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दुनिया ने ऑस्ट्रेलिया से मुंह मोड़ा

कुछ ऑस्ट्रेलियाई लोगों की विदेशी पर्यटकों और छात्रों से नफरत का खामियाजा पूरे देश को भुगतना पड़ रहा है। भारतीय छात्रों से मारपीट की नस्लीय घटनाओं के बाद भारत समेत दुनिया के कई देशों के छात्रों ने ऑस्ट्रेलिया से मुंह मोड़ लिया है। ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई के लिए जाने वाले विदेशी छात्रों की संख्या में एक साल के भीतर 54 हजार की कमी आ गई है। इससे उसकी अर्थव्यवस्था को भी भारी भरकम 10,000 करोड़ रुपये की चपत लगने का अनुमान है।

भारत के अलावा कंगारुओं के देश से जिनका मोहभंग हुआ है उनमें चीन, नेपाल, थाईलैंड और दक्षिण कोरिया सहित कई देश शामिल हैं। ऑस्ट्रेलियाई सरकार के शिक्षा, रोजगार और कार्यस्थल संबंधित विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों की संख्या में 9.1 प्रतिशत की गिरावट आई है। इस साल अक्तूबर में यह संख्या 5,41,942 रही है, जो कि पिछले साल 5,96,290 थी। इसमें सबसे ज्यादा 27.3 फीसदी गिरावट भारतीय छात्रों की संख्या में आई है। चीन के बाद भारत से ही सर्वाधिक छात्र पढ़ाई के लिए ऑस्ट्रेलिया जाते हैं। चीन से जाने वाले छात्रों की संख्या में भी 4.3 प्रतिशत की कमी आई है।

खास बात यह है कि ऑस्ट्रेलिया जाने वाले कुल अंतरराष्ट्रीय छात्रों में से 56 प्रतिशत छात्र चीन, भारत, दक्षिण कोरिया, वियतनाम और मलेशिया के होते हैं।
 इन पांचों देशों के छात्रों की संख्या में गिरावट आई है। इन देशों में मलेशिया से जाने वाले छात्रों की गिरावट सबसे कम (1.8 फीसदी) रही है। अंतरराष्ट्रीय छात्र मुख्य रूप से उच्च शिक्षा, व्यवसायिक शिक्षा और ट्रेनिंग के लिए ऑस्ट्रेलिया जाते हैं। इसमें से व्यवसायिक शिक्षा और ट्रेनिंग के लिए जाने वाले छात्रों की संख्या में 16 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। अहम बात यह है कि ऑस्ट्रेलिया में इन विषयों की पढ़ाई करने वाला हर तीसरा विदेशी छात्र भारतीय है।

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