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बंटवारे की गेंद फिर यूपी के पाले में

केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश को चार राज्यों में बांटने के राज्य सरकार के प्रस्ताव को वापस लौटा दिया है। यूपी सरकार से प्रस्ताव के सिलसिले में कुछ जानकारियां मांगी गई हैं। दरअसल, राज्य सरकार ने केंद्र को जो प्रस्ताव भेजा था वह विधानसभा में पारित सिर्फ चार लाइनों का प्रस्ताव था। जबकि गृह मंत्रलय को इस पर आगे की प्रक्रिया शुरू करने के लिए कई और जानकारियों की जरूरत है।

केंद्रीय गृह सचिव आर.के. सिंह ने कहा, हमने प्रस्ताव यूपी सरकार को वापस भेजा है और उनसे कुछ जानकारियां मांगी हैं। मांगी गई जानकारियों में नए बनने वाले चार राज्यों की राजधानियां कहां होंगी।

दूसरा सवाल है कि राज्यों की सीमाएं कहां-कहां होंगी। तीसरा, राज्य के पूर्व कर्मचारियों को दी जा रही पेंशन को कौन वहन करेगा। चौथा सवाल यह है कि राज्य में कार्य कर रहे अखिल भारतीय सेवा के कार्मिकों का बंटवारा कैसे होगा। राज्य की योजनाओं से प्राप्त होने वाले राजस्व की हिस्सेदारी का नए राज्यों में क्या फार्मूला होगा। राज्य की प्रशासनिक इकाइयों के विभाजन किस प्रकार किया जाएंगे।

बता दें कि पिछले महीने यूपी विधानसभा में इस को प्रस्ताव पारित किया गया था। उसके कुछ ही दिनों के बाद इसे केंद्र सरकार को भेजा गया था। प्रस्ताव को गृह मंत्रालय को भेजकर मायावती सरकार ने गेंद केंद्र सरकार के पाले में डाल दी थी।

लेकिन अब केंद्र ने इसे फिर से राज्य सरकार के पाले में डाल दिया है। गृह मंत्रलय द्वारा मांगी गई जानकारियों में इससे भी अहम सवाल यह है कि राज्य पर जो कर्ज बकाया है, उसको चुकाने का क्या फामरूला होगा।

मंत्रालय ने सीएजी की रिपोर्ट के हवाले से कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान यूपी पर कर्ज 180000 करोड़ रुपये था जो 2011-12 के दौरान 20,4000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। करीब एक दर्जन से अधिक अहम जानकारियां यूपी सरकार से मांगी गई हैं। जिन्हें जुटाने में राज्य को अभी महीनों लग सकते हैं। गृह मंत्रालय को राज्य सरकार के प्रस्ताव पर आगे बढ़ने के लिए इन सवालों के जवाब राज्य सरकार से चाहिए।

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