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ज्ञान और विनम्रता हो साथ, तो बन जाए बात

सायरस पी मिस्त्री का नाम जब टाटा समूह के वर्तमान मुखिया रतन टाटा के उत्तराधिकारी के रूप में घोषित किया गया तो कई लोग हैरान रह गए। लेकिन सायरस को जानने वाले मानते हैं कि वह इस पद के लिए पूरी तरह उपयुक्त हैं। महज 43 साल की उम्र में यह उपलब्धि कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि कठिन परिश्रम व प्रतिभा का नतीजा है।

पिछले साल की ही बात है जब रतन टाटा ने 2012 में अपने रिटायरमेंट की घोषणा की थी। उनकी इस घोषणा के बाद ही मीडिया वर्ल्ड और कॉरपोरेट जगत में यह चर्चा आम हो गयी थी कि लगभग 83 अरब डॉलर के टाटा समूह की बागडोर कौन संभालेगा? दिलचस्प बात है कि जिन लोगों के नाम इस रेस में शामिल थे, उनमें सायरस पी मिस्त्री का नाम नहीं था। गौरतलब है कि रतन टाटा के सौतेले भाई और टाटा इंटरनेशनल के प्रबंध निदेशक नोएल टाटा, पेप्सिको की चेयरपर्सन इंदिरा नूयी से लेकर इंफोसिस के पूर्व चेयरमैन नारायणमूर्ति तक का नाम इस रेस में था। लेकिन टाटा के नये उत्तराधिकारी के रूप में जो नाम सामने आया, वह था सायरस पी मिस्त्री का।  43 साल के मिस्त्री दिसंबर 2012 में रतन टाटा के रिटायरमेंट के बाद टाटा समूह की बागडोर संभालेंगे। इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी कंपनी की बागडोर संभालना सचमुच सायरस के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।

इतनी बड़ी उपलब्धि पाने वाले सायरस मिस्त्री का जन्म 4 जुलाई 1968 को पैलूनजी शपूरजी मिस्त्री के छोटे बेटे के रूप में हुआ। गौरतलब है कि सायरस देश में केवल हजारों की संख्या में बचे पारसी समुदाय के लोगों में से एक हैं। मुंबई में ही सायरस ने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। उस समय भी शपूरजी की कंपनी पूरे भारत और विदेश तक में फैली हुई थी। ऐसे में सायरस का लालन-पालन उसी तरह हुआ, जिस तरह किसी रईस बच्चे का होता है। स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद सायरस ने मुंबई यूनिवर्सिटी से कॉमर्स में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की और इसके बाद आगे की पढ़ाई करने के लिए लंदन चले गये। लंदन के इंपीरियल कॉलेज से सायरस ने इंजीनियरिंग की डिग्री ली। लेकिन बिजनेस के गुर बचपन से ही उनके भीतर मौजूद थे। उन गुणों को और निखारने के लिए उन्होंने ‘लंदन स्कूल ऑफ बिजनेस’ से ‘साइंस ऑफ मैनेजमेंट’ में मास्टर्स डिग्री ली और वापस मुंबई चले आए। यहां आकर उन्होंने अपने पारिवारिक बिजनेस को संभालना शुरू कर दिया। 1991 में सायरस ने निदेशक के रूप में अपने पारिवारिक बिजनेस को नयी बुलंदियों तक पहुंचाया। आज उनकी कंपनी में 23 हजार कर्मचारी काम करते हैं और उनका बिजनेस देश से बाहर पूर्वी और अफ्रीकी देशों में फैला हुआ है।

