DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

नर्सिगहोम संचालक ने 17 घंटे तक ‘बंधक’ बनाए दो शव

हापुड़ रोड पर गुरुवार रात में हुई दुघर्टना के बाद घायलों को पुलिस ने जगदंबा नर्सिगहोम में भर्ती कराया था, जिसमें गाड़ी के ड्राइवर और उसके बेटे की उपचार के दौरान मौत हो गई थी, जबकि पांच घायल यहां भर्ती थे। नर्सिगहोम संचालक ने उन पर इलाज का 86 हजार रुपये का बिल बैठा दिया। बिल अदा न करने पर नसिर्ंगहोम संचालक ने दो शवों को 17 घंटे तक ‘बंधक’ बनाए रखा। परिजनों के हंगामे के बाद पुलिस ने शव को मोर्चरी भेजा है। अब पुलिस घायलों के परिजनों पर पैसा देने का दबाव बना रही है।

गुरुवार रात को हापुड़ रोड पर मीट से भरे ट्रक से पावर कारपोरेशन के महाप्रबंधक की अंबेसडर कार को मीट से भरे एक ट्रक ने सामने से टक्कर मार दी थी, जिसमें ड्राइवर मोहन सिंह, उसकी पत्नी ममता और बच्चे सागर की मौत हो गई थी। जबकि बोबी, ओमवती, मोहित, राजा और मोंटू को पुलिस ने हापुड़ रोड स्थित जगदंबा नर्सिगहोम में भर्ती कराया था, जहां मोहन सिंह और उसके बेटे सागर की उपचार के दौरान मौत हो गई थी। परिजनों ने उसके शव लेने के लिए नर्सिगहोम प्रशासन से अनुरोध किया, लेकिन 86 हजार के बिल की अदायगी नहीं होने पर शवों को उन्हें नहीं दिया गया। साथ ही तमाम घायलों को मेडिकल कॉलेज रेफर कराने से इंकार कर दिया। रात में हुए दुघर्टना के बाद दिन में मृतकों के परिजनों ने हापुड़ रोड जाम करने के बाद हंगामा कर दिया। पुलिस ने मौके पर आकर शवों को तो मोर्चरी भेज दिया, लेकिन घायलों को वहां से रेफर नहीं कराया जा सका। दूसरी ओर, परिजनों ने आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई है।

क्या हो पाएगा इस सहायता राशि से
मेरठ। मृतक मोहन सिंह की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। वह पावर कारपोरेशन के जीएम आरपी सिंह की गाड़ी का ड्राइवर था। जीएम ने सहायता के नाम पर सिर्फ एक हजार रुपये दिए हैं। जबकि, घायल बोबी एसडीओ दिनेश अग्रवाल की गाड़ी का ड्राइवर था, उन्होंने 20 हजार रुपये सहायता दी है। नर्सिगहोम प्रशासन ने घायलों को रेफर करने से पहले बकाया अदा करने की जिद कर रखी है। इन गरीबों की सहायता के लिए कोई बसपा नेता भी सामने नहीं आया। अब घायल नर्सिगहोम में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।

पुलिस ने नहीं पकड़ा मीट के ट्रक का मालिक
मेरठ। जिस मीट से भरे ट्रक ने अंबेसडर कार को टक्कर मारी है। वह ट्रक एक मीट व्यवसायी का है। पुलिस ने मीट व्यवसायी से गरीबों के इलाज का पैसा दिलाने के बजाय ट्रक चालक पर मेहरबानी कर दी है। पुलिस ट्रक के ड्राइवर और मालिक को अभी तक नहीं पकड़ा है।
---
 देखिए नर्सिगहोम प्रशासन ने इलाज का पैसा मांगा है। इलाज का पैसा तो देना होगा। पुलिस मीट से भरे ट्रक के मालिक को पकड़ने के लिए दबिश दे रही है। जल्द उसे गिरफ्तार कर दिया जाएगा।
सुधीर कुमार सिंह, एसपी देहात

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:नर्सिगहोम संचालक ने 17 घंटे तक ‘बंधक’ बनाए दो शव