DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

जीवाणु रोशन करेंगे घर को

एक दिन बैक्टीरिया आपके घर को रोशन करेंगे। एक मशहूर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी ने एक ऐसी ‘बायो-लाइट’ विकसित की है, जो जीवाणुओं से हरी रोशनी उत्पन्न करती है। कंपनी द्वारा विकसित विशेष लैंप में कांच के चैंबरों में जैव-प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीवाणु होते हैं। जब घर के कूड़े-कचरे से तैयार मीथेन गैस की खुराक इन जीवाणुओं को दी जाती है तो वे जुगनुओं की तरह चमकने लगते हैं। यह बैक्टीरिया लैंप ईको-फ्रेंडली प्रकाश स्नोतों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कंपनी द्वारा उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में बैक्टीरिया की लाइटिंग से सड़क के किनारे लगे पेड़ों को भी जगमग किया
जा सकेगा।

प्लाज्मा से सर्दी-जुकाम का इलाज
इलेक्ट्रिक चार्ज वाली गैस आपके सर्दी-जुकाम का भी इलाज कर
सकती है। वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि कुछ मिनट तक कोल्ड प्लाज्मा
अथवा आयोनाइज्ड गैस की बौछार के संपर्क में आने के बाद सर्दी-जुकाम उत्पन्न करने वाले वायरस निष्क्रिय हो जाते हैं। इस शोध से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि प्लाज्मा उपकरणों का इस्तेमाल अस्पतालों में हैंड सेनेटाइजर के रूप में भी किया जा सकता है।
इस नई और अनोखी खोज से सर्दी-जुकाम और फ्लू और ठंड लगने से जुड़ी कई छोटी-मोटी बीमारियों के इलाज के लिए नए तरीके खोजने में भी मदद मिल सकती है।

वेस्टा- ग्रह या क्षुद्रग्रह
हमारे सौरमंडल में वेस्टा एक विशाल क्षुद्रग्रह (एस्टेरॉयड) है। नासा के डान अंतरिक्ष यान ने इस 9 जुलाई को सौरमंडल की बाहरी एस्टेरॉयड बेल्ट में स्थित इस क्षुद्रग्रह के निकट पहुंचने के बाद जो तस्वीरें भेजी हैं, उन्हें देख कर वैज्ञानिक इस सोच में पड़ गए हैं कि इसे क्षुद्रग्रह माना जाए या ग्रह। ये तस्वीरें करीब 26000 मील (करीब 41000 किलोमीटर) दूर से ली गई थीं। वेस्टा की ऊबड़-खाबड़ सतह अन्य क्षुद्रग्रहों के मुकाबले बिल्कुल अलग है। जर्मनी में मेक्स प्लांक इंस्टीट्यूट फॉर सोलर सिस्टम रिसर्च के वैज्ञानिक विष्णु रेड्डी का कहना है कि अधिकांश क्षुद्रग्रह आलू सरीखे लगते हैं, लेकिन वेस्टा का आकार नाशपाती जैसा है। उसका मध्य भाग लोहे का है और वहां खनिजों की भरमार है।

वर्ष 1996 में हब्बल टेलीस्कोप से ली गई तस्वीरों में दिखा था कि वेस्टा पर एक विशालकाय खड्ड (क्रेटर) है। यह खड्ड उसके दक्षिणी ध्रुव के पास है और इसका व्यास 460 किलोमीटर का है। इन तस्वीरों को उतारते समय वेस्टा की पृथ्वी से दूरी 110 मील की थी। कई अन्य क्रेटर भी इसकी सतह पर दिखते हैं। आज वेस्टा के आकार-प्रकार को देखकर वैज्ञानिक इसके बारे में नए सिरे से सोचने को मजबूर हो रहे हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:जीवाणु रोशन करेंगे घर को