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लालच से मुक्ति की राह

आजकल लोग इस कदर बेशुमार धन बटोरते हैं, जितनी कि उन्हें जरूरत नहीं होती। उसके लिए इतने गैरकानूनी तरीके अपनाते हैं कि उनका सही-गलत का विवेक खो जाता है। इतने बड़े पैमाने पर लालच पहले नहीं था। माना कि अब धन कमाने के साधन-सुविधाएं बहुत उपलब्ध हैं, लेकिन लोगों की मनोदशा भी बदल गई है।

ओशो ने इस पर अनूठी दृष्टि प्रस्तुत की है। वह कहते हैं- आधुनिक मनुष्य आध्यात्मिक तल पर बिलकुल दरिद्र है, उसका स्वयं से संबंध टूट गया है। इसलिए भीतर जो खालीपन है, उसे लोग धन से, वस्तुओं से भरने की कोशिश करते हैं। लालच का मतलब होता है कि आप एक गहरे खालीपन को भरते जा रहे हैं। लोग खा रहे हैं, उन्हें भूख नहीं होती, तब भी वे निगलते जाते हैं। वे जानते हैं कि यह चीज उनके लिए दुख उत्पन्न कर रही है, वे बीमार होंगे, मगर वे अपने आपको नहीं रोक सकते। ध्यान रहे, हर चीज की एक उपयोगिता होती है, जिसकी उपयोगिता नहीं होती, उसकी जरूरत भी नहीं होती।

ये सब खालीपन को भरने के तरीके हो सकते हैं। हालांकि यह कभी पूरा नहीं भरता, यह खाली ही रहता है। ‘और ज्यादा’ की जरूरत होती है, इस ‘ज्यादा’ का कहीं अंत नहीं होता। लालच एक इच्छा नहीं है, इसीलिए आप लालच का त्याग नहीं कर सकते। इस इच्छा का त्याग किया, तो वह दमन होगा। एक व्यक्ति धन को पकड़ता है, दूसरा व्यक्ति धन का त्याग करता है। दोनों एक ही जैसे हैं।

लालच से मुक्त होने का उपाय है- ध्यान में डुबकी लगाकर मौन और शांति में अपने गहन केंद्र के निकट आएं। आप पाएंगे कि आत्मिक तल पर आप भरे-पूरे हैं। आपके पास इतना अधिक है कि आप सारे संसार को दे सकते हैं, फिर भी यह खाली नहीं होगा। उस दिन पहली बार आपको कोई लालच नहीं होगा- धन के लिए, भोजन के लिए, चीजों के लिए, किसी भी चीज के लिए। आप सहज जीवन जिएंगे।
अमृत साधना

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