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रेगिस्तान में छुट्टियां रोमांच के साथ रोमांस भी

दिसंबर का महीना आते ही क्रिसमस और नए साल का मजा लेने के लिए अधिकतर लोग कहीं न कहीं जाकर इस मौके को भुनाना चाहते हैं। ऐसे लोगों के लिए राजस्थान और गुजरात हॉट प्लेस के रूप में फेमस हैं और हों भी क्यों न आखिर दिल्ली की कड़ाके की ठंड से राहत जो मिलती है। आइए जाने क्या है रेगिस्तानी जगहों पर जाने के फायदे।

सर्द मौसम में रेगिस्तान में छुट्टियां बिताने का अपना अलग ही आनंद है, जिसमें रोमांच तो है ही लेकिन रोमांस भी कम नहीं है। डेजर्ट लैंडस्केप्स के गोल्डन मैजिक को हमने बहुत सी फिल्मों में देखा है। जिसे देखकर लगता है कि मरुभूमि के रेतीले संसार में एक अनोखे अंदाज में मौजमस्ती की जा सकती है। कहने को मरुभूमि एक बियाबान और रंगहीन परिदृश्य के अलावा कुछ नहीं।

लेकिन वहां प्रकृति का यही रूप एडवेंचर का अनुभव कराता है। मरुभूमि का एकाकीपन सर्दी के मौसम में भी रोमांस को जगा सकता है। यही वजह है कि मौसम में शीतलता आते ही देश-विदेश के हजारों सैलानी ‘ग्रेट इंडियन डेजर्ट’ यानि थार के रेगिस्तान में छुट्टियां मनाने पहुंच जाते हैं। राजस्थान और गुजरात के बहुत बड़े हिस्से में फैले रेगिस्तान में पर्यटन के विविध आयामों से सामना होता है। कहीं रेत के धोरों पर पैदल चलने का रोमांच है तो कहीं ऊंट के कारवां के रूप में कैमल सफारी का लुत्फ है।

डेजर्ट कैम्पिंग के साथ लोकरंजन भरी प्रस्तुतियों की ‘कल्चरल इवनिंग’ हर शाम को रोमांटिक बना सकती है तो रेतीली धरती की शीतल रातों में तारों को निहारने में रोमांस भी है और थ्रिल भी। राजस्थान में जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर तथा गुजरात में कच्छ का रण डेसर्ट हॉलिडे के प्रचलित स्थान हैं। वैसे मरुप्रदेश का वास्तविक स्वरूप देखने के लिए कैमल सफारी सबसे बेहतर विकल्प है। चाहे ऑनलाइन बुकिंग करा कर या किसी डेजर्ट सिटी में पहुंचकर वहां के टूर ऑपरेटर से संपर्क कर सफारी पर निकल सकते हैं।

डेजर्ट सफारी के लिए 2 रातों से 14 रातों के विकल्प में से अपनी सुविधानुसार चुन सकते हैं। जितनी लम्बी रूपरेखा होगी डेजर्ट हॉलिडे उतना ही यादगार बनेगा, क्योंकि इसके लिए उसी हिसाब से रूट तय किया जाता है। सफारी में डेसर्ट फॉरेस्ट, मृगमरिचिका सी हरियाली, कीकर और कैक्टस से सजे बियाबान जैसे विविध लैंडस्केपों का अनुभव किया जा सकता है। जरा सोचिए खुश्क और दिशाहीन बियाबान में ऊंट पर चलते हुए अचानक सांय-सांय तेज हवाएं चलने लगें तो ‘शिफ्टिंग सेंड ड्युन्स’ का थ्रिलिंग सीन देखने का अवसर भी मिल सकता है।

दिन और रात के तापमान में अनोखी विषमता महसूस करने का मौका भी केवल डेजर्ट हॉलिडे में ही मिलेगा। सफारी रूट पर रेगिस्तान के छोटे छोटे गांवों में लोगों के कठिन जीवन से रूबरू होना भी किसी एडवेंचर से कम नहीं। डेसर्ट सिटी के किले, महल, हवेली और छतरियां इस सफर का अतिरिक्त आकर्षण होते हैं। यही वजह है, डेजर्ट हॉलिडे में एक अनकहा-अनसुना रोमांच नजर आता है।

सुनहरी रेत के असीमित संसार को देखना हो तो जैसलमेर से उपयुक्त अन्य कोई सैरगाह नहीं है। राव जैसल द्वारा स्थापित यह नगरी एक ऐतिहासिक शहर होने के साथ देश विदेश के सैलानियों का पसंदीदा पर्यटन स्थल है। गोल्डन सिटी के नाम से विख्यात जैसलमेर में देखने के लिए एक विशाल किला, सुंदर हवेलियां और शहर से कुछ दूर स्थित सैंड ड्यून्स हैं। 

