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होटल करते रहे मेहमानों का इंतजार

यूरो क्षेत्र के ऋण संकट की चिंता और कमजोर रुपये की वजह से देश के मेहमाननवाजी यानी होटल उद्योग के लिए वर्ष 2011 बहुत अच्छा साबित नहीं हुआ है। देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ने के बावजूद यह साल होटल उद्योग के लिए बेहतर नहीं रहा है।

इस साल होटलों में ठहरने वाले पर्यटकों की संख्या में हालांकि मामूली इजाफा हुआ है, लेकिन प्रति कमरा आमदनी अधिक आपूर्ति की वजह से लगभग वहीं टिकी रही। विश्लेषकों का कहना है कि होटल उद्योग के लिए 2011 का साल लगभग स्थिर साबित हुआ।

देश के सकल घरेलू उत्पाद में होटल उद्योग का योगदान नौ प्रतिशत का है। साल के दौरान कई अंतरराष्ट्रीय होटल श्रृंखलाओं मसलन लास वेगास की एमजीएम हॉस्पिटैलिटी, ब्रिटेन की व्हाइटब्रेड और बेस्ट वेस्टर्न आदि ने देश में तेजी से विस्तार किया।

वहीं, दूसरी ओर घरेलू हॉस्पिटैलिटी कंपनियों ओबेराय, आईटीसी और लीलावेंचर बोर्डरूम की गतिविधियों की वजह से अधिक चर्चा में रहे, हालांकि विस्तार में उनका भी थोड़ा बहुत योगदान रहा।

उपभोक्ताओं और कंपनियों के लिए साल की शुरुआती में ही बुरी खबर आई। सरकार ने एसी रेस्तरांओं में भोजन पर सेवा कर लगाने की घोषणा की। इसके लिए अलावा 1,000 रुपये से अधिक के होटल कमरों पर भी सेवा कर लगाने की घोषणा की गई।

इलारा कैपिटल की विश्लेषक हिमानी सिंह ने कहा कि 2011 में होटल कमरों की बुकिंग में चार से पांच फीसदी का इजाफा हुआ और यह औसतन 67 प्रतिशत पर पहुंच गया। वहीं, दूसरी ओर कमरों के किराये लगभग स्थिर ही रहे और इनमें एक से दो फीसदी की ही वृद्धि हुई।

यह एक गतिविधियों वाला साल रहा। भारत ने खुद को अतुल्य भारत अभियान के तहत सैलानियों के दोस्त देश के रूप में पेश किया और अधिक देशों के पर्यटकों के लिए टूरिस्ट वीजा आन अराइवल योजना पेश की। सरकार ने जनवरी, 2011 में छह और देशों वियतनाम, फिलिपींस, इंडोनेशिया, म्यांमार, लाओस और कम्बोडिया के पर्यटकों के लिए भी इस योजना का विस्तार किया। इससे पहले तक यह सुविधा सिर्फ पांच देशों फिनलैंड, जापान, न्यूजीलैंड, सिंगापुर और लग्जमबर्ग के लिए थी।

हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र की सलाहकार फर्म एचपीएस का मानना है कि सरकार द्वारा उठाए गए कदम इस क्षेत्र को बढ़ावा के लिए नाकाफी थे।

एचवीएस इंडिया के प्रबंध निदेशक मानव थडानी ने कहा कि 2011 का साल फ्लैट रहा। बेंगलूर और दिल्ली जैसे कुछ शहरों को छोड़कर सभी के कुल प्रदर्शन में गिरावट आई। उन्होंने कहा कि पिछले छह माह के दौरान सरकार द्वारा कोई कदम न उठाए जाने से कारोबारी धारणा प्रभावित हुई है।

थडानी ने कहा कि निकट भविष्य के लिए सिर्फ एक अच्छी बात हुई है कि रुपये में 20 प्रतिशत की गिरावट के बाद अचानक ही भारत विदेशी सैलानियों के लिए सस्ते गंतव्य के रूप में उभर आया है।

इलारा कैपिटल की हिमानी सिंह ने हालांकि इस बात की आशंका जताई कि विदेशी पर्यटकों की वजह से भारत को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि यूरो क्षेत्र के मौजूदा आर्थिक परिदृश्य में हम निश्चित तौर पर नहीं कह सकते कि देश के विदेशी पर्यटकों की आवाजाही इसी स्तर पर बनी रहेगी।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जनवरी से नवंबर के दौरान देश में 55.75 लाख विदेशी पर्यटक आए, जो 2010 की इसी अवधि की तुलना में 9.4 प्रतिशत अधिक है। 2010 में इसी अवधि में देश में 50.96 लाख विदेशी पर्यटक आए थे, जो इससे पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 11.9 प्रतिशत की वृद्धि थी।

विदेशी विनिमय आमदनी (एफईई) इस अवधि में 17.7 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,487.6 करोड़ डालर पर पहुंच गई, जो पिछले साल इसी अवधि में 1,263.5 करोड़ डालर थी। 2009 की तुलना में 2010 की इसी अवधि में एफईई में 27.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई थी।

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