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एक माह में तीन बार, भीड़ के ताकत से पलटवार

बसपा की शैली-विरोधियों को जवाब देने का यह आजमाया हुआ बसपाई फार्मूला-कड़ाके की ठण्ड के बावजूद जुटान पहले दो आयोजनों से कहीं ज्यादा रचना सरनलखनऊप्रतिद्वन्दी दलों के आरोपों पर आक्रामक पलटवार की यह बसपाई शैली है। विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी दलों के चौतरफा हमले ङोल रहीं मुख्यमंत्री मायावती ने एक बार फिर विरोधी दलों को भीड़ की ताकत दिखाई और उनके आरोपों का जवाब भी दिया। करीब एक माह में बसपा का यह राजधानी में तीसरा शक्ति प्रदर्शन था। शुरुआत 13 नवम्बर को ब्राह्मण-दलित भाईचारा सम्मेलन से हुई। जगह अलबत्ता रमाबाई मैदान नहीं बल्कि स्मृति उपवन था। इसके बाद 27 नवम्बर को दलित-पिछड़ा भाईचारा महासम्मेलन हुआ। भीड़ बढ़ी तो मैदान भी बदल गया। आयोजन स्थल हो गया राजधानी का सबसे बड़ा रमाबाई मैदान और आज फिर इसी मैदान पर मुस्लिम-क्षत्रिय-वैश्य भाईचारा महासम्मेलन। कड़ाके की ठण्ड और कोहरे के बावजूद जुटान पहले दो आयोजनों से कहीं ज्यादा थी। उसमें भी महिलाओं की खासी संख्या। मानो मौसम की मार का कोई असर ही न हों। रमाबाई मैदान में भीड़ ही भीड़। बसपा मुखिया मायावती का भाषण खत्म होने के बाद भी लोग आ रहे थे। भारी भीड़ का अहसास करने के लिए ही खुद बसपा प्रमुख ने आयोजन स्थल पर आने से पहले हेलिकॉप्टर से पूरे मैदान का चक्कर लगाया। भीड़ देख महासम्मेलन का संचालन कर रहे कैबिनेट मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी समेत मंच पर मौजूद दूसरे नेताओं का उत्साह भी देखते बन रहा था। भीड़ अगर सियासत में किसी राजनीतिक दल की ताकत का पैमाना है तो बसपा ऐसे आयोजनों से एक बार फिर अपनी सांगठनिक क्षमता का प्रदर्शन करने में कामयाब रही है।

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