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फ्लैग56वीं ऑल इंडिया इंग्लिश टीचर्स कांफ्रेंस का आगाज, कांफ्रेंस में आए विद्वानों ने एक स्वर में कहामेनजरूरी है विद्यार्थियों का भावनात्मक विकासमंथनपत्रिका जर्नल ऑफ एसोसिएशन ऑफ इंग्लिश टीचर्स के 49वें अंक और स्मारिका का भी विमोचनबरेली। वरिष्ठ संवाददाताविद्यार्थियों के भावनात्मक विकास की जरूरत पर जोर देती 56वीं ऑल इंडिया इंग्लिश टीचर्स कांफ्रेंस का रविवार को विधिवत उद्घाटन हुआ। इस कांफ्रेंस में देश भर के अंग्रेजी विद्वान जमा हुए हैं। एसआरएमएस सभागार में आयोजित इस कांफ्रेंस का उद्घाटन येल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ए रामास्वामी, रुहेलखंड यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर सत्यपाल गौतम और मुख्य वक्ता जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अनीस उर रहमान ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मंडल आयुक्त के राम मोहन राव और विशिष्ट अतिथि महापौर सुप्रिया ऐरन के न पहुंचने पर कांफ्रेंस का उद्घाटन अन्य अतिथियों ने ही मिल कर किया। बरेली कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरपी सिंह ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने कहा कि यह बरेली कॉलेज के एकेड़ािक इतिहास का बड़ा दिन है। पहली बार कोई नेशनल कांफ्रेंस बरेली कॉलेज को मिली है। अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. पूर्णिमा अनिल ने कांफ्रेंस के बारे में विस्तार से बताया। एसोसिएशन के सचिव डॉ. पद्माकर पाण्डेय ने एसोसिएशन के क्रियाकलापों, अब तक की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं के बारे में बताया। उद्घाटन सत्र में एसोसिएशन की पत्रिका जर्नल ऑफ एसोसिएशन ऑफ इंग्लिश टीचर्स के 49वें अंक और स्मारिका का विमोचन भी किया गया। बरेली कॉलेज प्रबंध समिति के सचिव देवमूर्ति ने भी संबोधित किया।पचास से ज्यादा रिसर्च पेपर पढ़े उद्घाटन सत्र के बाद आयोजित तकनीकी सत्र में रविवार को पचास से ज्यादा रिसर्च पेपर विद्वानों ने पढ़े। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रिजवान का रिसर्च पेपर काफी सराहा गया। प्रोफेसर रिजवान ने क्रिटकल थ्योरी इन इंग्लिश लैंग्वेज टीचिंग.. टॉपिक पर अपना पेपर प्रस्तुत किया। उन्होंने भाषा और साहित्य को पढ़ाने की तरीकों और जरूरतों पर विस्तार से चर्चा की। तकनीकी सत्र एसआरएमएस के एमबीए विभाग में हुए थे।करें विद्यार्थियों का चरित्र निर्माण ऑल इंडिया इंग्लिश टीचर्स एसोसिएशन के चेयरमेन प्रोफेसर पशुपति झा ने कहा कि शिक्षकों का वेतन बढ़ा है, लेकिन इक्कीसवीं सदी में बौद्धिक संपदा की उस स्तर पर वृद्धि नहीं हुई है जो होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि समाज में विषमताएं और तनाव बढ़े हैं, इनके समाधान के लिए भी शिक्षकों और साहित्यकारों को सोचना होगा। प्रोफेसर झा ने कहा कि आज के विद्यार्थियों में भावनात्मक विकास जरूरी हो गया है। शिक्षक का उद्देश्य शिक्षा के साथ ही विद्यार्थियों का चरित्र निर्माण भी करना है। साहित्य और जीवन दर्शन है पर्याययेल यूनिवर्सिटी यूएसए के प्रोफेसर एस रामास्वामी ने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि अंग्रेजी भाषा ग्लोबल भाषा हो गई है। इसलिए यह दुनिया तक पहुंचने का आसान माध्यम हो गई है। उन्होंने कहा कि सिर्फ ज्ञान और जानकारी की वृद्धि से ही काम नहीं चलेगा। जीवन के प्रति सार्थकता ओर विद्वता भी जरूरी है। प्रोफेसर रामास्वामी का कहना था कि साहित्य और दर्शन एक दूसरे के पर्याय हैं। विद्यार्थियों के लिए दुनिया की जानकारी के साथ ही आत्मा और परमात्मा का ज्ञान भी जरूरी है। संस्कृति का असर है साहित्य मेंमुख्य वक्ता जामिया मिलिया के प्रोफेसर अनीस उर रहमान ने अपने उद्बोधन में कहा कि इक्कसवीं सदी के इस दूसरे दशक में दुनिया की राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक परिस्थिति और तकनीक में बहुत तेजी से बदलाव हो रहे हैं। उनका कहना था कि इन बदलावों का असर साहित्य पर पड़ रहा है। खासकर भारतीय समाज के विभिन्न रंगों और आयामों का असर भी अंग्रेजी साहित्य पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में 22 ऑफिशियल भाषाएं और सैकड़ाें बोलियां बोली जाती है। इसका भी असर अंग्रेजी साहित्य में देखा जा सकता है।

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