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अदब का आईना

शहरयार की शायरी का सफर बहुत लंबा है और इस सफर में उन्होंने कई आयाम हासिल किए हैं। किसी भी सियासी सोच से अलहदा रहकर उन्होंने इनसानियत को अपनी शायरी में सबसे ऊंचा मुकाम दिया है। फिर भी बात वो इनसान की ही करते हैं, उसकी खूबियों-ख़ामियों को बहुत गहरे से परखते हुए। पुस्तक में गुलजार के संपादन में संकलित उनकी नज्में और ग़ज़लें इसी सच को कुछ और पुख्ता करती हैं। गुलजार कहते हैं कि शहरयार के यहां भी फै़ज़ और फ़राज़ की तरह का अंदाज है, लेकिन ऐसे जैसे कि कोई कंधे पर हाथ रखकर बात समझा रहा हो, बुलंद परचम फैराते हुए नहीं। शहरयार की शायरी में अगर रूमानियत है तो चौकन्नापन भी है, जो उनके पाठक को सचेत रखता है।
शहरयार सुनो..., संपादक: गुलज़ार, प्रकाशक: भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली-3, मूल्य: 220 रुपए

समूचे लोकजगत पर बात
वरिष्ठ कवि दिनेश कुमार शुक्ल का काव्यालोक बहुत व्यापक है। इसमें लोक से जुड़ी असंख्य धाराओं का समावेश है। खास बात यह है कि अपने कविता जगत में कवि कहीं उग्रता प्रदर्शित न करते हुए भी सामाजिक विसंगतियों पर तीखे प्रहार कर देता है। शुक्ल जी लोकशैली के बेहद करीबी हैं और यह लोकजगत बेशक एक समय गांव-देहात का था, लेकिन आज उसके दायरे में शहर और महानगर भी सिमटे खड़े दिखते हैं। कवि यहां चराचर जगत की विराटता और उसे घेरती जा रही रिक्तता को अपनी चिंता के दायरे में लाता हुआ कई कोणों से सृष्टिविमर्श के विषय में भी उतरता है। कविताएं नए अर्थो के साथ आज की बात करती हैं।
समुद्र में नदी, कवि: दिनेश कुमार शुक्ल, प्रकाशक: भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली-3, मूल्य : 160 रुपए

लेखकीय तिकड़ी
हिन्दी कथा साहित्य में भी विदेशी साहित्य, खेल की दुनिया और अन्य धाराओं की तरह मशहूर तिकड़ियों का बोलबाला रहा है। नई कहानी के कर्णधार यदि मोहन राकेश, कमलेश्वर और राजेंद्र यादव रहे थे, तो उसी समय मन्नू भंडारी, कृष्णा सोबती और उषा प्रियंवदा भी सक्रिय थीं और उन्होंने स्त्री विमर्श के साथ-साथ अनेक सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ कलम चलाई थी। प्रस्तुत पुस्तक में तीनों महिला कथाकारों की रचनाप्रक्रिया का जायज़ा लिया है उन्हीं की एक समकालीन जानी-मानी लेखिका निर्मला जैन ने। पुस्तक दरअसल तीनों लेखिकाओं की संक्षिप्त जीवनी भी है और उनके लेखनकर्म से अवगत कराती है।
कथा-समय में तीन हमसफर, लेखिका: निर्मला जैन, प्रकाशक: राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली-2, मूल्य: 300 रुपए

सफलता के बीजमंत्र
सफल होने के तमाम रहस्यों के पीछे जाहिर है व्यक्तित्व का बहुत बड़ा हाथ होता है। सही सोच और उस पर ठीक समय पर अमल करने ही को सफलता का मूलभूत रहस्य कहा जा सकता है। प्रस्तुत पुस्तक भी कुछ इसी आधार पर कार्य करती है। लेखक ने कुछ मशहूर लोगों की सोच और उनके तेवरों का जायज़ा लिया है और उसके आधार पर अपने निष्कर्ष प्रस्तुत किए हैं। इनसे एकमत होना या न होना पाठक की मर्जी पर निर्भर करता है, लेकिन पुस्तक में कई तथ्य रोचक तरीके से प्रस्तुत किए गए हैं। साथ ही, लेखक ने कुछ प्रचलित दंतकथाओं से भी मुहावरे उठाए हैं।
प्रभावशाली लोगों की 12 आदतें और उनके सफल होने के रहस्य, लेखक: तरुण इंजीनियर, प्रकाशक: डायमंड बुक्स, नईदिल्ली, मूल्य: 250 रुपए संदीप जोशी

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