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कोहरे की चादर की कैद में शहर

 मैनपुरी, हिन्दुस्तान संवाद। सोमवार को गलनभरी सर्दी और कोहरे का कहर जनपद के लोगों पर जमकर टूटा। गलनभरी हवाओं ने जनमानस को झकझोरकर रख दिया। सड़कों पर लोग निकले लेकिन उल्टे पैर वापस लौट दिए। सर्दी का असर सड़कों पर तो दिखा ही सरकारी दफ्तरों में भी सर्दी का खौफ अधिकारियों और कर्मचारियों पर सिर चढ़कर बोला। सोमवार को जिले का तापमान गिरकर न्यूनतम 8 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। आने वाले दिनों में तापमान में और गिरावट होगी।

लगातार तीसरे दिन जिले में कोहरे का कहर बना रहा। सोमवार को तो पूरे दिन जनपद के ऊपर कोहरे का पर्दा छाया रहा। दोपहर 12 बजे के बाद भी आसमान से कोहरे की चादर नहीं हटी तो लोगों ने सूरज निकलने की उम्मीद छोड़ दी। हुआ भी यही सोमवार को पूरे दिन लोगों को सूरज के दर्शन नहीं हुए। फलस्वरूप पूरे दिन लोग सर्दी से बचने के उपाय तलाशने में जुटे रहे।

ग्रामीण क्षेत्रों में तो जगह-जगह लोगों ने घासफूस जलाकर सर्दी मिटाने के प्रयास किए मगर जब तक आग जली तब तक राहत मिली आग बुझी तो फिर वही ठिठुरन शुरू हो गयी। ग्राम पंचायतों में अब तक नहीं जलाए गए अलावमैनपुरी। सर्दी के तेबर तल्ख हो चुके हैं, लेकिन जिला प्रशासन को अब तक सर्दी का अहसास नहीं हो रहा है।

यदि ऐसा होता तो गांव-गांव सरकारी अलाव की व्यवस्था हो गयी होती। शहर में भी गरीब वर्ग सर्दी से ठिठुर रहा है और गांव में भी गलनभरी हवाएं गरीबों के हाड़ कपा रही हैं, लेकिन अलाव नहीं जलाए जा रहे। ग्राम पंचायतों द्वारा गांव में अलाव जलाए जाने की व्यवस्था की जाती रही है लेकिन ग्राम प्रधान पैसे नहीं हैं का रोना रोकर अलाव जलाने में हाथ खडेम् कर रहे हैं।

नगर पंचायत और नगरपालिका क्षेत्र में भी सोमवार को अलाव नहीं जलाए गए। स्वयंसेवी संस्थाएं भी सर्दी से ठिठुर रहे लोगों को बचाने में अब तक आगे नहीं आई हैं। सरकारी कंबल खरीद का अब तक नहीं हुआ फैसलामैनपुरी। सर्दी शुरू होते ही गरीब तबके को सर्दी से बचाव हेतु सरकारी और समाजसेवी संस्थाओं द्वारा वितरित किए जाने वाले कम्बलों की आशा पैदा हो जाती है।

लेकिन जिला प्रशासन ने अब तक कम्बलों को खरीदने की कार्रवाई ही पूरी नहीं की है। सोमवार को सर्दी से गरीबों को बचाने के लिए गरीबों के लिए कम्बल खरीदने की फाइल डीएम कार्यालय पहुंची, लेकिन इस पर भी अंतिम फैसला नहीं हो पाया। फलस्वरूप आने वाले चार-पांच दिन तो अभी और गरीबों को सरकारी कम्बलों की वितरण की आस छोड़नी ही पडेम्गी।

वहीं समाजसेवी संस्थाओं की ओर से भी कम्बल वितरण कार्यक्रम का कोई प्रस्ताव नहीं है। मकर संक्राति के दौरान जिले में समाजसेवी लोग कम्बल वितरित करते हैं, लेकिन तब तक सर्दी चली जाती हैं अगर यही कम्बल इन दिनों वितरित हो जाएं तो गरीबों को राहत मिल सकती है।

अधिकारियों ने समाजसेवियों से किया संपर्क

सरकारी कंबलों की खरीद पर फैसला भले ही न हुआ हो लेकिन सोमवार को जिलाधिकारी रणवीर प्रसाद ने एडीएम देवेन्द्र सिंह कुशवाह से वार्ता कर जिले के स्वयंसेवी संस्थाओं और समाजसेवियों के माध्यम से गरीबों को कम्बल बंटवाने के इंतजाम शुरू कर दिए। शहर के वरिष्ठ समाजसेवियों से संपर्क किया गया और रात्रि में ही कम्बल बंटवाने के इंतजाम करने को कहा गया।

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