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ग्रामीण इलाकों में फिर बनेंगे स्क्रू पाइल पुल

पटना। हिन्दुस्तान ब्यूरो। सूबे के ग्रामीण इलाकों में अब फिर से स्क्रू पाइल पुल बन सकेंगे। अपने कम संसाधनों को देख ग्रामीण कार्य विभाग ऐसे पुल-पुलियों के निर्माण पर फिर से विचार कर रहा है। सीमेन्ट (आरसीसी) पुल की तुलना में ये पुल जल्दी और कम लागत में बनते हैं। कई विधायकों ने ग्रामीण कार्य विभाग से इस संबंध में आग्रह भी किया है। ग्रामीण कार्य मंत्री डॉ. भीम सिंह ने सीमेन्ट पुल और स्क्रू पाइल पुलों के तुलनात्मक अध्ययन के लिए 21 दिसम्बर को एक महत्वपूर्ण बैठक बुलायी है।

बैठक में पथ निर्माण और ग्रामीण कार्य विभाग के आला अधिकारियों के साथ विधायक छोटे लाल राय, विजय कुमार मिश्र, सबा जफर आदि विधायक भी उपस्थित रहेंगे। इसके पूर्व मंत्री के निर्देश पर किये गये प्रारंभिक स्तर के अध्ययन में विभाग ने माना है कि सीमेन्ट पुलों की तुलना में स्क्रू पाइल पुल-पुलियों की निर्माण लगात न्यूनतम 25 फीसदी कम हो सकती है। इनके निर्माण में समय भी कम लगेगा।ग्रामीण सड़कों पर सामान्यतया 10 से लेकर 50 मीटर लम्बाई वाले ही पुल बनते हैं।

इन पर भारी वाहनों का दबाव भी कम होता है। अब भी अंग्रेजी शासन काल के बने हजारों स्क्रू पाइल पुल ऐसे हैं, जिनपर आवागमन जारी है। फिलहाल प्रदेश की 88 हजार किमी. ग्रामीण सड़कों में 50 हजार किमी. ग्रामीण सड़कों का निर्माण होना है।

अब तक करीब 20 हजार किमी. ग्रामीण सड़कें बनी हैं और करीब 18 हजार किमी. निर्माणाधीन है। ऐसे में दो किमी. पर औसतन एक पुल या पुलिया की आवश्यकता को मान कर चलें तो अब भी 25 हजार की जरूरत है। फिलहाल ग्रामीण कार्य विभाग का संसाधन सीमित है। ‘ राज्य में दशकों से चालू वर्तमान स्क्रू पाइल पुलों के अनुभव और जनप्रतिनिधियों के सुझाव पर विभाग ने स्क्रू पाइल पुलों के निर्माण को लेकर महत्वपूर्ण बैठक बुलायी है। ’ ग्रामीण कार्य मंत्री: डा. भीम सिंह

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