DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

वह बच्चा बच सकता था

तेईस नवंबर को नौ वर्षीय विरज परमार की मुंबई में मृत्यु हो गई। वह स्कूल बस से घर जा रहा था। जब उसने बस से सिर बाहर निकाला, तो अचानक उसका सिर सड़क पर लगे एक होर्डिग से टकरा गया। शायद वह मृत्यु टाली जा सकती थी, यदि स्कूल बस की खिड़कियों के सींखचे इतने पास-पास होते कि वह अपना सिर बाहर न निकाल पाता। यदि बस के ड्राइवर व कंडक्टर लगातार ध्यान रखते कि बच्चे सुरक्षित हैं या नहीं, यदि होर्डिंग सही ऊंचाई पर होता।

प्राय: कानून व नियमों का पालन करने भर से बहुत-सी दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है। किंतु क्या धमाल मचाते 50-60 बच्चों पर लगातार ध्यान रखना किसी कंडक्टर के लिए संभव है? ड्राइवर तो बस चलाते समय बच्चों पर नजर रख ही नहीं सकता। बहरहाल, यह जानकर सुकून मिला कि इस मामले में बच्चों का ध्यान न रखने वालों व नियमों का पालन न करने वालों को गिरफ्तार किया गया। किंतु क्या बाहर के लोग ही हमारे बच्चों की सुरक्षा के लिए उत्तरदायी हैं? हम माता-पिता का उत्तरदायित्व क्या व कितना है?

जब हम बच्चे को जूता पहनाना शुरू करते हैं, तो उसे पहनना व फीते बांधना सिखाते हैं... फिर जब वह घर से बाहर जाना शुरू करता है, तो सड़क पार करना, बस में जाना शुरू करता है, तो बस में सुरक्षा के नियम, जैसे हाथ, बांह, सिर बाहर न निकालना सिखाना कैसे भूल जाते हैं? जन्म देने भर से हम बच्चाों के उत्तरदायित्व से मुक्त हो जाते हैं और शेष समाज उनके लिए उत्तरदायी हो जाता है?
घुघूती बासूती से

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:वह बच्चा बच सकता था