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इंटरनेट की दुनिया में खौफ व नफरत को मात

इंटरनेट, खासकर सोशल नेटवर्किग का इस्तेमाल जिस तरह से लगातार बढ़ रहा है, इसमें तरह-तरह की ताकतें सक्रिय हो गई हैं। यह अच्छी बात है कि सोशल नेटवर्किंग ने छोटे संगठनों और समूहों को अपनी बात पूरी दुनिया तक पहुंचाने का एक सस्ता और सटीक माध्यम दिया है। खासकर उन संगठनों को, जो छोटे स्तर पर अच्छा काम कर रहे हैं, पर उनके संसाधन बहुत बड़े नहीं हैं। इसके उलट वे लोग भी इंटरनेट का इस्तेमाल बहुत तेजी से कर रहे हैं, जिनके इरादे नेक नहीं कहे जा सकते। समूहों, संगठनों, जातियों, धर्मों व देशों के खिलाफ नफरत फैलाने वाले तरह-तरह के आतंकी संगठन और यहां तक कि ठगी करने और धोखा देने वाले भी अपने काम के लिए इंटरनेट और सोशल नेटवर्किंग साइटों का इस्तेमाल करने लगे हैं। यह प्रवृत्ति दुनिया भर की सरकारों के लिए सिरदर्द बनी हुई है। लेकिन अब कुछ गैर सरकारी संगठन या सरकारों की मदद से चलने वाले संगठन इन ताकतों को उन्हीं के खेल में मात देने के लिए मैदान में उतर आए हैं।

ऐसा ही एक संगठन ‘ज्यूइश इंटरनेट डिफेंस फोर्स’ यानी जेआईडीएफ ने पिछले दिनों काफी सुर्खियां बटोरी हैं। यह इजरायल समर्थक हैकरों का समूह है, जो मुख्य तौर से फेसबुक, गूगल अर्थ, विकीपीडिया, यू-ट्यूब और माई स्पेस जैसी साइट्स पर चल रही इजरायल या यहूदी विरोधी गतिविधियों का पता लगाता है। इसके बाद यह उस सर्वर को शिकायत करता है, जो इस वेबसाइट को होस्ट कर रहा है। अगर सर्वर उस सामग्री को नहीं हटाता, तो यह समूह वेबसाइट को ही हैक कर लेता है। जेआईडीएफ खुद को अहिंसक कार्यकर्ताओं का समूह कहता है। उसका दावा है कि उसके 5,000 से ज्यादा सदस्य और 21,000 फॉलोवर हैं। इसके सदस्य उन वेबसाइटों की तलाश में भी जुटे रहते हैं, जो इंटरनेट का इस्तेमाल घृणा फैलाने तथा आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए करते हैं। इसके लगभग सभी सदस्य विकीपीडिया पर नियमित तौर पर विषय सामग्री भी अपडेट करते रहते हैं। इन हैकरों ने इजरायल विरोधी संगठन हिजबुल्लाह की वेबसाइटों पर लाखों बार हिट करके ओवरलोड कर दिया, जिसके चलते उसका सर्वर बैठ गया। यही हाल हमास की वेबसाइट का भी किया गया। इस संगठन का कहना है कि अब तक वह 100 से अधिक ग्रुप को हटा चुका है।

इंटरनेट पर सक्रिय गलत प्रवृत्तियों को इस तरह मात देने के काम को एथिकल हैकिंग कहा जाता है। ऐसे संगठनों के सक्रिय सदस्य हैक्टिविस्ट कहलाते हैं। आमतौर पर ये कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और इंटरनेट प्रोटोकॉल की गहरी जानकारी रखने वाले होते हैं, जो जानते हैं कि किसी वेबसाइट में कैसे सेंध लगाई जाए, कैसे आपत्तिजनक सामग्री को अनधिकृत तौर पर हटाया जाए और कैसे किसी सर्वर को बैठा दिया जाए। भारत में भी ऐसे दो तीन संगठनों के सक्रिय होने की खबर है।

 

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