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पुलिस की गलत जांच ने उजाड़ दिया परिवार

परतापुर पुलिस ने अच्छरौंडा गांव के लियाकत को एक बच्चे के अपहरण और हत्या के झूठे मामले में पत्नी समेत जेल भेज दिया था, जब बच्चा बरामद हुआ तो उसने बयान में कहा कि मां से नाराज होकर वह हरिद्वार चला गया था, जहां एक किसान के यहां नौकरी करने लगा था। इस झूठे मामले में लियायत एक वर्ष बाद जेल से जमानत पर आया है। इस मुकदमे के कारण लियाकत को अपनी तमाम प्रॉपर्टी बेचनी पड़ी, जिससे ये हालात बने कि उसके बच्चे भुखमरी की कगार पर पहुंच गए।

मेरठ की परतापुर पुलिस की एक गलत जांच ने पूरा परिवार ही उजाड़ दिया। मामला अच्छरौंडा गांव का हैं। 24 जनवरी 2010 को अच्छरौंडा गांव के प्रेमवीर का 13 वर्षीय बेटा रवि अपनी मां से नाराज होकर घर से भाग गया था, जो दिल्ली स्टेशन पर पहुंच गया था। यहां रवि की मुलाकात नीरज पुत्र नवाब से हुई। इसके बाद नीरज रवि को अपने रिश्तेदार आजाद निवासी झबरेड़ा, हरिद्वार के घर छोड़ आया था, जहां वह खेती का काम करने लगा था।

दूसरी ओर, प्रेमवीर ने बच्चे के अपहरण और हत्या का मामला गांव निवासी ठेकेदार लियाकत और उसकी पत्नी हामिदा के खिलाफ दर्ज करा दिया था। पुलिस की जांच में भी लियाकत को दोषी मान लिया गया। लियाकत का आरोप है कि उसे बचाने के नाम पर पुलिस ने उससे दो लाख रुपये ले लिए और फिर भी उसे और उसकी पत्नी को जेल भेज दिया।

अब एक वर्ष बाद लियाकत जेल से 14 दिसंबर को जमानत पर छूटा है। उधर, लापता हुआ बच्चा भी अच्छरौंडा गांव वापस आ गया है। रवि ने पुलिस को बयान दिया कि वह अपनी मां निर्मला से गुस्सा होकर घर से चला गया था। उसे दिल्ली रेलवे स्टेशन से आनंदी गांव निवासी नीरज, अपने रिश्तेदार आजाद के यहां छोड़ गया था। इसके बाद लियाकत ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को अपनी व्यथा भेजी है, जिस पर आयोग ने प्रदेश के डीजीपी से इस मामले में जवाब मांगा है।

बच्चों को मांगनी पड़ी भीख
तमाम संपत्ति बेचकर लगा दी जान बचाने में
मेरठ। लियाकत ठेकेदार का काम करता था। उसके पास दो ट्रैक्टर ट्राली थी, एक प्लाट भी था। जेल से बचने के लिए उसने पहले पुलिस और बाद में कोर्ट-कचहरी में बेइंतिहा रुपया खर्च किया। इस चक्कर में उसके परिवार को तमाम संपत्ति बेचनी पड़ी। हालत ऐसे बन गए कि उसके चार बच्चे भीख मांगने तक के लिए मजबूर हो गए।
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पुलिस की गलत जांच के कारण लियाकत का परिवार उजड़ गया। अगर पुलिस जांच सही तरीके से करती तो उसे जेल न जाना पड़ता। रवि के वापस आने के बावजूद पुलिस ने अपनी रिपोर्ट सही समय पर न्यायालय को नहीं दी। अब पुलिस के खिलाफ कोर्ट में एक याचिका दायर करूंगा।
रामकुमार गुजर्र, अधिवक्ता

अगर ऐसा मामला हुआ है तो शिकायत आने पर परतापुर पुलिस के खिलाफ जांच होगी। जो पुलिसकर्मी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
प्रेमप्रकाश, डीआईजी मेरठ

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