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मैं ऐसा ही हूं, इस उम्र में नहीं बदल सकता

मेरी पड़ोसी रीता देवी वर्मा ने मुझे एक फुटा लैंप दिया। उसके चारों ओर शीशा लगा हुआ है। उसके भीतर मोम का दीया है। अब वह चारों ओर से बंद है। इसलिए उसकी लौ सीधी रहती है। कभी-कभी हौले से हिलती है। फिर ठहर जाती है।

मैं जब शाम में अकेला होता हूं, तो घंटों उस पर टकटकी लगाए रहता हूं। उससे मेरे दिल को तसल्ली और शांति मिलती है। मुझे बताया गया है कि यह ध्यान का एक तरीका है। लेकिन मेरा दिमाग तो ठहरता ही नहीं है। उसके उलट वह कुछ ज्यादा ही काम करता है।

मैं 98 के आस-पास हूं। अब मुझे बहुत आगे नहीं देखना है। लेकिन मैं उन 98 सालों को याद तो कर ही सकता हूं। सो, मैं अपनी कामयाबी और नाकामयाबी का लेखा-जोखा करने बैठ जाता हूं। कामयाबी के लिहाज से मेरी लिखी हुई करीब 80 किताबें हैं। उनमें उपन्यास, कहानियां, जीवनी, इतिहास, पंजाबी और उर्दू से अनुवाद व लेख वगैरह शामिल हैं। मुझे सुकून इस बात से होता है कि कुछ लोग उन्हें पढ़ने लायक मानते हैं।

नाकामायाबी शायद मेरे चरित्र से जुड़ी है। मैं इस दुखद सच्चाई पर पहुंचा हूं कि हमेशा से थोड़ा-बहुत लंपट रहा हूं। अपनी चार साल की उम्र से लेकर आज तक यह लंपटता ही मुझ पर हावी रही है। मैं कभी हिन्दुस्तानी तहजीब के लिहाज से औरतों को नहीं देख सका। मसलन, मां या बहन या बेटी के तौर पर। मुझे तो किसी भी उम्र की औरत लुभाती रही है। और मैं वह आदमी हूं, जो अपनी ही निगाहों में गिरा रहा है। अब चाहे जो भी कहो, यही मेरे बारे में सच है।

सांप ही इलाज
एक उत्तर प्रदेशी ने भ्रष्टाचार से निपटने का एक नायाब तरीका खोज निकाला है। मुझे लगता है कि वह सड़कों पर प्रदर्शन करने या संसद में नया कानून बनाने से बेहतर हो सकता है। अब जब भी कोई क्लर्क या थानेदार या मजिस्ट्रेट या जज आपसे घूस मांगे, तो उसके ऑफिस में सांप छोड़ देने चाहिए। मेरा मानना है कि वह बेहद कारगर होगा। बस हम उसे कायदे से करें।

कुछ दुकानें होनी चाहिए, जहां सांप वाजिब दाम पर मिल सकें। हमें सांप को संभालने वाले भी चाहिए। ऐसे लोग जो दुकानों से सांपों को लाकर भ्रष्ट अधिकारियों के ऑफिस में छोड़ सकें। और उन सांपों को काम हो जाने के बाद वापस छोड़ दें। यानी जब अधिकारी शपथ ले लें कि अब घूस नहीं लेंगे, तब उनका सांपों से पीछा छुड़ाया जाए। हमें अब ऊपर की आमदनी से छुटकारा पा ही लेना चाहिए। और उस छुटकारे के लिए सांपों का इस्तेमाल कमाल कर सकता है। अगर सांप खतरनाक हों, तो बिच्छुओं का भी इस्तेमाल हो सकता है।

संता की परेशानी
संता परेशान था, ‘जब मैं छोटा था, तो ‘होमो’ होना जुर्म था। बड़े होने पर उसे ठीक मान लिया गया। अब वह कानूनन सही है। उसे कंपलसरी किया जाए, उससे पहले मुझे देश छोड़ देना चाहिए।’
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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