंबर की खिलाड़ी बनी हुई हैं।

पिछले साल हांगकांग ओपन के दौरान टखने की चोट लगने के बाद सत्र की शुरुआत में इस चोट से परेशान रही साइना कोरिया ओपन के दूसरे दौर से ही बाहर हो गई। वह इसके बाद आल इंग्लैंड सुपर सीरीज प्रीमियर के क्वार्टर फाइनल से भी आगे नहीं बढ़ पाई।
 

साइना ने हालांकि आल इंग्लैंड चैम्पियनशिप के एक इफ्ते बाद साल का अपना एकमात्र स्विस ओपन ग्रां प्री गोल्ड का खिताब जीता। इस दिग्गज को हालांकि दिल्ली में पहले इंडियन ओपन सुपर सीरीज टूर्नामेंट के पहले दौर में ही जापान की आइ गोटो के हाथों शिकस्त झेलनी पड़ी। यह भारतीय खिलाड़ीह मलेशिया ओपन ग्रां प्री गोल्ड के फाइनल में पहुंची लेकिन दुनिया की तत्कालीन नंबर तीन चीन की शिन वैंग से हार गई।

भारत इसके बाद चीन में सुदीरमन कप में सेमीफाइनल में पहुंचा जिसके साइना ने शानदार प्रदर्शन किया।
 थाईलैंड ओपन में साइना क्वार्टर फाइनल तक पहुंची लेकिन सिंगापुर ओपन में यह गत चैम्पियन खिलाड़ी दूसरे दौर में ही हार गई। इंडोनेशिया ओपन में लगातार तीसरी खिताबी जीत दर्ज करने के इरादे से इंडोनेशिया ओपन में उतरी साइना फाइनल में पहुंची लेकिन उन्हें चीन की यिहान वैंग के हाथों हार का सामना करना पड़ा।

विश्व चैम्पियनशिप में साइना एक बार फिर क्वार्टर फाइनल से आगे नहीं बढ़ पाई जबकि चीन मास्टर्स में भी वह अंतिम आठ तक ही पहुंच सकी। वह जापान ओपन सुपर सीरीज के सेमीफाइनल में पहुंची लेकिन डेनमार्क सुपर सीरीज के दूसरे दौर में ही बाहर हो गई। वह फ्रेंच ओपन के दूसरे दौर में ही हार गई जबकि हांगकांग ओपन में भी अपने खिताब की रक्षा करने में विफल रही जहां वह सेमीफाइनल में पहुंची।

अप्रैल में साइना विवाद का भी शिकार रही जब वह राष्ट्रीय कोच पुलेला गोपीचंद से यह कहकर अलग हो गई कि वह अपने कोच का पूरा ध्यान चाहती हैं और कुछ समय भास्कर बाबू के साथ ट्रेनिंग करना चाहती हैं। साइना ने हालांकि दो महीने के अंदर अपने मेंटर से मतभेद भुला लिए और एक बार फिर उनके मार्गदर्शन में ट्रेनिंग करने लगी। इस बीच भारतीय बैडमिंटन संघ गलत कारणों से भी सुर्खियां बना जब इस प्रमुख वीके वर्मा को भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल जाना पड़ा।

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