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पहाड़ी नागिन ने पूरे वर्ष करीब 2500 लोगों को डसा

अपनी प्राकृतिक खूबसूरती तथा धार्मिक आस्था केन्द्रों के लिये मशहूर उत्तराखंड में पहाड़ी नागिन के नाम से कुख्यात बलखाती सड़कों ने गुजरे साल करीब 2500 लोगों को डसा और उन्हें या तो मौत की नींद सुला दिया या सदा के लिये अपंग बना दिया।

राज्य पुलिस मुख्यालय के आंकड़े बताते हैं कि जाते साल सड़क दुर्घटनाओं में कुल 848 लोगों की मौत हुई तथा 1554 लोग घायल हुए। तेजी से वाहन चलाने तथा लापरवाही के चलते 1346 दुर्घटनायें हुई। उधमसिंहनगर जिले में सबसे अधिक 407 दुर्घटनायें हुईं, जिनमें 279 की मौत हुई, जबकि 392 लोग घायल हुए। वर्ष 2010 में इस जिले में दुर्घटनाओं की संख्या 402 रही थी, जिनमें 237 लोगों की मौत हुई तथा 395 लोग घायल हुए।

गुजरते साल में सबसे खास बात यह रही कि मात्र दस दुर्घटनाओं को छोड़ दिया जाए तो बाकी सभी दुर्घटनाएं तेजी से वाहन चलाने तथा लापरवाही के चलते हुईं। वाहन की खराबी से चमोली में छह घटनायें हुई जबकि चट्टान गिरने से इसी जिले में तीन दुर्घटनाएं हुई। अन्य कारणों से मात्र एक दुर्घटना हुई।

आंकडों के अनुसार राज्य में यात्रा सीजन के दौरान बाहर से आने वाले वाहनों में एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ लगी रहती है जिसके चलते सर्पीली सड़कों पर उनका संतुलन बिगड़ जाता है और हादसा होता है। इसके अलावा तीखे मोड़ पर नियंत्रण छूटने, चालक को झपकी आने, शराब पीकर वाहन चलाने तथा ओवरलोडिंग दुर्घटनाओं के मुख्य कारण रहे।

गुजरते साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रत्येक महीने में औसतन 70 व्यक्तियों की मौत हुई जबकि यह आंकड़ा वर्ष 2010 में एक कम 69 था। दुर्घटनाओं के मामले में हरिद्वार जिला दूसरे नंबर पर रहा। इस जिले में कुल 317 दुर्घटनायें हुईं, जिनमें 168 लोग मारे गये तथा 322 घायल हुये। वर्ष 2010 में यहां 313 दुर्घटनाओं में 210 लोग मारे गये और 331 घायल हुये।

आंकड़े बताते हैं कि सड़क दुर्घटनाओं के मामले में राजधानी देहरादून तीसरे नंबर पर रहा। गुजरे साल में
राजधानी में कुल 274 दुर्घटनाओं में 156 लोग मारे गये तथा 228 घायल हुए। वर्ष 2010 में देहरादून में कुल 299 दुर्घटनाओं में 144 लोग मारे गये तथा 244 अन्य घायल हुए।

पर्यटन नगरी के नाम से मशहूर नैनीताल जिले में गुजरे साल में कुल 161 दुर्घटनायें हुईं, जिनमें 77 लोग मौत की नींद सो गये जबकि 158 लोग घायल हुए। इसी जिले में वर्ष 2010 में 171 दुर्घटनायें हुईं, जिनमें 94 लोग मरे तथा 168 घायल हुए। यहां सभी दुर्घटनायें तेजी तथा लापरवाही से वाहन चलाने के कारण हुईं।

हिन्दुओं के सर्वोच्च तीर्थ बद्रीनाथ धाम वाले चमोली जिले में गुजरे साल 46 दुर्घटनायें हुईं, जिनमें से छह वाहन की खराबी तथा तीन चटटान गिरने से हुईं। शेष 37 दुर्घटनाओं में 65 लोग मारे गये तथा 121 घायल हुए। इसी जिले में वर्ष 2010 में 40 घटनायें हुईं, जिनमें 50 लोगों की मौत हुई तथा 128 लोग घायल हुये।

देश के द्वादश शिवलिंगों में एक केदारनाथ के धाम रूद्रप्रयाग जिले में छह दुर्घटनाओं में तीन लोगों की मौत हुई तथा छह अन्य घायल हुये। यहां वर्ष 2010 में कुल 22 दुर्घटनायें हुई थीं, जिनमें 13 लोगों की जान गई तथा 55 अन्य घायल हुए।

राज्य पुलिस मुख्यालय सूत्रों ने बताया कि राज्य में दुर्घटनाओं को कम करने के लिये कई कारगर कदम उठाये गये हैं। इसके तहत वाहनों के उत्तराखंड में प्रवेश के समय उन्हें पंजीकृत करने तथा चारधाम यात्रा के समय का निर्धारण करना शामिल है।

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