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दाखिले में न हो नाइंसाफी

नर्सरी दाखिले की तारीख तय होने के साथ ही अभिभावकों को आशंका सताने लगी है कि उनके बच्चे कहीं स्कूलों की मनमानी का शिकार न हो जाएं। क्योंकि पिछले साल की तरह ही दाखिले के नियम-कायदे तय करने का जिम्मा स्कूलों पर ही छोड़ दिया गया है। सबको बराबर का मौका मिले इसके लिए सबसे पहले तो एल्युमनी को तरजीह की व्यवस्था खत्म होनी चाहिए।

आरटीई के तहत अभिभावक की योग्यता, रोजगार और आय की जानकारी लेने पर रोक लगने के बाद से स्कूल दाखिले में सबसे ज्यादा खेल एल्युमनी प्वाइंट्स के रूप में ही करते हैं। क्योंकि एल्युमनी के बारे में उनके पास पूरा ब्योरा होता है। जरूरी है कि एल्यूमनी को खत्म किया जाए या इसके प्वाइंट्स कम हों। घर और स्कूल के बीच दूरी की बाधा भी खत्म होनी चाहिए। इसका उपाय है, उन बच्चों को ज्यादा प्वाइंट्स मिलें जिनके अभिभावक उन्हें लाने और ले जाने को तैयार हों। अगर एक सीट पर बच्चों की संख्या ज्यादा हो तो प्वाइंट्स के बाद लॉटरी का सहारा लेना चाहिए।
(जयप्रकाश मिश्र से बातचीत पर आधारित)

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