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‘नीर’ ने लगाया कालिंदी के सौंदर्य को बट्टा

कालिंदी के सौंदर्य में चार चांद लगाने वाली ‘नीर’ की मंद लहरों का दिखना घाटों पर बंद होता जा रहा है। विश्व विख्यात विश्रम घाट पर जलस्तर गिरने से कृष्ण की पटरानी का सौंदर्य ही नहीं, देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था को भी आघात पहुंच रहा है। जबकि घाटों किनाने रोजी कमाने वाले मल्हाओं का रोजगार यमुना की लहरों में सिमटता जा रहा है। वहीं मौसम का रुख देखते हुए यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी कमी आ रही है।

कालिंदी की गोद से कम हुईं लहरें
यमुना का जलस्तर कम हो जाने के कारण कालिंदी का सौंदर्य प्रभावित हो रहा है। कालिंदी की गोद में अठखेलियां करतीं पानी की मंद लहरें दिखाई नहीं दिखाई दे रही हैं। यह सब हुआ है जल का प्रवाह कम हो जाने के कारण। यह हाल खास तौर पर यमुनाजी के विश्रट पर देखने को मिल रहा है। पानी का जलस्तर कम होते ही यहां जमी मात्र सिल्ट दिखाई दे रही है। कृष्ण की पटरानी के सौंदर्य में चार चांद लगाने वाली ‘नीर’ की लहरों का दिखना लगभग सभी घाटों पर कम होता जा रहा है। इन्हीं लहरों से शोभायमान होने वाली यमुना मैया नीरस दिखने लगी है।

विश्व विख्यात है आस्था का प्रमुख केंद्र यमुना
‘यमुना मैया’ देश की प्रमुख नदियों में एक, ब्रजमण्डल से प्रवाहित होते हुए जाने वाली यमुना नदी लोगों की आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र होने के कारण देश नहीं विदेशों में भी बहुचर्चित है। श्रद्धा के वशीभूत यहां सैकड़ों की तादाद में देशी-विदेशी भक्तों का तांता अक्सर देखने को मिलता है। यहां श्रद्धालुओं का आवागमन वर्तमान में भी जारी है। बस श्रद्धालुओं की भावना व्यथित हो रही हैं तो वह यमुना का जलस्तर गिर जाने से यहां पहुंचे श्रद्धालु स्नान कर यमुनाजल का अचमन किए बिना नहीं जाते हैं। जबकि विश्रम घाट जैसे प्रमुख घाटों पर पानी न होने के कारण मात्र सिल्ट दिखाई दे रही है। इससे श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंच रही है।

पिकनिक स्पॉट भी है तरणतारिणी की गोद
तरणतारिणी कही जाने वाली यमुना मैया की गोद आस्था का प्रमुख केंद्र होने के साथ साथ देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए अच्छा खासा पिकनिक स्पॉट भी है। शीत ऋतु का लुत्फ गुनगुनी धूम में यमुना की लहरों के किनारे लेते हुए पर्यटकों को खुब देखा जा सकता है। वहीं यमुना की सैर नाव से कराने को यहां दजर्नों नाविक यात्रियों को स्वयं तरासते देखे जा सकते हैं। ज्यादातर लोग अपनी छुट्टियों को फैमिली के साथ मिलकर यमुना मैया की गोद को पिकनिक स्पॉट की तरह, नाव में सैर करते हैं। यहां के प्रमुख घाटों पर बेहद आकर्षक व रमणीक स्थान देखे जा सकते हैं।

मल्हाओं की आजीविका प्रभावित
मौसम का रुख देखते हुए यमुना किनारे आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कुछ कम भी हुई है। इससे यहां मौजूद दजर्नों मल्हाओं का रोजगार खासा प्रभावित हो रहा है। मौसम का रुख आजकल कुछ नर्म बना हुआ है। प्रात: देर तक सर्दी, फिर जल्द की मौसम का नम हो जाना मल्हाओं की रोजी के आड़े आ रहा है। विश्रम घाट से यात्रियों को यमुना मैया की सैर कराने वाले नाविक मोहनश्याम ने बताया कि यहां करीब 4 दजर्न से अधिक नाविक अपनी-अपनी नावों के साथ रोजगार की तलाश में मुस्तैद रहते हैं। जबकि नाविक कालीचरन के अनुसार सर्दी के कारण अचनाक यहां आने वाले यात्राियों की संख्या में कमी आ गई है। इससे नाविकों को धंध खासा प्रभावित हो रहा है। मल्हा परिवार के यह लोग यमुना किनारे आने वाले श्रद्धालुओं के भरोसे ही अपनी आजीविका चलाते हैं।

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