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इनसे सीखें सफलतापूर्वक करियर स्विच करने के गुर

माधवन, उम्र-42
अब: रिसर्च प्रमुख, पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च, नई दिल्ली
पहले: बैंक ऑफ अमेरिका, सिंगापुर में एशिया के प्रमुख और वरिष्ठ रणनीतिकार


अपनी पहली नौकरी में माधवन का अधिकतर समय अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा में आने वाले उतार-चढ़ाव के अध्ययन और उन पर पेपर लिखने में बीतता था। वेतन अच्छा था और अन्य भत्तों व सुविधाओं की भी कमी नहीं थी। पर माधवन को एक ही तरह का काम करना अब पसंद नहीं आ रहा था। कुछ नया करना चाहते थे।

वर्ष 2005 में माधवन की मुलाकात अपने दोस्त सी.वी. मधुकर से हुई, जो आईआईटी, चैन्नई से पढ़ाई करने के बाद अमेरिका स्थित हारवर्ड कैनेडी स्कूल से पब्लिक पॉलिसी में मास्टर की पढ़ाई कर रहे थे। उन्होंने माधवन को भारत में शोध सेवा का कार्य शुरू करने की सलाह दी। सी. वी. मधुकर ने पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च की स्थापना में माधवन को साझेदारी के लिए आमंत्रित किया। इस संस्था का कार्य भारतीय सांसदों को विभिन्न वैधानिक और नीतिगत मुद्दों की पृष्ठभूमि के संबंध में शोध सेवा मुहैया कराना था। माधवन कहते हैं, ‘आईसीआईसीआई सेक्योरिटीज और बैंक ऑफ अमेरिका में अपने काम में मैंने सीखा था कि शोध कार्य कैसे करते हैं और उन्हें आसान भाषा में कैसे प्रस्तुत किया जाता है।’

वर्ष 2005 में माधवन ने अपनी नौकरी छोड़कर अपने दोस्त के साथ पीआरएस रिसर्च सेंटर खोला। यह क्षेत्र नया था और पैसा भी यहां कम था, पर कुछ नया और अपनी बोरियत से बाहर आने का यह अच्छा मौका था। एक दिन मैं भारत सरकार की खाद्यान्न नीति का अध्ययन कर रहा होता हूं तो हो सकता है कि अगला दिन रक्षा खर्च पर शोध करने में बीते। संसद सत्र के दिनों में सूचना प्राप्त करने के लिए लगातार सांसदों के फोन आते रहते हैं।

सफलता के मंत्र: संपर्क बढ़ाना और पुराने संपर्को को बनाए रखना। योजना की स्पष्टता और निष्कर्ष को आसान बनाने का कौशल। नए करियर के बारे में शोध करना और करीबी दोस्तों से राय लेना।

अर्दशिर कॉन्ट्रेक्टर
उम्र 45
अब: सीईओ, किरण एनर्जी, सोलर एनर्जी, मुंबई
पहले: मैनेजिंग डाइरेक्टर, केपीएमजी, मुंबई

अर्दशिर ने अपने करियर में कई बार बदलाव किया। वे कहते हैं, ‘मुझे नई चीजों का निर्माण करना पसंद है। मैंने करियर की शुरुआत कृषि क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजमेंट के कार्य से की। उसके बाद इन्वेस्टमेंट बैंकिंग और फिर कंसल्टेंट के तौर पर भी काम किया। वर्ष 2009 में कंसल्टिंग से वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में जाने का मन बनाया।’

अर्दशिर कहते हैं, ‘सौर ऊर्जा का क्षेत्र भारत में अपनी विकास अवस्था में है। ऐसे में वर्ष 2009 में काम शुरू करके मेरे पास अपनी कंपनी को अग्रणी बनाने का मौका था। सरकार भी लगातार इस क्षेत्र को बढ़ावा दिए जाने की बात कर रही है। ऐसे में यह स्पष्ट संदेश था कि भविष्य में सौर ऊर्जा की मांग और अधिक बढ़ेगी।

सफलता के मंत्र: अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलना मुश्किल होता है। पर अर्दशिर कहते हैं, ‘चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद मेरे लिए कई करियर बदलना आसान था, मुझे नई चीजें निर्माण करने की अपनी क्षमता पर यकीन था।’

कहां रुकना है, यह जानना जरूरी: पिछले दस सालों में अर्दशिर ने लीगल आउटसोर्सिंग के क्षेत्र में भी काम किया और शिक्षा के क्षेत्र में भी काम करने की कोशिश की। पर जल्दी ही उन्हें लगा कि उन्हें फायदा होने की जगह नुकसान हो रहा है। ऐसे में लंबे समय तक उस प्रोजेक्ट में समय और पैसा लगाने की जगह उन्होंने वहां से बाहर निकलना बेहतर समझा।

पुराने संपर्कों का लाभ उठाना: नए काम में आगे बढ़ने के लिए कई बार आपके पुराने संबंध ही आधार बनते हैं। खासतौर पर नए कार्य में सही व्यक्ति के साथ साझेदारी करने में इससे काफी मदद मिलती है। अर्दशिर कहते हैं- अपने पार्टनर ग्रिफिन ग्रोथ को मैं लंबे समय से जानता था और वे जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में काम कर रहे थे। ऐसे में वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में काम करने के लिए ग्रिफिन से बेहतर पार्टनर कोई नहीं हो सकता था।

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