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घर न जा पाएं तो किस काम का तबादला!

 लखनऊ शिखा श्रीवास्तव। परिषदीय स्कूलों के ज्यादातर शिक्षक तबादलों की घोषणा के बाद भी खुश नहीं हैं। कारण-गृह जनपद को वरीयता क्रम में सबसे नीचे रखा जाना। इसके चलते सूबे में आखिरी बार हो रहे तबादलों को लेकर शिक्षकों में कोई उत्साह नहीं है। सरकार ने शिक्षिकाओं के लिए गृह जनपद का विकल्प वरीयता क्रम में तीसरे और शिक्षकों के लिए चौथे स्थान पर रखा है। बेसिक शिक्षा परिषद की अध्यापक नियमावली 1981 के मुताबिक बेसिक शिक्षकों का पद जिला संवर्ग का होता है। इसमें पूरी नौकरी में एक बार शिक्षक चाहे तो अंतरजनपदीय तबादला हो सकता था। इसमें संशोधन करते हुए तबादले की व्यवस्था बंद कर दी गई है। लेकिन राज्य सरकार ने 31 अक्टूबर तक नियुक्त शिक्षकों को एक आखिरी बार तबादला देने का निर्णय किया है। विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन की वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष शलिनी मिश्रा के मुताबिक गृह जनपद का विकल्प सबसे नीचे रख कर राज्य सरकार ने शिक्षकों को कोई लाभ नहीं दिया।

ज्यादातर शिक्षक अपने गृह जनपद ही आना चाहते हैं। मेरे जैसी कई शिक्षिकाएं हैं जो नौकरी के चलते रोज दूसरे शहर जाती हैं। शिक्षिकाओं के लिए गृह जनपद का विकल्प मायने रखता है। हालांकि इसके बाद भी सबसे ज्यादा आवेदन गृह जनपद के लिए ही आ रहे हैं। जानकार सूत्रों के मुताबिक, गृह जनपद के अलावा दूसरे नंबर पर नगरीय क्षेत्रों में स्थापित स्कूलों के लिए आवेदन करने वाले हैं।

कारण-शहरों में सुविधाएं ज्यादा हैं और शहरों में लगभग ढाई हजार रुपए का एचआरए (नगर प्रतिकर भत्ता) अलग से मिलता है।इनसेट-ऑनलाइन बढ़ा रही मुश्किलें ऑनलाइन व्यवस्था होने से दूरदराज और गांवों में बसे शिक्षकों को काफी तकलीफ हो रही है।

विभाग ने धांधली से बचने के लिए तबादलों के लिए सिर्फ ऑनलाइन आवेदन करने की व्यवस्था की है। लेकिन गांवों में इसके लिए दूर दराज में स्थापित साइबर कैफे की मदद लेनी पड़ रही है। उस पर भी सर्वर डाउन होने और बिजली न होने के चलते एक दिन में आवेदन करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है।

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