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रुपये में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा

डॉलर के मुकाबले साल की शुरुआती स्थिति से 16 फीसदी नीचे चल रहे रुपये के मूल्य में विश्लेषकों के मुताबिक घरेलू और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण अगले कुछ महीनों में भी उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।

आंशिक तरलता वाले रुपये के मूल्य में पिछले एक महीने में काफी गिरावट दर्ज की गई है। डॉलर के मुकाबले यह 15 दिसम्बर को 54.30 रुपये के ऐतिहासिक निचले स्तर पर चला गया, जो इस साल 27 जुलाई को रुपये के अधिकतम मूल्य 43.85 रुपये प्रति डॉलर से 24 फीसदी कम था। इस अवधि में रुपये का प्रदर्शन एशिया की अन्य मुद्राओं की तुलना में अधिक बुरा रहा।

प्राइसवाटरहाउसकूपर्स (पीडब्ल्यूसी) के कार्यकारी निदेशक संजीव कृषण ने कहा, ‘अगले पांच से आठ सप्ताह की अवधि में भी रुपये के मूल्य में गिरावट जारी रह सकती है।’ कृषण ने कहा कि महत्वपूर्ण नीतिगत फैसला आने तथा सकारात्मक आर्थिक आंकड़े आने के बाद ही रुपये के मूल्य में सुधार आने की उम्मीद है।

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने हालांकि रुपये के गिरते मूल्य पर अधिक निराशा प्रदर्शित नहीं की। उन्होंने कहा कि रुपये के अवमूल्यन से जहां एक समूह का नुकसान होता है, वहीं कुछ अन्य समूह का फायदा होता है। इसलिए अवमूल्यन को बड़ी विपदा नहीं माना जाना चाहिए। सेन हार्वर्ड विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हैं।

उन्होंने कहा कि कुछ देशों को मुद्रा के अवमूल्यन से निर्यात में फायदा मिला है। चीन ने इसका बेहतर तरीके से लाभ उठाया है। भारत को भी रुपये के अवमूल्यन का लाभ उठाना चाहिए। भारतीय रिजर्व बैंक ने गुरुवार को रुपये के अवमूल्यन को रोकने के लिए कई कदम उठाए, जिसके कारण शुक्रवार को रुपये का मूल्य करीब दो फीसदी बढ़ा।

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