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मॉडल तक ही सिमटे मॉडल प्रोजेक्ट

नोएडा। कुलदीप सिंह। हाइटेक सिटी नोएडा में लोगों की सहूलियत के लिए प्राधिकरण ने तमाम प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी तो दे दी है, लेकिन नियमों को अमल में लाए बिना इन कायरें को करना अब प्राधिकरण को ही भारी पड़ रहा है। शहर में बनने वाले कई मॉडल प्रोजेक्ट अब तक मॉडल ही बनकर रह गए हैं। प्राधिकरण ने इन योजनाओं का प्रचार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी लेकिन अब इन्हें पूरा करने में अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं।

हालांकि उच्च अधिकारियों के सख्त रवैये के बाद बडेम् प्रोजेक्ट्स का काम युद्ध स्तर पर किया जा रहा है, लेकिन इन योजनाओं को पूरा करने का समय अपने तय लक्ष्य से काफी आगे निकल चुका है। 3 हजार करोड़ की लागत से कई प्रोजेक्ट्म्स पर काम चल रहा है

तो कुछ फाइलों में अपना दम तोड़ रही हैं। प्राधिकरण के अधिकारी लगातार इनकी डेडलाइन आगे बढ़ाते जा रहे हैं। एफएनजी की योजना तो दो दशक के बाद फाइल से जमीन तक आ सकी। प्राधिकरण ने सेक्टर-35 में आधुनिक सुविधाओं से युक्त अंतर्राज्यीय बस स्टेशन की योजना बनाई। यह योजना अभी तक फाइलों में ही अटकी हुई है। शहर में बनने वाली इन योजनाओं में कुछ की डीपीआर बन चुकी है

तो कुछ का अभी टेंडर तक जारी नहीं हुआ है। जिनके टेंडर जारी हो चुके हैं तो उनका काम काफी सुस्त है।

प्रोजेक्ट :सेक्टर-35 में अंतर्राज्यीय बस अड्डाकब बनी योजना : वर्ष1990 लागत : लगभग 200 करोड़ जमीन : 7.75 एकड़2006 तक सिर्फ चार दीवारी तक ही बन पाई।

वर्तमान स्थिति : डीपीआर तैयार लेकिन टेंडर जारी नहीं हुआबनता तो क्या फायदा होता : आधुनिक सुविधाओं से युक्त मॉडल बस अड्डे के बनने के बाद प्रदेश के सभी शहरों के लिए बस की सुविधा मिलती। अभी नोएडा वासियों को सराय काले खां और आनन्द विहार का रुख करना पड़ता है।

------------------------------------------------एफएनजी फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार- वर्ष1989पंचवर्षीय योजना में शामिल- 1992-93नोएडा में शामिल- 17 किलोमीटरमौजूदा रोड की चौड़ाई- कहीं 45 तो कहीं 75 मीटर वर्तमान स्थिति :

एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की लापरवाही के चलते 21 साल से कछुआ गति से हो रहा काम बनता तो क्या होता : नोएडा के लोगों को फरीदाबाद जाने के लिए नया रास्ता मिलता। इस शॉर्ट कट रास्ते से दोनों शहरों की दूरी घट जाती।

फरीदाबाद से नोएडा होते हुए गाजियाबाद तक जानी थी सड़क।

 तैयार हुआ- वर्ष 2006-07तैयार होने की तिथि - वर्ष 2009प्रोजेक्ट की प्रारंभिक लागत- 68 करोड़ रुपये वर्तमान लागत- 350 करोड़ जमीन मुहैया कराई गई- 20,000 वर्ग मीटर वर्तमान जमीन - 2600 वर्गमीटरगाडिम्यां खड़ी होने की क्षमता- 3800 वर्तमान स्थिति- सिर्फ सलाहकार की नियुक्ति और प्रजेंटेशन हुआ। काम की शुरुआत नहीं।

बनता तो क्या होता - सेक्टर-18 में पार्किंग की समस्या से लोगों को मिलती निजात। पार्किंग की समस्या के कारण सेक्टर-18 जाने से हिचकते हैं लोग।

मल्टीस्पेशिएलिटी अस्पताल निर्माण कार्य शुरू- 5 जनवरी 2009 पुरानी डेड लाइन -दिसंबर 2010प्रोजेक्ट की शुरुआती लागत- 187 करोड़ रुपये प्रोजेक्ट की वर्तमान लागत- 701 करोड़ रुपये स्टाफ क्वार्टर और हॉस्टल की बिल्डिंग की मंजिलों में की गई कमीवर्तमान स्थिति- 40 प्रतिशत काम बचा। सिर्फ जिला अस्पताल की ओपीडी हुई शुरूबनता तो क्या होता - मरीजों को मिलती आधुनिक सुविधाएं, एम्स की तर्ज पर होता इलाज। सभी गंभीर बीमारियों के ऑपरेशन की मिलती सुविधा।

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