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यहां की सर्दी है निराली : पूनम भगत

जानीमानी फैशन डिजाइनर पूनम भगत को दिल्ली की सर्दी बहुत पसंद आती है। यहां की सांस्कृतिक गतिविधियां भी पूनम को बहुत पसंद हैं, लेकिन दिखावा करने वाले लोग उन्हें पसंद नहीं आते। सत्यसिंधु ने जानी पूनम से दिल्ली के बारे में उनकी पसंद-नापसंद

दिल्ली आपको कैसी लगती है?
दिल्ली के कई चेहरे हैं, कई रूप हैं। कई अच्छे रूप भी हैं और कई बुरे भी। गर्मियों के मौसम में दिल्ली का चेहरा जैसा होता है उससे बिल्कुल उलट सर्दियों के मौसम में होता है। गर्मी में दिल्ली में रहने की मजबूरी होती है जबकि सर्दी के मौसम में दिल्ली बहुत अच्छी लगती है। इस मौसम में दिल्ली में सांस्कृतिक गतिविधियां भी काफी बढ़ जाती हैं और खुशनुमा मौसम होने के कारण कहीं आना-जाना भी अच्छा लगता है। मंडी हाउस और इंडिया हैबिटेट सेंटर तो ऐसे मौकों के लिए खास हैं ही।

दिल्ली से आपका रिश्ता कब और कैसे जुड़ा?
पहली बार मैं तब दिल्ली आई थी जब छह साल की थी। उसके बाद लगातार यहीं रह रही हूं। यहां मेरे अपने हैं, दोस्त हैं, मेरा व्यवसाय है। यूं कहें कि दिल्ली में मेरी पूरी दुनिया है। पहले सेंट्रल दिल्ली में बाबर रोड पर रहती थी, अब दक्षिणी दिल्ली में आ गई हूं। लेकिन मुझे पूरी दिल्ली के विविधतापूर्ण रंग अच्छे लगते हैं।

यहां की कोई ऐसी बात जिसे मित्रों के बीच बड़े गर्व के साथ शेयर करती हैं?
यहां के सांस्कृतिक जीवन और सांस्कृतिक गतिविधियों को नहीं भूला जा सकता। देशभर के लोग यहां के सांस्कृतिक जीवन को विविधताओं से भरते हैं। वहीं मंडी हाउस क्षेत्र में स्थित सांस्कृतिक केन्द्र और इंडिया हैबिटेट सेंटर की सांस्कृतिक गतिविधियां बाहर से आने वालों को भी पहली ही नजर में पसंद आ जाती हैं।

तब का सांस्कृतिक माहौल कैसा होता था और आज उसमें क्या बदलाव पाती हैं?
तब गिनती के सांस्कृतिक केन्द्र थे और गिनती की सांस्कृतिक गतिविधियां थीं। मंडी हाउस में श्रीराम सेंटर, कमानी, त्रिवेणी आदि केन्द्र तो पहले से हैं लेकिन पहले कार्यक्रम भी आज की तुलना में बहुत कम होते थे। अब तो दिल्ली में हर रोज कई-कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। चाहे मंडी हाउस चले जाएं या हैबिटेट सेंटर या सीरी फोर्ट ऑडिटोरियम, हर जगह कोई न कोई कार्यक्रम चल रहा होता है। कार्यक्रम बढ़ गए हैं और इसके साथ ही कलाकारों और कला प्रेमियों के लिए मौके भी बढ़ गए हैं।

दिल्ली की नाइट लाइफ को आपने करीब से देखा है। इसे कितना सुरक्षित पाती हैं?
मैं ज्यादा क्लब आदि में नहीं जाती हूं लेकिन शोज के लिए नाइट लाइफ का हिस्सा बनना पड़ता है। लेकिन मेरे अनुभव अच्छे रहे हैं। इसका मतलब यह भी नहीं मान सकते कि दिल्ली की नाइटलाइफ सुरक्षित है। अखबारों में, समाचार चैनलों पर जो खबरें आती हैं उससे पता चलता है कि यहां कि नाइट लाइफ सुरक्षित नहीं है। ऐसे में पूरी सावधानी बरतनी जरूरी हो जाती है।

दिल्ली में बिताए इन वर्षों में आप खुद में क्या-क्या बदलाव पाती हैं?
जब सफलता मिलती है और आगे बढ़ते हैं तो जीवन में बदलाव तो आता ही है। पढ़ाई-लिखाई के बाद फैशन के क्षेत्र में कारोबार, ताइका को लोकप्रिय बनाने का प्रयास, नए-नए लोगों से मुलाकात, कारोबारी प्रतिद्वंद्विता ये सब चीजें बहुत कुछ सिखाती हैं और जीवन को देखने का नजरिया भी बदलता ही है। इस तरह देखें तो जीवन में काफी कुछ बदल चुका है लेकिन खुशी की बात है कि बदलाव काफी अच्छे रहे हैं।

यहां की कौन सी बातें पसंद नहीं है?
यहां के लोग बड़े एग्रेसिव हैं। वे दिखावा पसंद करते हैं। यहां भीड़ काफी बढ़ गई है, प्रदूषण काफी बढ़ गया है। ट्रैफिक की हालत हमेशा ही खराब रहती है। हम अपने शहर का, लोगों का खयाल भी नहीं करते। मुझे इस तरह की बातें बेहद परेशान करती हैं।

दिल्ली की कौन-कौन सी जगहें हैं जिन्हें आप मिस करती हैं और समय मिले तो वहां जाना पसंद करेंगी?
यूं तो यहां कई जगहें पसंद हैं लेकिन कनॉट प्लेस क्षेत्र और मंडी हाउस विशेष पसंद हैं। कनॉट प्लेस के बाजार और मंडी हाउस के सांस्कृतिक केन्द्र मुझे बेहद पसंद हैं। वक्त मिले तो मंडी हाउस में नाटक देखना, नृत्य-संगीत के कार्यक्रम देखना मुझे अच्छा लगता है। खासकर कमानी ऑडिटोरियम और श्रीराम सेंटर ऑडिटोरियम में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम देखना बहुत पसंद है। लेकिन अधिकांश सांस्कृतिक कार्यक्रम शाम में होते हैं जिस समय ट्रैफिक की स्थिति काफी खराब होती है। इस कारण ऐसे कार्यक्रमों को देखने से वंचित भी रह जाना पड़ता है।

यहां खाने-पीने की कौन-कौन सी जगहें पसंद हैं?
मुझे चाइनीज और इटैलियन खाने और कबाब खास पसंद हैं। इसके लिए होटल हयात जाना पसंद करती हूं। चाइनीज के लिए हयात का चाइना किचेन खास पसंद है। इसके अलावा हैबिटेट सेंटर का भी खाना खूब पसंद आता है।

फुरसत में क्या करना पसंद करती हैं?
फुरसत मिलती है तो कविताएं लिखती हूं। मेरी कविताएं रोमांटिक होती हैं लेकिन उन्हें प्रकाशित नहीं करवाती। आर्ट का भी शौक है लेकिन सिर्फ देखने का। मैं पेंटिंग बना नहीं पाती हूं, पेंटिंग प्रदर्शनी देखना पसंद आता है। समय मिले तो प्राकृतिक जगहों, पार्को में समय बिताना भी पसंद आता है। 

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