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क्रिसमस वाले बाबा

मिष्ठी को पता था कि इस बार क्रिसमस वाले बाबा उसके घर जरूर आएंगे। क्रिसमस वाले बाबा यानी सांता क्लॉज। महीने भर पहले मम्मी ने उसे एक कहानी सुनाई थी कि जो बच्चे क्रिसमस वाले महीने में बिल्कुल झूठ नहीं बोलते, रोज होमवर्क करते हैं, मम्मी-पापा का कहना मानते हैं, किसी से झगड़ा नहीं करते, सांता क्लॉज उस बच्चे को प्यारा सा उपहार देते हैं।

मिष्ठी ने पिछले महीने अपने छोटे भाई अप्पू से खूब झगड़ा किया था। एक बार अप्पू ने उसकी चॉकलेट क्या खा ली, मिष्ठी ने उसके बाल पकड़ कर उसे जमीन पर पटक दिया। मिष्ठी से अप्पू बहुत डरता था। अप्पू ही नहीं, क्लास के दूसरे बच्चे भी घबराते थे, पता नहीं गोल-मटोल मिष्ठी कब किसको धक्का दे दे।

मम्मी उसे समझा कर हार गई कि मिष्ठी को मारने-पीटने, गुस्सा होने की आदत छोड़ देनी चाहिए। लेकिन मिष्ठी थी कि किसी की सुनती ही नहीं थी। एक दिन मिष्ठी स्कूल से कूदती-फांदती घर आई और मम्मी से बोली,
‘आज स्कूल में टीचर ने हमें क्रिसमस और सांता क्लॉज की कहानी सुनाई है। मुझे भी मिलना है सांता क्लॉज से।’

मम्मी ने कुछ गंभीर हो कर कहा, ‘सांता क्लॉज की एक कहानी तो मुझे भी आती है।’
मिष्ठी मचल कर बोली, ‘मम्मी, मुझे भी कहानी सुनाओ ना?’

मम्मी बोलीं, ‘मैं एक शर्त पर सुनाऊंगी। उस कहानी में जो सांता क्लॉज ने कहा है, वो तुम्हें करना पड़ेगा।’
मिष्ठी मान गई। उसे लगा कि सांता क्लॉज कहानी में कहेगा कि उसे लंबी कूद लगानी है, बड़ा सा सेब खाना है या सबसे तेज भागना है।

पर यह क्या? सांता क्लॉज ने कहा कि वह उससे मिलने तभी आएगा जब वह किसी से झगड़ा नहीं करेगी, जिद नहीं करेगी और स्कूल का पूरा काम करेगी। मिष्ठी ने ऐसा कभी किया नहीं था, पर सांता क्लॉज से मिलने का लालच इतना ज्यादा था कि उसने मम्मी की बात मान ली। वैसे उसे यह देख कर अच्छा लगा कि अब स्कूल में दूसरे बच्चे उससे प्यार से बात करने लगे हैं। अप्पू भी अब उसकी चॉकलेट नहीं हड़पता, बल्कि अपनी चॉकलेट में से भी एक टुकड़ा उसे दे देता है। उधर मिष्ठी की मम्मी यह सोच कर परेशान थी कि वह सांता क्लॉज कहां से बुलाए? मिष्ठी ने उनका कहना माना है, तो उसे कुछ तो उपहार देना ही पड़ेगा। आखिरकार उन्होंने पड़ोस के नाहर अंकल से कहा कि चौबीस तारीख की रात को सांता के कपड़े पहन मिष्ठी से मिलने आएं और उसे चॉकलेट का एक डिब्बा उपहार में दें।

मिष्ठी शाम से सांता क्लॉज का इंतजार कर रही थी। अप्पू उससे कहने लगा, ‘दीदी, सांता बाबा तो रात को आते हैं, वो भी बग्घी पर सवार। वो घर थोड़े ही आते हैं, वो तो पार्क में आते हैं।’

अप्पू की बात सुन कर मिष्ठी उसका हाथ पकड़ कर पार्क चली गई। कई बच्चे खेल रहे थे। अचानक मिष्ठी की नजर एक छोटे से भूरे रंग के पिल्ले पर पड़ी, जो ठंड से झाड़ियों में छिपने की कोशिश कर रहा था। मिष्ठी ने धीरे से पिल्ले को उठाया और अपने मफलर में लपेट लिया। खुश हो कर पिल्ला उसे चाटने लगा। अप्पू ताली बजाने लगा। उन्हें पता ही नहीं चला कि कब उनके पीछे एक बूढ़े बाबा आ खड़े हुए हैं।

मिष्ठी के सिर पर हाथ फेर कर बाबा बोले,
‘तुम तो बहुत अच्छी बच्ची हो। मैं तुम्हें एक गिफ्ट देना चाहता हूं।’
मिष्ठी ने खुश हो कर उनकी तरफ देखा,
‘बाबा, आप सांता क्लॉज हो क्या?’

बाबा हंसने लगे,
‘मैं क्रिसमस वाला बाबा हूं। हर साल जो भी बच्चा मुझे अच्छे काम करते दिखता है, उसे उपहार देता हूं। इस साल मैं तुम्हारे लिए लेकर आया हूं—ये।’’

और मिष्ठी के हाथ में उन्होंने बड़ा सा उपहार थमा दिया।

उसमें ढेर सारे चॉकलेट, बिस्किट, केक, कलरिंग पेंसिल, कहानी की किताबें थीं।

मिष्ठी बोली, ‘अप्पू ये सब तुम्हारे लिए और मेरे लिए है यह नन्हा सा पिल्ला। ये सबसे प्यारा तोहफा है।’
बाबा हंसते हुए चले गए और दोनों भाई-बहन उपहार का डिब्बा और पिल्ले को ले कर घर आ गए। उन्हें पता नहीं था कि घर पर उन्हें कुछ और भी मिलने वाला है।
पर आज मिष्ठी को जो मिल गया, उसने उसे सिखा दिया कि प्यार से रहने पर कितना कुछ मिल जाता है।

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  • Web Title:क्रिसमस वाले बाबा