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खिलाड़ी भी भारत रत्न

केंद्र सरकार ने जन भावनाओं का आदर करते हुए खिलाड़ियों के भारत रत्न पाने की राह की हर बाधा को हटाने का निर्णय लिया है, जो निश्चित रूप से स्वागत योग्य कदम है। यह कहने में कोई संकोच नहीं कि यह निर्णय क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन रमेश तेंदुलकर को ध्यान में रखकर लिया गया है। आशा है कि जल्दी ही सारी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और इस सम्मान के लिए सचिन के नाम की घोषणा भी की जाएगी। क्रिकेट प्रेमियों के साथ ही पूरे भारतवर्ष को उस ऐतिहासिक घड़ी की प्रतीक्षा है।
मुहम्मद इमरान, अजमेरी गेट, दिल्ली

मंत्री बनने का रिकॉर्ड
जिस तरह से अजित सिंह केंद्र की हर सरकार में मंत्री बन जाते हैं और प्रत्येक सत्ताधारी दल के साथ गठबंधन कर लेते हैं, उसे देखते हुए उनकी इस कला का सम्मान किया जाना चाहिए और उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया जाना चाहिए। रालोद मुखिया लगभग हर प्रमुख दल के साथ दोस्ती कर चुके हैं और समय आने पर उस पार्टी को लात मारने में भी उन्हें कोई सकोच नहीं होता। काश! उत्तर प्रदेश की जनता उनकी इस प्रतिभा को समझ पाती।
अर्पित बंसल, गौतम नगर, नई दिल्ली-49

जहरीली शराब के मारे
पिछले दिनों पश्चिम बंगाल में जहरीली शराब पीने से नब्बे से भी अधिक लोगों की मृत्यु हो गई। निस्संदेह, ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, लेकिन यह हृदय विदारक घटना है। दुख की बात तो यह है कि समाचार पत्रों मे इस तरह की खबरें जब-तब पढ़ने को मिलती रहती हैं, फिर भी ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति होती रहती है। ऐसे में प्रश्नचिह्न् तो हमारी व्यवस्था पर लगता है। कहने की जरूरत नहीं कि यदि आबकारी विभाग ने अपना दायित्व ठीक से निभाया होता, तो कई दर्जन परिवार उजड़ने से बच जाते। इसलिए ममता बनर्जी सरकार को अब इस बात को पुख्ता करना होगा कि पश्चिम बंगाल में शराबखोरी पर लगाम लगे और जिन गरीब परिवारों के लोग इस जहर का शिकार बने हैं, उन्हें भरपूर मदद दी जाए।
विकास मिश्र, खुटार, शाहजहांपुर

जिन्ना का पाखंड
रामचंद्र गुहा का लेख ‘जिन्ना के पाखंड पर दलवाई की नजर’ पढ़ा। उन्होंने हमीद दलवाई के बारे में जो बातें लिखी हैं, मेरे विचार से वे बिल्कुल सही हैं। निश्चय ही श्री दलवाई एक महान तथा साहसिक चिंतक थे, तभी तो उन्होंने जिन्ना जैसे पाखंडी की सच्चाई दुनिया के सामने लाने की हिम्मत दिखाई। साफ है, जिन्ना एक स्वार्थी, मतलबी इंसान थे, जिन्होंने हमेशा इंसानियत के ऊपर संप्रदायवाद को रखा। उनकी ओछी सोच के कारण ही भारत दो टुकड़ों में विभाजित हो गया।  जिन्ना की सोच थी कि हिंदू और मुसलमान कभी एक साथ रह ही नहीं सकते। हालांकि उनकी इस धारणा की हवा कुछ वर्षों में ही निकल गई, जब बांग्लादेश का उदय हुआ। जबकि इसके ठीक उलट भारत में आज भी मुस्लिम न सिर्फ शांति और भाईचारे के साथ रह रहे हैं, बल्कि भारत की तरक्की में बराबर के साङोदार हैं। विडंबना यह है कि पाकिस्तान की वकालत करने वालों को बांग्लादेश के उदय के बाद भी अपनी गलती का अहसास नहीं हुआ और वे अपनी पुरानी कुटिल नीतियों पर ही चलते रहे। इसी का नतीजा है कि पाकिस्तान आज दुर्गति का शिकार हो गया है। अब तो उसे दुनिया भर में एक विफल राष्ट्र के रूप में गिना जाने लगा है।
अनिकेत कुमार, धनबाद, झारखंड

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