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आने लगे हैं परदेसी परिन्दे

आने लगे हैं परदेसी परिन्दे

सर्दी के दस्तक देते ही बर्डवॉचर इंतजार करने लगते हैं परदेसी परिन्दों का। यही मौसम होता है जब हजारों की संख्या में पंख फहराते मेहमान हमारी नदियों, झीलों आदि पर डेरा डाल लेते हैं। ऐसे में बर्डवॉचर की तो बांछें खिल जाती है, जो समय मिलते ही अपना तामझाम उठाकर निकल पड़ते हैं किसी भी वैटलैंड की ओर।

भले ही यह पंछी बिन बुलाए मेहमान होते हैं, लेकिन यह पक्षीप्रेमियों को ही नहीं बल्कि हर प्रकृति प्रेमी को भाते हैं। दिलचस्प बात यह है कि सर्दियों में पंछी निहारने के लिए दूर किसी विशाल बर्ड सैंक्चुरी तक जाए बिना भी पंछी निहारने की कला का आनंद लिया जा सकता है, क्योंकि दिल्ली और इसके आसपास सभी छोटे-बड़े जलाशय रंगबिरंगे परिदों की अठखेलियों से गुलजार हो जाते हैं। तो भला आप पीछे क्यों रहें आप भी किसी दिन डे-आउट पर या फिर वीकएंड पर निकल पड़िए इन पंख फहराते पाहुनों के स्वागत के लिए।
 
शायद हम दिल्लीवासी इस बात से अनभिज्ञ हों कि राजधानी दिल्ली संसार का ऐसा दूसरा कैपिटल सिटी है जहां सबसे ज्यादा पंछी देखे जा सकते हैं। दिल्ली को यह विशेष दर्जा दिलवाने में सर्दी के मौसमी मेहमानों का खासा योगदान है। हजारों मील दूर से आने वाले ये आप्रवासी पंछी हर वर्ष दिल्ली को मेहमान नवाजी का अवसर देते हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और इसके आसपास ऐसे कई स्थान हैं जो आज बर्डवॉचिंग के महत्वपूर्ण ठिकाने बने हुऐ हैं। इनमें दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में स्थित ठिकाने तो अलग अलग दिन डे-विजिट में घूमे जा सकते हैं। जबकि कुछ घंटों की ड्राइविंग का मूड हो तो वीकएंड पर दिल्ली के निकट स्थित किसी बर्ड सैंक्चुरी का रुख कर सकते हैं।
 
दिल्ली के बर्ड पैराडाइज ठिकानों में पहला स्थान तो दिल्ली के चिड़ियाघर का ही है। इस वन्यप्राणी उद्यान के ईको फ्रेंडली माहौल ने इसे प्रवासी पक्षियों के लिए एक आदर्श ठिकाना बना दिया है। हर साल सर्दियां आते ही यहां इन पंछियों का आगमन शुरू हो जाता है। दिल्ली-ज़ू में आने वाले प्रवासी पक्षियों में पिनटेल, शोवेलर, कॉमन टील और डैबचिक प्रमुख हैं। इनके अलावा व्हाइट स्ट्रोक, व्हाइट इबिस, स्पॉट बिल्ड डक और लिटिल कॉरमोरेंट भी अच्छी संख्या में देखने को मिलते हैं।

शायद इसीलिए इन दिनों चिड़ियाघर में स्कूली बच्चों और युवाओं की भी खासी भीड़ होती है। जल में खेल करते रंगबिरंगे पक्षी हर किसी को सुहाते है। वैसे दिल्ली में पक्षी प्रेमियों के लिए यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क भी ऐसा ही एक ठिकाना है। दो हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैला यह पार्क वजीराबाद के निकट है। यह एक छोटा लेकिन अच्छी तरह संवारा गया पक्षी उद्यान है। तभी तो इस वर्ष यहां प्रवासी पक्षियों की तादाद 5000 से अधिक पहुंच गई है। इनमें रैड क्रेस्टड पोचर्ड, पिनटेल और कॉरमोरेंट प्रमुख हैं।

दिल्ली के समीप नोएडा में ओखला बर्ड सैंक्चुरी और ओखला बैराज के आसपास मेहमान परिंदों का जमघट भी सैलानियों को आकर्षित करता है। यहां इन परिंदों की 35 प्रजाति देखी जा सकती हैं। प्रवासी परिन्दों को तो जहां पर्याप्त मात्र में जलराशि नजर आती है, ये वहीं अपना डेरा डाल लेते हैं। नजफगढ़ ङील आज भले ही लुप्त हो रही हो लेकिन नजफगढ़ ड्रेन के रूप में इन दिनों पक्षियों को एक ठिकाना मिल जाता है। इसी वजह से इसे दिल्ली के वैटलैंड ईकोसिस्टम का हिस्सा मान कर प्रस्तावित नजफगढ़ ड्रेन बर्ड सैंक्चुरी मान लिया गया है। दिसम्बर माह में यह बर्डवॉचिंग का आदर्श ठिकाना बन जाता है।  यही नहीं राजधानी के गगन पर दिनभर उन्मुक्त मंडराते ये पंछी यमुना रिवर बेल्ट, संजय गांधी ङील, लोधी गार्डन, सीरी फोर्ट, जेएनयू, बुद्घजयंती पार्क और रिज आदि के हरे भरे क्षेत्रों में भी नजर आते हैं।

पक्षियों के कलरव के बीच वीकएंड मनाना हो तो दिल्ली के आसपास कई गंतव्य है। इनमें सबसे लोकप्रिय हरियाणा में सुलतानपुर बर्ड सैंक्चुरी है। यहां देखे जाने वाली 250 किस्मों में से करीब 90 किस्म तो प्रवासी पक्षियों की हैं। इनमें फ्लेमिंगो, कॉमन टील, नार्दन पेनटेल, येलो वैगटेल, व्हाइट वैगटेल, रोजी पेलिकन, स्टर्लिंग, नीली गर्दन वाला पिपिट जैसे पक्षी मन मोह लेते हैं। आप्रवासी पछियों के मामले में भरतपुर का केवलादेव घाना  राष्ट्रीय उद्यान तो विश्व प्रसिद्ध है। यहां आने वाले सैलानी  साइबेरियन क्रेन, पेलिकन, गीज़, ग्रे हेरॉन, लम्बे कान वाला ब्राउन बेट, शैंक, स्टिंट, हॉक, वैगटेल, बंटिंग, लार्क, पिपिट, गेरगेनी टील जैसे प्रवासी पक्षियों को देख सकते हैं।

सावधानियां बरतें

-प्रवासी पक्षियों का मौसम केवल नवम्बर से मार्च मध्य तक होता है।
-पंछी निहारते समय अपने किसी क्रियाकलाप से उन्हें परेशान न करें।
-इनके निकट किसी प्रकार का ध्वनि प्रदूषण न करें। 
-पक्षियों को स्वयं किसी तरह का भोजन नहीं  देना चाहिए।
-इनके आवासीय क्षेत्रों में कूड़ा-कचरा नहीं  डालना चाहिए।
-यह समय कुछ पक्षियों की प्रजनन प्रक्रिया का भी होता है, बर्डवाचिंग में उनके घोंसले आदि तक पहुंचने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
-पक्षियों की पहचान करने के लिए बर्ड एक्सपर्ट्स द्वारा लिखी गई पुस्तकों की सहायता लें।
-उनकी आवाजों के पहचानने की आदत डालें।
-मैट, बायनाकुलर, कैमरा और टेलीफोटो लैंस साथ ले जाना न भूलें।

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