सायरस ‘टाटा ग्रुप’ के लिए भी नए नहीं हैं। सन् 2006 में उन्होंने ‘टाटा सन्स’ में बोर्ड मेंबर के रूप में काम शुरू किया था। वह सिविल और इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स डील करने वाली ‘एफकोन्स इन्फ्रास्ट्रक्चर’ के भी चेयरमैन रहे। बाद में इस कंपनी का 2000 में ‘शैपूरजी पैलूनजी ग्रुप’ ने अधिग्रहण कर लिया था। सायरस मिस्त्री को निर्माण क्षेत्र का भी काफी अनुभव है। उनकी निर्माण कंपनी ने जहां सबसे ऊंचे आवासीय भवनों का निर्माण किया है, वहीं सबसे लंबे रेल पुल का निर्माण भी उनकी ही कंपनी ने किया है। साथ ही उनको सस्ते मकानों से जुड़े विशाल हाउसिंग प्रोजेक्ट की निगरानी का भी अनुभव है। उनका कारोबार दस देशों में फैल चुका है। हाल ही में उनकी कंपनी ने इथियोपिया में कृषि व जैविक ईंधन (बायो फ्यूल) के कारोबार को पचास हजार हेक्टेयर तक फैलाने में सफलता हासिल की है।

कॉरपोरेट सेक्टर में सायरस मिस्त्री अपनी विन्रमता के लिए जाने जाते हैं। उनके जानकार और नजदीकी इस बात को बखूबी जानते हैं कि सायरस कितने विनम्र हैं। सायरस की सबसे महत्वपूर्ण खूबी है उनकी नैतिकता। ऐसा माना जाता है कि कॉरपोरेट सेक्टर में जिस तरह वह नैतिकता का पालन करते हैं, उतना बहुत कम लोग करते हैं। इसका सबसे बड़ा प्रमाण उस समय देखने को मिला, जब रतन टाटा का उत्तराधिकारी बनाए जाने की घोषणा के बाद अपने पहले संदेश में ही उन्होंने अपने डिप्टी चेयरमैन को लिखा कि वह कानूनी रूप से अपने पारिवारिक कारोबार के प्रबंधन से मुक्त हो जाएंगे, ताकि किसी भी कंपनी के साथ कोई भेदभाव न हो सके। नैतिकता की ऐसी मिसालें कम ही देखने को मिलती हैं।

इसके अलावा उनकी पैतृक खूबियां भी इन्हें आगे ले जाने के लिए पर्याप्त हैं। नोएल से रिश्तेदारी होने के कारण वह टाटा परिवार के ही माने जाते हैं। साथ ही वह टाटा सन्स के सबसे बड़े शेयर होल्डर भी हैं। रतन टाटा ने मिस्त्री को बागडोर सौंपे जाने की घोषणा के बाद कहा कि वह एक साल मिस्त्री के साथ काम करते रहेंगे, ताकि संचालन संबंधी अनुभवों का आदान-प्रदान कर उन्हें बड़ा दायित्व संभालने के लिए तैयार किया जा सके।
दुनिया की सबसे सस्ती कार ‘नैनो’ बनाने वाले टाटा ग्रुप को संभालते ही मिस्त्री के सामने कई चुनौतियां भी होंगी, लेकिन वह चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

अन्य कॉरपोरेट प्रमुखों की तरह सायरस के भी कुछ शौक हैं। उन्हें गोल्फ से काफी प्यार है और वक्त मिलते ही वे गोल्फ क्लब पहुंच जाते हैं। अब देखना है कि एक अच्छे गोल्फर की तरह सायरस मिस्त्री किस तरह टाटा ग्रुप को नयी ऊंचाइयों पर ले जाते हैं।

फैक्ट फाइल
नाम: सायरस मिस्त्री
जन्म: 4 जुलाई, 1968
स्कूली शिक्षा: मुंबई
ग्रेजुएशन: मुंबई यूनिवर्सिटी से कॉमर्स ग्रेजुएट
इंजीनियरिंग: इंपीरियल कॉलेज, लंदन
मास्टर्स इन साइंस ऑफ मैनेजमेंट: लंदन स्कूल ऑफ बिजनेस
प्रिय खेल: गोल्फ
उपलब्धि: टाटा समूह की बागडोर मिलना

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