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मेनअपनी ‘फैक्ट्री’ बंद, बाहर से खरीदे जा रहे कंबलसेंट्रल जेल हर साल चार से पांच हजार कम्बल का उत्पादन करता था सेंट्रल जेलसरकारी दावपेंच में उलझ गया ऊन खरीद, नहीं शुरू हो सका कंबल बनाने का कामबरेली। वरिष्ठ संवाददातासेंट्रल जेल की फैक्ट्री में तालाबंदी के चलते कम्बल बाहर से खरीदने पड़ रहे हैं। मुख्यालय ने रविवार को एक हजार कम्बल भेजे हैं। सरकारी गुत्थियों में उलझा ऊन खरीद का मसला अब तक सुलझ नहीं पाया है। सेंट्रल जेल की कंबल फैक्ट्री हर साल चार से पांच हजार कम्बलों का उत्पादन करती है। इसके लिए जेल परिसर में मशीनें लगी हैं। 250 से अधिक प्रशिक्षित कैदी इसमें काम करते हैं। जेल में होने वाले इन कम्बलों के उत्पादन से जहां सेंट्रल जेल की अपनी जरूरतें पूरी होती थीं वहीं बरेली, मुरादाबाद क्षेत्र की सभी जेलों को भी जरूरत के अनुसार कम्बल सप्लाई किए जाते थे। सितम्बर माह से शुरू होकर कम्बलों का उत्पादन आमतौर पर जनवरी तक चलता है। इस दौरान 4-5 हजार कम्बलों का उत्पादन प्रतिवर्ष किया जाता है। ---------हर कैदी को चार से पांच कम्बल ठंड बढ़ने पर हर कैदी को चार से पांच कम्बल दिए जाते हैं। बूढ़े और बीमार कैदियों को इसकी संख्या बढ़ा भी दी जाती है। प्रतिवर्ष पुराने हो चुके कम्बलों को अनुपयोगी घोषित कर नए कम्बल प्रयोग में लाए जाते हैं।----------कैदियों को मिलता है प्रशिक्षण और रोजगारकंबल उत्पादन का उद्देश्य कैदियों को स्वरोजगार का प्रशिक्षण देना है। इसमें काम करने वालों को श्रम कौशल के अनुसार 40, 30 और 25 रुपए प्रतिदिन के अनुसार मानदेय भी दिया जाता है। इससे जेल में सजा काटने के दौरान कैदी कुछ पूंजी भी जुटा लेता है।-----मुख्यालय से आए 1000 कम्बललगातार बढ़ती ठंड के चलते जेल मुख्यालय ने सेंट्रल जेल को 1000 कम्बलों की पहली खेंप भेजी है। रविवार को यह खेंप पहुंच गई। जरूरत पड़ने पर और कम्बल और मांगे जा सकते हैं।--------------‘‘ ऊन खरीद के लिए मुख्यालय स्तर पर टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जैसे ही ऊन की आपूर्ति हो जाएगी, कम्बल उत्पादन शुरू करा दिया जाएगा। हालांकि इसमें थोड़ी देरी हो गई है।एके राय, वरिष्ठ जेल अधीक्षक, सेंट्रल जेल

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