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क्रिकेट ने हमारी जिंदगी बदल दी

क्रिकेट ने हमारे इतिहास और वर्तमान को किस तरह प्रभावित किया और हमें किस तरह बदला है, इसे क्रिकेट मैदान की तमाम सफलताओं के बीच राहुल द्रविड़ ने बड़ी शिद्दत से महसूस किया है। यही उनके ताजा भाषण का सार भी है।

बहुत से रिकॉर्ड उनके नाम हैं। लोग राहुल द्रविड़ को भारत की दीवार कहते हैं। कई लोग उन्हें ‘मिस्टर रिलायबल’ भी कहते हैं। उनका ताजा रिकॉर्ड है टेस्ट क्रिकेट में 13,000 रन बनाने का। केवल सचिन ही हैं, जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में उनसे ज्यादा रन बनाए हैं। डॉन ब्रेडमैन के बाद राहुल अकेले ऐसे क्रिकेटर हैं, जिनके खाते में इंग्लैंड के खिलाफ तीन या उससे ज्यादा शतक हैं। उन्हें सिर्फ अच्छा खिलाड़ी ही नहीं, थिंकिंग प्लेयर भी माना जाता है। यही वजह है कि पिछले हफ्ते, 14 दिसंबर को कैनबरा के वार मेमोरियल में जब राहुल द्रविड़ ने सर डॉन ब्रेडमैन स्मृति भाषण दिया, तो उसकी चर्चा दुनिया भर में हुई।

क्रिकेट और युद्ध
भाषण की शुरुआत उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों को लेकर की, ‘भारत और ऑस्ट्रेलिया के बारे में जब भी बात होती है, तब कहा जाता है कि दोनों ही देशों को क्रिकेट और नजदीक लेकर आ गया है। आजाद भारत ने अपना पहला क्रिकेट मैच अगर किसी देश के साथ खेला था, तो वह ऑस्ट्रेलिया ही था। आजादी के तीन महीने बाद नवंबर 1947 में खेला गया वह मैच एक तरह का युद्ध था।

लेकिन हम उससे भी कहीं पहले एक साथ जुड़ चुके थे और हम एक-दूसरे के खिलाफ नहीं, साथ-साथ युद्ध भी लड़ चुके हैं। असली युद्ध। गल्लिपोली (वर्तमान में तुर्की) में भारत और ऑस्ट्रेलिया प्रथम विश्व युद्ध के दौरान साथ-साथ लड़े थे। इसमें भारत के 1,300 से ज्यादा जांबाज सैनिक शहीद हुए और ऑस्ट्रेलिया के भी हजारों जवानों ने प्राणों की आहुति दी थी। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया के फौजी साथ-साथ अल अलामीन, उत्तरी अफ्रीका, सीरिया-लेबनान और बर्मा में कंधे से कंधा मिलाकर साथ लड़े थे।’

‘सर डॉन ने भारत के विरुद्ध केवल पांच टेस्ट मैच खेले, 1947-48 में। वह उनका अपने होम ग्राउंड पर अंतिम सीजन था। भारत में तो वह खेले ही नहीं। मेरे देश में क्रिकेट प्रेमियों की एक पीढ़ी है, जो उन्हें ऐसे विलक्षण क्रिकेटर के रूप में जानती है, जो इंग्लैंड के बाहर का था।’

रिकॉर्ड टूटने का विरोध
‘28 जून ,1930 को ब्रेडमैन ने लॉर्डस में इंग्लैंड के खिलाफ 254 रन बनाए थे और यही वह दिन था, जब जवाहरलाल नेहरू को ब्रिटिश पुलिस ने गिरफ्तार किया था। नेहरू हमारी आजादी की लड़ाई के प्रमुख सिपाही थे और आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री बने। ब्रेडमैन का मानना था कि क्रिकेट खिलाड़ी इस महान खेल के ट्रस्टी हैं।

