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कर्ज नहीं देने वाले बैंक दंडित हों : मोदी

पटना। हिन्दुस्तान ब्यूरो। उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि कर्ज नहीं देने वाले बैंकों के लिए दंड का प्रावधान किया जाना चाहिए। बैंकिंग सेवाओं को सिटिजन चार्टर में डालने की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि लोन देने का लक्ष्य बैंकों के परफारमेन्स का अधार होना चाहिए। साथ ही इसकी शाखावार मॉनीटरिंग होनी चाहिए।

डिपोजिट के लक्ष्य को पूरा करने में वह क्रेडिट (लोन) को भूल जाते हैं। उन्होनें नाबार्ड को अपनी योजनाओं को वायबल बनाने की सलाह दी। सोमवार को नाबार्ड के क्रेडिट सेमिनार का उद्घाटन श्री मोदी ने किया। उन्होंने कहा कि बैंकों को माइंड सेट बदलना होगा। कोर सेक्टर में लोन देने में कोताही से विकास प्रभावित होता है।

पिछले वर्ष विभिन्न बैंकों की 77 शाखाएं लक्ष्य के एक चौथाई भी लोन नहीं दे सकीं। 50 प्रतिशत से कम उपलब्धि हासिल करने वाली शाखाओं की संख्या 55 है, जबकि 1177 शाखाओं ने 50 से 70 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त किया है। प्रदर्शन ठीक नहीं रहने के कारण आजिज सरकार ने अपनी कई योजनाओं में अनुदान देने के लिए बैंक लोन की शर्त को समाप्त कर दिया।

भंडारण और यांत्रिकरण को बढ़ावा देने में इनका योगदान बहुत खराब है। मत्स्य और पोल्ट्री सेक्टर में तो इन्हें पास मार्क्‍स भी नहीं मिल पाएगा। इसकी उपलब्धि दो अंकों तक नहीं पहुंच पाई है। मोदी ने कहा कि पिछले चार पांच वर्षो में राज्य सरकार के दबाव के कारण प्राथमिकता क्षेत्र में 62 से 66 प्रतिशत उपलब्धि बैंकों ने हासिल की है।

टर्म लोन में भी बड़ी छलांग लगाई है। लेकिन यह उपलब्धि इस लिए दिख रही है क्योंकि इसके पहले के वर्षो में परफारमेंस बहुत खराब रहा है। नाबार्ड की जेएलजी योजना की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि इससे भूमिहीन किसानों को बहुत सहायता मिली है। कोआपरेटिव बैंकों की भी स्थिति ठीक नहीं है। राज्य सरकार उसे दुरुस्त करने में लगी है।

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