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पप्पू कान्ट डांस साला

इस फिल्म का नाम चौंकाता है और वर्ष 2008 में आयी फिल्म ‘जाने तू या जाने ना’ के हिट गीत पप्पू कान्ट डांस साला... की याद भी दिलाता है। लेकिन फिल्म की शुरुआत के 20 मिनट बाद ही ये साफ होने लगता है कि उस गीत के टाइटल को महज ध्यान आकर्षित करने के लिए इस फिल्म के साथ जोड़ा गया है।

निर्देशक सौरभ शुक्ला पिछले साल फिल्म ‘रात गयी बात गयी’ लेकर आये थे, जिसमें उन्होंने अंग्रेजीदां लोगों के हैंगओवर के बीच रिश्तों की अच्छी खासी धज्जियां उड़ाई थीं। उस फिल्म में उनका मकसद साफ नजर आता था, लेकिन ‘पप्पू कान्ट डांस साला’ में वह कई सारी बातें एक साथ करना चाहते हैं। उन्हें छोटे और बड़े शहरों के बीच के फर्क को भी दिखाना है। मुंबई जैसे बड़े शहर में बनारस के एक सीधे-साधे व्यक्ति की संघर्षरत जिंदगी भी दिखानी है और दो अलग-अलग मिजाज वाले लोगों के बीच एक प्रेम कहानी को भी जन्म देना है। बस, कन्फ्यूजन की स्थिति यहीं से शुरू होने लगती है।

विद्याधर आचार्य (विनय पाठक) एक मेडिकल रिप्रजेन्टेटिव हैं और अपने फ्लैट के सामने रहने वाली महक मलवाडे (नेहा धूपिया) की बिंदास जीवनशैली से परेशान। महक का आये दिन देर रात तक पार्टीज करना उन्हें नहीं सुहाता। हद तो तब हो जाती है जब एक दिन महक उनके घर में कब्जा जमा लेती है। लाख न चाहते हुए भी विद्याधर को उसे अपने घर में रखना पड़ता है। दोनों के बीच नोक-झोंक बढ़ने लगती है और धीरे-धीरे प्यार भी। यही प्यार विद्याधर की बड़े शहरों में रहने वाले लोगों की जीवनशैली के प्रति सोच को भी बदल देता है।

एक-दूजे से लड़ना और फिर बाद में प्रेम करने लगना, छोटे-बड़े शहर के रहन-सहन में फर्क आदि को लेकर पहले भी कई फिल्में बन चुकी हैं। लेकिन ‘पप्पू कान्ट डांस साला’ को उन तमाम फिल्मों से अलग करने में निर्देशक का न केवल शोध अकाल से प्रभावित दिखता है, बल्कि दो शब्दों में अपनी बात कह जाने की कला का भी घोर अकाल दिखता है।

फिल्म के दो अहम सीन्स, जिनमें से एक में विद्याधर महक के लिए सैनेट्री नैपकिन लेकर आता है और दूसरा, जिसमें महक का कोरियोग्राफर (रजत कपूर) डांसर को उनके अपर व लोअर उतारकर डांस करने को कहता है, तुक से परे लगते हैं। पहले सीन में विद्याधर का प्रयास महक को पसंद आया या नापसंद, इसे कहीं किसी एंगल से साफ नहीं किया गया और दूसरे सीन में कोरियोग्राफर को ऐसा कहने की जरूरत क्यों पड़ी, इसका खुलासा नहीं किया गया है, जबकि जिस वीडियो में महक काम कर रही थी, उसमें एक्सपोजर की गुंजाइश दूर-दूर तक दिखाई नहीं पड़ती।

अभिनय की बात करें तो विनय पाठक इस तरह की भूमिकाएं कई बार कर चुके हैं। ऐसे रोल्स कर करके वह अब टाइप्ड होते जा रहे हैं। वह किस सीन में कैसे रिएक्ट करेंगे और किस संवाद को कैसे बोलेंगे, इसका अंदाजा लगाना सहज है। ठीक इसी तरह नेहा धूपिया भी ऐसे रोल्स पहले भी कर चुकी हैं। फिल्म ‘एक चालीस की लास्ट लोकल’ इसका अच्छा अदाहरण है और इस फिल्म में वह अपने रोल के मुताबिक जरा भी ग्लैमरस नहीं लगी हैं। रजत कपूर इस रोल के लिए बिल्कुल मिसफिट थे। हां, इस फिल्म का एक रोचक पहलू है नसीर साहब का छोटा सा रोल और इस फिल्म का देसी संगीत जो फिल्म के कुछेक हिस्सों में सुकून देता है।

सितारे: विनय पाठक, नेहा धूपिया, रजत कपूर, नसीरुद्दीन शाह, सौरभ शुक्ला और संजय मिश्र
निर्देशक एवं लेखक: सौरभ शुक्ला
निर्माता: रविन्द्र सिंह और समीर नायर
गीत: अमिताभ भट्टाचार्य और सौरभ शुक्ला
संगीत: मल्हार पाटेकर

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  • Web Title:पप्पू कान्ट डांस साला