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पावर इंजीनियर्स सर्विस एसो. ने मोर्चा खोला

रांची। झारखंड पावर इंजीनियर्स सर्विस एसोसिएशन ने बिजली बोर्ड प्रबंधन के खिलाफ मोरचा खोल दिया है। आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। बिजली बोर्ड के 400 इंजीनियर 16 और 17 दिसंबर को काला-बिल्ला लगाकर काम करेंगे। 19 दिसंबर से सभी अभियंता वर्क टू रूल पर चले जाएंगे। 22 दिसंबर से बोर्ड मुख्यालय के समीप आमरण अनशन होगा। यह जानकारी एसोसिएशन के महासचिव एमपी यादव ने प्रेस कॉफ्रेंस में दी।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2002 में उच्च न्यायालय ने आदेश दिया था कि बोर्ड में सेवानिवृत या अन्य संस्थानों के अभियंता का पदस्थापन नहीं किया जाएगा, पर बोर्ड में एनटीपीसी के डीजीएम एमसी कर्ण को जीएम आरएपीडीआरपी और बीएस झा को मुख्य अभियंता (संचरण) का पद दिया गया है। इन्हें नहीं हटाया गया, तो एसोसिएशन बोर्ड के खिलाफ अवमाननावाद दायर करेगा। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षो से किसी भी अभियंता को एमएसीपी का लाभ नहीं दिया गया है। अगर बोर्ड प्रबंधन दंडात्मक कार्रवाई करता है, तो अभियंता लाइटेनिंग हड़ताल पर चले जाएंगे। इस संबंध में बोर्ड को कानूनी नोटिस भी दे दिया गया है।

परिवहन निगम की घोषणा पर अब तक अमल नहीं

रांची। राज्य सृजन के 11 साल के बाद भी परिवहन निगम का गठन नहीं हो पाया। खास बात यह है कि परिवहन विभाग के प्रथम मंत्री सधनु भगत के अलावा सभी मंत्रियों ने निगम के गठन की वकालत की थी। माधवलाल सिंह और एनोस एक्का के बाद वर्तमान मंत्री चंपई सोरेन ने निगम के गठन की स्पष्ट घोषणा की थी। बावजूद इसके सरकारी अफसर निगम के गठन का विरोध करते आये हैं। 2009 में जब बिहार राज्य पथ परिवहन निगम का अंतिम रूप से बंटवारा हो गया, तब, निगम और प्राप्त कर्मियों के अस्तित्व का भविष्य तय करने के लिए तत्कालीन राजस्व पर्षद के सदस्य एके चुघ की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया।

आज तक यह कमेटी रिपोर्ट नहीं दे पाई। अब परिवहन कमिश्नर की अध्यक्षता में कमेटी के गठन का प्रस्ताव तैयार कर मंजूरी के लिए मंत्री के पास भेजा गया है। अब सवाल यह है कि एक वरीय अधिकारी की अध्यक्षता में उसी कार्य के लिए गठित कमेटी के रहते कनीय अधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी का गठन करना कहा तक उचित है। निगम के गठन नहीं होने से राज्य के गरीबों और सुदूरवर्ती इलाके को सस्ती परिवहन सुविधा नहीं मिल पा रही है।

साथ ही राज्य सरकार के कर्मियों को छठा वेतनमान मिल रहा है, जबकि परिवहन विभाग द्वारा संचालित बस डिपो के कर्मियों को अब तक चौथा वेतनमान मिल रहा है। 2009 तक ये कर्मी बिहार में थे। पांचवां वेतनमान बिहार सरकार को लागू करना था। अब यह एरियर कौन देगा यहीं मामला फंसा हुआ है।

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