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उफान पर है मुद्दा भ्रष्टाचार

इन दिनों भ्रष्टाचार एक हॉट केक बना हुआ है। राजनीति से लेकर समाज और बाजार से लेकर व्यवहार तक तमाम चीजों में यह समाता जा रहा है। इसीलिए एंटरटेन्मेंट इंडस्ट्री भी इसे कैश करने में लगी हैं। फिल्मों के बाद अब टीवी पर भी करप्शन थीम पर दो-दो शोज आने वाले हैं। स्टार प्लस मेगा प्रोजेक्ट के रूप में एक नये शो में सांची को तो दूसरे शो सच का सामना में राजीव खंडेलवाल को भ्रष्टाचार से लड़ते हुए दिखाने जा रहा है। 

वैसे तो भ्रष्टाचार हमेशा से मुख्य मुद्दा रहा है, लेकिन जब से समाजैसेवी अन्ना हजारे इसके विरोध में खड़े हुए हैं तब से भ्रष्टाचार पर हर किसी की नजर झट से पड़ती है। अब भ्रष्टाचार के इस विषय को छोटा पर्दा भी अपना हिस्सा बनाने जा रहा है। इस बार रियेलिटी शो सच का सामना में भी मुख्य विषय के तौर पर भ्रष्टाचार को शामिल किया गया है। और जल्द ही शुरू होने वाले एक नए धारावाहिक रुक जाना नहीं..में सांची भी दर्शकों को भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ते हुए दिखाई देने वाली है। इसके प्रोमो छोटे पर्दे पर शुरू भी हो चुके हैं।

इस शो में सांची यानी अभिनेत्री पूजा शर्मा को कभी सीनियर सिटीजन्स की मदद करते हुए दिखाया जाएगा तो कभी कॉलेज में पढ़ाने वाले शिक्षक किस प्रकार से छात्रों को अपने कोचिंग क्लासेज में आने के लिए बाध्य करते है, ये दिखाया जाएगा। एक प्रोमो में तो यह भी दिखाया गया है कि किस तरह वो कॉलेज के एक मजनू को सबक सिखाती है। जिसे देखकर लगता है कि अब बदलाव का समय आ रहा है फिर चाहे वो छोटे पर्दे पर विषयों का बदलाव हो या फिर समाज के अंदर का बदलाव।

अब धारावाहिक मर्यादा को ही ले लीजिए इसकी थीम में भी भ्रष्टाचार है। जहां पर तीन अलग-अलग महिलाएं अपने हक और अधिकार के लिए लड़ रही हैं क्योंकि अब उनकी सहनशीलता समाप्त हो गई है। एक सास और दो बहुओं वाले इस सीरियल में तीनों ही अपने आप को असहाय पाती हैं और उनके खिलाफ साजिश रचने वाला शख्स उनके ही परिवार का मुखिया है। मुखिया को उसके गलत इरादों के खिलाफ रोकने की जब हर कोशिश नाकमयाब हो जाती है तो उन्हें अपने परिवार के मुखिया के खिलाफ जाने के अलावा और कोई रास्ता नहीं दिखाई देता।

अंत में वो सभी मिलकर तय करती हैं कि वो उस इंसान के खिलाफ सच के लिए लड़ेंगी। जब बदलाव की बात करें तो वो प्रतिज्ञा के बिना अधूरा सा लगता है। प्रतिज्ञा यानी एक ऐसी लड़की जो हमेशा सच के लिए लड़ती है और गलत को रोकने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देती है। इसमें उसे कभी कामयाबी मिलती है तो कभी नाकामयाबी। लेकिन वो हार नहीं मानती है।

हाल ही में शुरू एक नए धारावाहिक 'हिटलर दीदी' में दिखाया जा रहा है कि किस प्रकार इंदिरा अपने पिता के घर छोड़कर चले जाने के बाद अपने पूरे परिवार की जिम्मेदारी उठाती है। दरअसल हमेशा से ही छोटे पर्दे पर मुख्य किरदार महिलाएं ही रही हैं और इन्हीं महिला किरदारों के साथ छोटा पर्दा खुद को बदलता जा रहा है।
कभी अपने परिवार के खातिर किसी भी हद तक जाने वाली औरत का किरदार हो या फिर अपने बच्चों के खातिर पति से लेकर समाज तक सभी का अत्याचार बर्दाश्त करने वाली औरत हो या फिर समाज को नई दिशा दिखाने वाली एक ऐसी औरत जो दूसरों के लिए भी एक आदर्श बन सकती है।

वैसे अगर दर्शकों की बात करें तो वो आजकल ऐसे धारावाहिकों को देखना पसंद करते हैं जिससे वो खुद को जोड़ सके। भ्रष्टाचार इन दिनों राजनीति से लेकर समाज और बाजार से लेकर व्यवहार सबमें समान रूप से समा गया है इसीलिए इन दिनों यह भी हॉट सब्जेक्ट बना हुआ है, यही वजह है कि छोटा पर्दा भी हालात के चलन की चाल के साथ चलने लगा है। वैसे ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है जब भ्रष्टाचार या समाज में फैली कुरीतियों का आधार बनाकर धारावाहिक लिखे जा रहे हों। केवल फर्क है तो वो बस इतना कि पहले जहां ये विषय कहानी के एक हिस्से के रूप में होते थे वहीं अब कहानी इनके इर्दगिर्द घूम रही है।

दरअसल छोटे पर्दे की जबसे शुरुआत हुई है तब से हमेशा उसमें बदलाव होते रहे हैं जो कहीं न कहीं उस वक्त की घटनाओं से प्रेरित भी रहे हैं।  यही वजह है कि अब भ्रष्टाचार का मुद्दा छोटे पर्दे के माध्यम से लोगों के लिविंग रूम और बेडरूम के जरिए भी जगह बनाने की तैयारी कर रहा है।   

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  • Web Title:उफान पर है मुद्दा भ्रष्टाचार