मुझे यह कहते हुए खुशी है कि मैं कुछ बड़ी दिलचस्प बातें सर डॉन से शेयर करता हूं। वह भी मेरी तरह ही तीसरे क्रम के बल्लेबाज थे। यह एक कठिन काम है। हमने यह काम किया। लेकिन उन्होंने इसे ज्यादा सफलता और स्टाइल से किया। ...मैं उनका कायल हूं, जिस कुशलता के साथ वह खेले और जिस गरिमा, सत्यनिष्ठा, साहस व विनम्रता से उन्होंने जिंदगी को जिया। उन्होंने आजीवन विश्वास किया स्वाभिमान, महत्वाकांक्षा, प्रतिबद्धता और प्रतियोगिता की भावना पर।.. वह हमारे बीच से 25 फरवरी, 2001 को चले गए, मुंबई में भारत-ऑस्ट्रेलिया सीरीज शुरू होने के दो दिन पहले।’

क्रिकेट की शिक्षाएं
‘आईपीएल को इसका श्रेय दिया जाना चाहिए कि आज भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी एक ड्रेसिंग रूम शेयर करते हैं। क्रिकेटर के रूप में हम अपने-अपने देश के राजदूत हैं। ...हम वास्तव में एक-दूसरे को समझना, स्वीकारना, सम्मान करना सीख रहे हैं। जब मैंने अंडर-19 मैच न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला था, तब हमारी टीम में दो गेंदबाज थे, जिनमें से एक हिंदीभाषी उत्तर भारत का था और दूसरा केरल का मलयालमभाषी। दोनों एक-दूसरे से बात करने में असमर्थ थे। लेकिन जब मैच हुआ, तब दोनों ने सौ रनों की भागीदारी की। यह सब क्रिकेट जैसे खेल में ही संभव है।’

‘सर डॉन ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स के एक कस्बे से आए थे, वैसे ही हमारे देश के क्रिकेटरों की भी कहानियां हैं। रणजी ट्रॉफी के लिए 27 टीमें खेलती हैं। जहीर खान महाराष्ट्र के जिस कस्बे से आते हैं, वहां सलीके का एक मैदान तक नहीं है। गुजरात का एक 17 साल का युवक भारत का सबसे तेज गेंदबाज बना है। मुनफ पटेल के टीम में आने के बाद उनके गांव और रेलवे स्टेशन के बीच की सड़क सुधर गई, क्योंकि सैकड़ों पत्रकार उनसे मिलने जाते रहते हैं। क्रिकेट के कारण उमेश यादव ने पुलिस में भर्ती होने का अपना सपना छोड़ा। विरेंदर सहवाग प्रैक्टिस के लिए रोजाना 84 किलोमीटर का सफर बस से करते थे। भारत के हर क्रिकेटर की एक कहानी है। भारतीय क्रिकेट की आत्मा और हृदय की कहानी।’

क्रिकेट के नए रूप
‘क्रिकेट ने हमारी जिंदगी बदल दी है। हम जीतें या ना जीत पाएं, जनता हमारे लिए दुआ मांगती है। हमें देखकर मुस्कुराती है, हाथ हिलाती है। क्रिकेट हमारे लिए रोजी-रोटी नहीं, एक वरदान है। इसके बिना हम एक मामूली इंसान हैं। हमें इस मौके पर पुनरावलोकन भी करना चाहिए। मैंने पिछले महीनों में एक भारतीय मैच में स्टैंड में कई सीटें खाली पाईं। यह एक चेतावनी भी है। 1981 से अब तक भारत 227 वनडे इंटरनेशनल खेल चुका है।

हमें नहीं भूलना चाहिए कि आखिर हम हैं तो परफॉर्मर, एंटरटेनर, क्रिकेटर और हमें अपने दर्शकों से प्यार है। ऑस्ट्रेलिया या इंग्लैंड की तरह हमारे यहां और कोई खेल नहीं है ,जो इतनी कमाई कर पाए। अब टेस्ट मैच, वनडे और 20-ट्वंटी में तालमेल बिठाकर खेल को आगे बढ़ाना चाहिए। हमें मूल क्रिकेट और उसकी भावना को बचाकर रखने की कोशिश करनी चाहिए। क्रिकेट की तीनों विधाओं के लिए अलग-अलग कौशल की जरूरत पड़ती है। टेस्ट क्रिकेट वह पद्धति है, जिसे क्रिकेटर खेलना चाहते हैं। वनडे तीन दशकों से रेवेन्यू का एक अच्छा माध्यम है और अब 20-ट्वंटी नए रूप में आ चुका है, इसे दर्शक देखना चाहते हैं।’ 
प्रकाश हिन्दुस्तानी

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