पीले पत्थरों से बने जैसलमेर फोर्ट को ‘सोनार किला‘ कहा जाता है। करीब 80 मीटर ऊंची त्रिकूट पहाड़ी पर स्थित यह किला विशाल परकोटे से घिरा है। सोनार किले के अंदर कुछ सुंदर महल भी दर्शनीय हैं।  इस शहर में भव्य हवेलियां भी पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।  19 वीं शताब्दी में समृद्घ व्यवसायियों द्वारा बनवाई गई ये हवेलियां छोटे वास्तुशिल्प में कला का समावेश करने के उस दौर का अद्भुत उदाहरण हैं।  इनमें सबसे आकर्षक पटवों की हवेली है। जैसलमेर की गडीसर ङील भी एक पर्यटन आकर्षण है।

जहां बोटिंग का आनंद लिया जा सकता है। वैसे जैसलमेर आने वालों के लिए यहां का सबसे बड़ा आकर्षण शहर से 42 कि़ मी़ दूर स्थित ‘सम सैंड ड्यून्स‘ हैं। वहां तक सैलानी जीप द्वारा पहुंच सकते हैं। वहां पहुंच कर आपके सामने बस रेत ही रेत होगी। चाहे आप रेत पर पैदल घूमें या फिर ऊंट की पीठ पर बैठ रेत के धोरों के मध्य घूमने निकल पड़ें। शाम के समय मरुटीलों के पीछे छिपते सूर्य का दृश्य तो आपका मन मोह लेगा।  सम गांव के अतिरिक्त लोद्रवा, कनोई, कुलधारा जैसे गांवों के समीप भी रेत के टीले देखे जा सकते हैं। यही वजह है कि डेसर्ट हॉलिडे के लिए आज जैसलमेर सबसे लोकप्रिय डेस्टिनेशन है।

राजस्थान का बीकानेर शहर भी अपने किले, महल और हवेलियों के लिए पर्यटन जगत में प्रसिद्घ है।15वीं शताब्दी में राव बीकाजी द्वारा स्थापित की गई यह नगरी विशाल चार दीवारी से घिरी थी। जूनागढ़ फोर्ट, लालगढ़ पैलेस, गंगा गोल्डन जुबली म्यूजियम, देवी कुंड और केमल रिसर्च सेन्टर आदि दर्शनीय स्थान हैं।  बीकानेर के निकट भी सैलानी सैंड ड्यून्स की सैर का लुत्फ उठा सकते हैं।  इसके लिए 32 कि़ मी़ दूर गजनेर वाइल्ड लाइफ सैंक्चुरी या कटारीसर गांव जाना हेाता है। राजस्थान के ही नागौर और चूरू के नजदीक भी रेत के टीलों का क्षेत्र है।  यह तो तेज हवाओं के साथ अक्सर स्थान बदल लेते हैं।  इसलिए इन्हें शिफ्टिंग सैंड ड्यून्स भी कहा जाता है। बाड़मेर के आसपास मरुप्रदेश के गांवों को करीब से देखने का मौका मिलता है। जहां आज भी लोग मिट्टी की दीवारों वाले घरों में रहते हैं।

पर्यटन मेले
डेजर्ट हॉलिडे को राजस्थान टूरिज्म के विभिन्न मेलों के साथ जोड़ लिया जाए तो पूरे राजस्थान की संस्कृति को देखने समझने का मौका भी मिल जाता है। इन दिनों आयोजित होने वाले पर्यटन मेलों में जोधपुर का मारवाड़ फेस्टिवल, अजमेर के निकट पुष्कर मेला, बीकानेर का केमल फेस्टिवल नागौर का नागौर मेला, जैसलमेर का डेसर्ट फेस्टिवल प्रमुख हैं।

सावधानी एवं तैयारी

-रेगिस्तान में दिन-रात के तापमान में 20 डिग्री तक का अंतर हो सकता है। इसलिए दिन के लिए सूती वस्त्र एवं रात्रि के लिए ऊनी वस्त्र साथ रखें।
-दिन में हल्के रंग के वस्त्र पहनें।
-जहां तक संभव हो दिन भर हैट और सनग्लास पहने रहें। छाता साथ रखें।
-सनस्क्रीन क्रीम एवं मॉएश्चराइजर का प्रयोग करें।
-ग्रुप का हर व्यक्ति अपने साथ पर्याप्त मिनरल वाटर अवश्य रखे। चाकू एवं टार्च भी रखें।
-गाइड के पास फस्र्ट एड किट रहनी चाहिए। इस बारे में पूछ लें।
-गाइड के साथ रहें और उसके निर्देशों को ध्यान रखें। रेतीले समंदर में दिशाहीन हो भटकने का भय रहता है।

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